भारत वन स्थिति रिपोर्ट - Indian State Of Forest Report 2021

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के द्वारा जारी भारत का वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 ( ISFR 2021 ) के अनुसार वन पिछले दो वर्षों में देश के कुल वन और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुई है। भारत का कुल वन क्षेत्र अब 7,13,789 वर्ग किलोमीटर है, यह देश के भौगोलिक क्षेत्र का 21.71% है जो वर्ष 2019 में 21.67% से अधिक है। पहली बार टाइगर रिज़र्व, टाइगर कॉरिडोर और गिर के जंगल जिसमें एशियाई शेर रहते हैं में वन आवरण का आकलन किया गया।


वन क्षेत्र (आवरण) में अधिकतम बढ़ोतरी 

  1. आंध्र प्रदेश (647 वर्ग किमी) 
  2. तेलंगाना (632 वर्ग किमी)
  3. ओडिशा (537 वर्ग किमी)

क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा वन क्षेत्र 
  1. मध्य प्रदेश
  2. अरुणाचल प्रदेश
  3. छत्तीसगढ़
  4. ओडिशा 
  5. महाराष्ट्र 

कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में वन आवरण के मामले में
  1. मिजोरम (84.53%)
  2. अरुणाचल प्रदेश (79.33%)
  3. मेघालय (76.00%)
  4. मणिपुर (74.34%) 
  5. नगालैंड (73.90%)

देश में कुल मैंग्रोव क्षेत्र 4,992 वर्ग किमी है। 2019 के पिछले आकलन की तुलना में मैंग्रोव क्षेत्र में 17 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि पाई गई है। मैंग्रोव क्षेत्र में वृद्धि दिखाने वाले शीर्ष तीन राज्य :
  1. ओडिशा (8 वर्ग किमी) 
  2. महाराष्ट्र (4 वर्ग किमी) 
  3. कर्नाटक (3 वर्ग किमी)

विशेष :

वर्ष 2011-2021 के मध्य बाघ गलियारों में वन क्षेत्र में 37.15 वर्ग किलोमीटर (0.32%) की वृद्धि हुई है, परंतु बाघ अभयारण्यों में 22.6 वर्ग किलोमीटर (0.04%) की कमी आई।
इन 10 वर्षों में 20 बाघ अभयारण्यों में वनावरण में वृद्धि हुई है, साथ ही 32 बाघ अभयारण्यों के वनावरण क्षेत्र में कमी आई।
बक्सा (पश्चिम बंगाल), अनामलाई (तमिलनाडु) और इंद्रावती रिज़र्व (छत्तीसगढ़) के वन क्षेत्र में वृद्धि देखी गई है जबकि कवल (तेलंगाना), भद्रा (कर्नाटक) और सुंदरबन रिज़र्व (पश्चिम बंगाल) में कमी हुई।
अरुणाचल प्रदेश के पक्के टाइगर रिज़र्व में सबसे अधिक लगभग 97% वन आवरण है।



प्राकृतिक वनों में गिरावट दर्ज की गई है जो कि एक चिंता का विषय है :
मध्यम घने जंगलों या ‘प्राकृतिक वन’ में 1,582 वर्ग किलोमीटर की गिरावट आई है। यह गिरावट खुले वन क्षेत्रों में 2,621 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि के साथ-साथ देश में वनों के क्षरण को दर्शाती है। साथ ही झाड़ी क्षेत्र में 5,320 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र में वनों के पूर्ण क्षरण को दर्शाता है।


अन्य तथ्य :
  • अक्तूबर, 2021 में भारत के वन शासन में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाने के लिये MoEFCC द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में एक संशोधन प्रस्तावित किया गया था।
  • देश के जंगल में कुल कार्बन स्टॉक 79.4 मिलियन टन की बढ़ोतरी के साथ 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है।
  • वर्ष 2019 में वनों में मौजूद बाँस की संख्या 13,882 मिलियन से बढ़कर वर्ष 2021 में 53,336 मिलियन हो गई है।





बिरजिया जनजाति Birjiya Tribe




बिरजिया का अर्थ होता है-जंगल की मछली। बिरजिया जनजाति के लोग अपना मूल निवास सरगुजा जिले को मानते हैं। ये मुण्डा परिवार की ‘बिरजिया’ भाषा के साथ ‘सदरी’ भाषा का प्रयोग करते हैं। इस जनजाति के लोग त्योहार के रूप में सरहुल,करमा,फगुआ तथा रामनवमी जैसे उत्सव मनाते हैं। वर्तमान समय में इस जनजातियों पर कोई शोधकार्य नहीें हुआ हैं। जिस वजह से इस जनजाति के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

विकारी एवं अविकारी शब्द क्या होते है ?



हिंदी भाषा में शब्दों में विकार की दृष्टि से दो भागों में बाँटा गया है।

1.विकारी शब्द :

जिन शब्दों का रूप-परिवर्तन होता रहता है वे विकारी शब्द कहलाते हैं। विकारी शब्द, लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल आदि से रूपांतरित होते रहते हैं। इसके अंतर्गत संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया आते हैं।

उदाहरण- 

  • लड़का खेलता है।
  • लड़की खेलती है।

इनमें 4 प्रकार होते है, संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया।


2.अविकारी शब्द :

ऐसे शब जिनका रूप अपरिवर्तनीय होता है वे अविकारी शब्द कहलाते हैं। अविकारी शब्द कभी और किसी परिस्थिति में अपने रूप को नहीं बदलते हैं। 

उदाहरण- 

  • लड़का अभी खेलेगा
  • लड़की अभी खेलेगी

जैसे : यहाँ, किन्तु, नित्य, और, हे, अरे आदि। इनमें क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक आदि हैं।

इनमें 6 प्रकार होते है, क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, उपसर्ग, निपात आदि आते हैं।

छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन - Chhattisgarh Rojgar Mission



छत्तीसगढ़ सरकार ने छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन बनाने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खुद इसके अध्यक्ष होंगे। इस मिशन के जरिए सरकार आने वाले 5 वर्षों में रोजगार के 12 से 15 लाख अवसर तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।


छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन के उपाध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। वर्तमान में प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला को इस मिशन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बनाया गया  है।


सदस्य :

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक, संचालक उद्योग, संचालक तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण, संचालक मत्स्य पालन, प्रबंध संचालक ग्रामोद्योग हस्तशिल्प विकास बोर्ड, खादी बोर्ड, प्रबंध संचालक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और गोधन न्याय मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सदस्य होंगे।

पोटा (Porta/Pota Cabins) केबिन क्या है ?



पोटा केबिन एक आवासीय स्कूल व्यवस्था है जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा वर्ष 2011 में एक प्रयोग के रूप में सुरु किया गया था।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों ( बस्तर ) में स्कूली भवन माओवादियों ने ध्वस्त कर दिए हैं। इनमे से बहुत सारे ऐसे स्कूल हैं, जिन्हें फिर से बनाया नहीं जा सकता है, क्यो इन क्षेत्रों में ठेकेदारों और शिक्षाकर्मियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। इसलिए बस्तर संभाग के कई क्षेत्रो में पोटा केबिन स्कूलों का निर्माण किया गया है, जहाँ पर नक्सल प्रभावित क्षेत्रो से बच्चों को आवासीय स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।


वर्तमान में चर्चा का कारण ?

बस्तर के IG सुंदरराज पी. ने खुलासा किया था कि कोरोना महामारी की वजह से बस्तर संभाग के सभी स्कूल, आश्रम, पोटाकेबिन बंद किये गए थे। यहां रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चे जब घर गए तो माओवादियों ने अंदरूनी इलाकों के बहुत से बच्चों को अपने संगठन से जोड़ने का प्रयास किया था।



एस. सोमनाथ ( S. Somanath) कौन है ?


एस. सोमनाथ (S. Somanath) एक भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियर और रॉकेट तकनीशियन हैं। सोमनाथ ने महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम में अपना प्री डिग्री प्रोग्राम पूरा किया। सोमनाथ ने टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कोल्लम (केरल विश्वविद्यालय) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और गतिशीलता और नियंत्रण ( Dynamics and Control ) में विशेषज्ञता के साथ भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की।


चर्चा का कारण ?

जनवरी 2022 में के . सिवन के बाद सोमनाथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष चुने गए। एक कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। सोमनाथ ने के. सिवन की जगह ली।


इससे पहले ?

पढ़ाई के बाद, सोमनाथ ने वर्ष 1985 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में शामिल हो गए। वे सुरुआत में  ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (Polar Satellite Launch Vehicle -  PSLV) परियोजना से जुड़े थे। वर्ष 2010 में वे वीएसएससी के एसोसिएट डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स) और जीएसएलवी एमके-III लॉन्च वेहिकल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने। वे नवंबर 2014 तक प्रोपल्शन एंड स्पेस ऑर्डिनेंस एंटिटी के उप निदेशक भी थे। 

जून 2015 से जनवरी 2018 तक उन्होंने वलियामाला, तिरुवनंतपुरम में तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र ( Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC)) के निदेशक के रूप में पदभार संभाला।  वर्ष 2018 में वो VSSC के निदेशक बने।


10 जनवरी, विश्व हिंदी दिवस संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा एक अंतरराष्ट्रीय भाषा के तौर पर प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य के लिए प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।विश्व हिंदी दिवस से संबंधी कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न है, जिन्हें आप को जानने चाहिए।


नोट : राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है।


तथ्य :

विश्व में हिंदी चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है पहले नंबर पर अंग्रेजी भाषा दूसरे नंबर पर मंदारिन और तीसरे नंबर पर स्पैनिश है।

पहले विश्व हिंदी दिवस का आयोजन 10 जनवरी 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा किया गया था।

विश्व हिंदी दिवस वर्ष 1975 को नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए अयोजित किया जाता है।

पहले विश्व हिन्दी सम्मेलन का बोधवाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम" था।

वर्ष 1975 में आयोजित पहले सम्मेलन के अतिथि मॉरीशस के प्रधानमंत्री "शिवसागर रामगुलाम" थे।








खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक पद (FCFI) हेतु पाठ्यक्रम (Syllabus)


खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय, रायपुर के अंतर्गत खाद्य नागरिक आपूर्ति निरीक्षक (CG Vyapam Food Inspector ) पदों हेतु आप तैयारी कर रहें है तो यह पाठ्यक्रम आप के लिए है।


परीक्षा पाठ्यक्रम syllabus for exam:

खाद्य निरीक्षक की भर्ती हेतु निर्धारित पाठ्यक्रम में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 से संबंधित जानकारी, विकेन्द्रीकृत खाद्यान्न उपार्जन छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान / चावल का उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वितरण, छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा और सौर्वभौम पीडीएस, छत्तीसगढ़ में पीडीएस के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाएं तथा कम्प्यूटर का सामान्य ज्ञान से संबंधित कुल 200 प्रश्नों का एक प्रश्न पत्र होगा। पश्न पत्र में सभी प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के होंगे जिसके चार विकल्प में से एक सही होगा।


पाठ्यक्रम का विवरण निम्नानुसार है

1. सामान्य ज्ञान (150 अंक) :

i. गणित, विज्ञान, भूगोल, भारतीय इतिहास, भारतीय अर्थव्यवस्था भारतीय संविधान एवं छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित जानकारी। 

ii. वर्तमान की समसामयिक घटनाएं


2. अन्य (50 अंक ) :

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 एवं छत्तीसगढ़ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा अधिनियम 2012 से संबंधित जानकारी, विकेन्द्रीकृत खाद्यान्न उपार्जन छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान / चावल का उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत वितरण, छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा और सौर्वभौम पीडीएस, छत्तीसगढ़ में पीडीएस के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाएं तथा कम्प्यूटर का सामान्य ज्ञान ।

Fatima Sheikh कौन थी ?



सर्च इंजन गूगल ने रविवार ( 9 जनवरी, 2022 ) को भारतीय शिक्षिका और नारीवादी आइकन फातिमा शेख की 191वीं जयंती मनाई। भारत की पहली महिला मुस्लिम शिक्षिका को सम्मानित करने के लिए, गूगल ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और एक डूडल (Doodle) समर्पित किया।


Fatima Sheikh कौन थी ?

फातिमा शेख मियां उस्मान शेख की बहन थीं, जिनके घर ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले रहते थे। उन्होंने फुले के स्कूल में दलित बच्चों को शिक्षित करना शुरू किया।

फातिमा शेख  मुलाकात सावित्रीबाई फुले से शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में हुई थी। उन्होंने फुले ने स्थापित सभी पांच स्कूलों में पढ़ाया। शेख ने 1851 में बंबई में दो स्कूलों की स्थापना में भाग लिया।

भारत सरकार ने वर्ष 2014 में अन्य अग्रणी भारतीय शिक्षकों के साथ उर्दू पाठ्यपुस्तकों में उनकी उपलब्धियों पर रोशनी डाली।


छत्तीसगढ़ की कारकू, डामोर, डामरिया एवं मवासी जनजाति - Damor Damaria



जनगणना 2011 के अनुसार कारकू, डामोर, डामरिया एवं मवासी जनजाति के लोग कोरबा जिले में निवासरत् है। यह जानकारी आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के द्वारा दी गयी है। 

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में निवासरत इन जंकतियों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नही है। जल्द ही आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजाति का फोटो हैण्डबुक तैयार किया जाएगा। 

डामोर औऱ डामरिया की बात करें तो इस नाम की जनजाति राजस्थान में निवासरत है। राजस्थान की कुल डामोर जनजाति का लगभग 98% राजस्थान की गुजरात से लगी सीमा में रहते है। डामोर जनजाति के लोगों को डामरिया भी कहा जाता है।