रायपुर - Raipur Chhattisgarh

रायपुर शहर छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी है और रायपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। और छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा शहर है।

1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पूर्व में मध्य प्रदेश का एक हिस्सा था। रायपुर नगर निगम 2014 में सबसे अच्छा शासन और भारत में प्रशासनिक प्रथाओं के लिए २१ शहरों से ६ वां स्थान दिया गया।

२०११ ई. की जनगणना के अनुसार, रायपुर जिले की कुल जनसँख्या ४०,६३,८७२ ( पुरुष : २०,४८,१८६ । महिला : २०,१५,६८६ ) के साथ सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला है।  जनसँख्या का १५.९० % रायपुर में निवास करते है।
रायपुर 9 वीं सदी के बाद से अस्तित्व में किया गया है; पुराने साइट और किले के खंडहर शहर के दक्षिणी भाग में देखा जा सकता है। रायपुर जिला ऐतिहासिक और पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण है। यह जिला दक्षिण कोशल राज्य का हिस्सा था और बाद में मौर्य साम्राज्य का हिस्सा माना जाता है। रायपुर हैहय राजवंश कलचुरी राजाओं की राजधानी रहा है। सातवाहन राजाओं ने 2-3 शताब्दी तक इस हिस्से पर शासन किया।

१८५४ में छत्तीसगढ़  तीन संभाग बनाये गये एक रायपुर था।  १ फरवरी १८५७ को तहसीलों का पुनर्गठन कर ५ तहसीलों की स्थापना की गई। १८६२ में छत्तीसगढ़ को  स्वतंत्र संभाग का दर्ज मिला और तीन जिले रायपुर, बिलासपुर और सम्बलपुर बनायागया। रायपुर नगर पालिक निगम की स्थापना १८६७ में हुई।

इतिहास
रतनपुर के कल्चुरि १४ वी सदी के अंत में दो शाखाओ में विभाजित हो गए। गौण शाखा में स्थापित हुई। १४ वी सदी के अंत में रतनपुर के राजा का रिस्तेदार लक्ष्मीदेव प्रतिनिधि के रूप में खल्वाटिका भेजा गया। लछमीदेव के पुत्र सिंघण ने शत्रुओ के १८ गढ़ जीते। सिंघण ने रतनपुर की प्रभुसत्ता नहीं मानी और स्वतंत्र राज्य की स्थापना की। सिंघण के पुत्र रामचन्द्र ने रायपुर नगर की स्थापना ( १४०९ ई.) की। रायपुर के लहुरी शाखा की स्थापना केशवदेव ने की थी।

केशव देव के काल में लहुरी शाखा जब रायपुर में स्थापित हुई तब उनकी आरंभिक रजधानी खल्लारी थी। १४०९ ई. में ब्रम्हदेव राय के काल में राजधानी खल्लारी से रायपुर स्थानांतरित हुई।

१७४१ ई. मराठा सेनापति भास्कर पंत ने रायपुर पर आक्रमण किया। इस समय यहाँ अमर सिंह का शासन था। १७५० ई. में मराठो ने आजीविका के लिए अमर सिंह को राजिम, रायपुर और पाटन परगने ७००० रुपये के बदले प्रदान कर शासन से अलग कर दिया।  १७५३ ई. में अमर सिंह की मृत्यु के बाद उनका पुत्र शिवराज सिंह उत्तराधिकारी बना परंतु १७५७ ई. में भोसले ने जगीरो को छीन लिया और करमुक्त ५ गांव प्रदान किया।

पर्यटन

हाटकेश्वर महादेव मंदिर : यह मंदिर रायपुर शहर से 5 कि.मी. दूर, खारून नदी के किनारे स्थित है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर प्रमुख हिन्दू तीर्थ-स्थलों में से एक है। इस मंदिर के गर्भगृह में विराजित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। यह छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैै।

इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1402 में, कलचुरी राजा रामचन्द्र के पुत्र ब्रह्मदेव राय के शासनकाल में हाजीराज नाइक द्वारा कराया गया था। बारीक नक़्क़ाशी से सुसज्जित इस भव्य मंदिर के आंतरिक और बाहरी कक्षों की शोभा देखते ही बनती है। इस मंदिर के मुख़्य आराध्य हाटकेश्वर महादेव नागर ब्राह्मणों के संरक्षक देवता(इष्ट देवता या कुल देवता) हैं।

पुरखौती मुक्तांगन : नवंबर 2006 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति माननीय ए पी अब्दुल कलाम द्वारा उद्घाटन किया गया यह आनंदित उद्यान छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति की एक झलक देता है। यहाँ छत्तीसगढ़ के जीवंत खजाने पर विभिन्न लोक कलाएं, अद्भुत, परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए आदिवासियों के जीवन-संबंधी प्रदर्शन है ।

दूधाधारी मंदिर : इस मंदिर का निर्माण 17 वीं शताब्दी में कराया गया था। यह रायपुर में सबसे पुराने मंदिरो में से एक है। वैष्णव धर्म से संबंधित है। दुधधारी मंदिर में रामायण काल की मूल मूर्तियां हैं। रामायण काल की कलाकृतियां बहुत ही दुर्लभ हैं, जो कि इस मंदिर को अपनी तरह विशेष बनाता है।
यहां एक महान स्वामी हनुमान के भक्त थे जो स्वामी बल्लाहदादा दास के नाम से रहते थे। वे केवल दूध (“दुध-अहारी”) पर जीवित रहे और इसलिए, भगवान राम को समर्पित यह मंदिर दुधधरी मंदिर के रूप में जाना जाने लगा। कालचुर राजा जैत सिंह (1603-1614 एडी) द्वारा निर्मित मंदिर की बाहरी दीवारों को भगवान राम से संबंधित मूर्तियों से सजाया गया है।