छत्तीसगढ़ में पशुधन - Cattle Stock in Chhattisgarh



छत्तीसगढ़ राज्य के ग्रामीण अंचलों में पशुपालन एक मुख्य व्यवसाय है। छत्तीसगढ़ में 20 वीं पशु संगणना 2019 के अनुसार प्रदेश में 1.59 करोड़ पशुधन तथा 1.87 करोड़ कुक्कुट एवं बतख पक्षीधन है।

पशुधन में गौ वंशीय पशु संख्या 62.90%, बकरी 25.24%, भैंस वंशीय 7.40%, सूकर 3.33% एवं भेड़ की संख्या 1.13% है। 


बढ़ावा देने हेतु :

छत्तीसगढ़ में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए, सकालो जिला अम्बिकापुर एवं परचनपाल जिला जगदलपुर में सूकर प्रजनन प्रक्षेत्र संचालित है। जिसमें लार्ज व्हाइटयार्कशायर, रशियन चरमुखा नस्ल के सुकरों का प्रजनन किया जाता है। नवीन सूकर पालन प्रक्षेत्र की स्थापना कुनकुरी जिला जशपुर में प्रगति पर है। बकरी पालन हेतु दो नवीन बकरी प्रजनन प्रक्षेत्र की स्थापना ग्राम सरोरा जिला रायपुर तथा रामपुर ( ठाठापुर) जिला कबीरधाम में की गई है।


आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 ( स्थिर भाव पर )

वृद्धि 2.27 प्रतिशत एवं सकल घरेलू उत्पाद में प्रतिशत योगदान 1.63 है।

पैसे का अवमूल्यन और पुनर्मूल्यांकन क्या है? What is what is Devaluation and Revaluation of Money / Rupee

आधुनिक मौद्रिक नीति में घरेलू मुद्रा का मूल्य बाह्य-मूल्य ( विदेशी मुद्राओं के मूल्य) से जान-बूझकर कम कर देना "मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation of Money)" कहलाता है। अवमूल्यन के विपरीत, घरेलू मुद्रा को और अधिक महंगा बनाने वाली विनिमय दर में बदलाव को पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) कहा जाता है।


अवमूल्यन (Devaluation) परिणाम क्या होता है ?

  • देश की मुद्रा की क्रय शक्ति में कमी।
  • विदेशी ग्राहकों के लिए निर्यात सस्ता है
  • घरेलू ग्राहकों के लिए आयात महंगा।
  • अल्पावधि के लिए, अवमूल्यन की वजह से मुद्रास्फीति, उच्च विकास और निर्यात की बढ़ती मांग बढ़ती है।

मुद्रा युद्ध (Currency war) क्या होता है ? 
मुद्रा युद्ध को प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन के रूप में भी जाना जाता है, यह रक ऐसी स्थिति है जिसमे एक देश अन्य मुद्राओं की तुलना में अपनी मुद्रा की विनिमय दर में गिरावट करता है , ताकि अन्य देशों से व्यापार लाभ हासिल कर सके। यदि सभी देश यह रणनीति अपनाते हैं, तो इससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में समान गिरावट आ सकती है, जिससे सभी देशों को नुकसान हो सकता है।


भारत में अवमूल्यन
वर्ष 1949, 1966 और 1991 में भारतीय रुपये का अवमूल्यन किया गया था। लेकिन 1991 में, अवमूल्यन दो चरणों में किया गया था - 1 जुलाई और 3 जुलाई को। इसलिए, कह सकते है कि भारत में मुद्रा का अवमूल्यन 3 चरणों में 4 बार किया गया।


भारत के लोगो का आधुनिक सूचना क्रांति ( कंप्यूटर का युग) के युग में योगदान - indian pioneers of modern information technology era



भारत ने हजारों वर्षों से अनेक खोज एवं अनुसंधान किये है। परंतु, हम इस पोस्ट में उन प्राचीन खोजो के बारे में बात नही करने वाले। इस पोस्ट में हम उन भारतीयों के बारे में जानेंगे जिन्होंने आधुनिक सूचना क्रांति के दौर अपना योगदान दिया :


रंगास्वामी नरसिम्हन इन्हें भारत में कंप्यूटर विज्ञान अनुसंधान का जनक माना जाता है। इनके नेतृत्व में पहला भारतीय स्वदेशी कंप्यूटर TIFRAC विकसित किया और 1975 में भारत सरकार की कंपनी CMC लिमिटेड की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे बाद में Tata Consultancy Services द्वारा खरीदा गया। वह  वर्ष 1977 में भारत सरकार से चौथे सर्वोच्च भारतीय नागरिक पुरस्कार पद्म श्री के प्राप्तकर्ता थे।


विनोद धाम (Vinod Dham) एक इंजीनियर हैं। इन्हें इंटेल के पेंटियम माइक्रो-प्रोसेसर के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें 'पेंटियम चिप के जनक' के रूप में जाना जाता है। इंटेल को छोड़ने के बाद धाम ने प्रतिद्वंद्वी AMD कंपनी के K6 - "पेंटियम किलर" प्रोसेसर के लॉन्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


आरोग्यस्वामी पॉलराज इन्होंने MIMO (मल्टीपल इनपुट, मल्टीपल आउटपुट) एक वायरलेस तकनीक पर कार्य किया।  इस टेक्नोलॉजी ने दुनिया भर में ब्रॉडबैंड वायरलेस इंटरनेट एक्सेस में क्रांति ला दी। यह वर्तमान में सभी कम्युनिकेशन (वाईफाई और 4 जी मोबाइल) का आधार है।


नरिंदर सिंह कपनी फ्रेंग एक भारतीय-अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार करने का श्रेय दिया जाता है, और उन्हें 'फाइबर ऑप्टिक्स का जनक' माना जाता है। फॉर्च्यून ने उनके नोबेल पुरस्कार-योग्य आविष्कार के लिए उन्हें सात '20वीं सदी के अनसंग नायकों' में से एक नामित किया। उन्हें 2021 में मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।


अजय वी. भट्ट एक भारतीय मूल के अमेरिकी कंप्यूटर आर्किटेक्ट हैं, जिन्होंने USB (यूनिवर्सल सीरियल बस), एजीपी (एक्सेलरेटेड ग्राफिक्स पोर्ट), पीसीआई एक्सप्रेस, प्लेटफॉर्म पावर मैनेजमेंट आर्किटेक्चर और विभिन्न चिपसेट सुधारों सहित कई व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली तकनीकों को परिभाषित और विकसित किया है। 


मिर्जा फैजान एक भारतीय एयरोस्पेस वैज्ञानिक हैं जिन्होंने ग्राउंड रियलिटी इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (GRIPS) विकसित किया है।


डॉ. रमानी ने 1983 में एक भारतीय अकादमिक नेटवर्क का प्रस्ताव रखा, और इसने ERNET परियोजना के शुभारंभ में योगदान दिया, जिसमें कई संस्थान शामिल थे जिन्होंने नेटवर्किंग में आर एंड डी टीमों का निर्माण किया। उन्होंने 1981 में एक प्रायोगिक उपग्रह-आधारित पैकेट स्विचिंग नेटवर्क के माध्यम से तीन शहरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और 1982 में संचार के लिए कम ऊंचाई वाले भूमध्यरेखीय उपग्रह का प्रस्ताव करने वाले एक अग्रणी पेपर का सह-लेखन किया।


अजय वी. भट्ट को USB (यूनिवर्सल सीरियल बस) के खोजकर्ता के रूप में जाना जाता है। इन्होंने AGP (एक्सेलरेटेड ग्राफिक्स पोर्ट), PCI एक्सप्रेस, प्लेटफॉर्म पावर मैनेजमेंट आर्किटेक्चर और विभिन्न चिपसेट सुधारों सहित कई व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली तकनीकों पर काम किया और विकसित किया है। 


जगदीश चंद्र बोस वास्तव में पहले व्यक्ति थे जिन्होंने वर्ष 1895 में सार्वजनिक रूप से संचार के लिए रेडियो तरंगों के उपयोग का प्रदर्शन किया था, ठीक दो साल बाद मार्कोनी ने इंग्लैंड में इसी तरह का डेमो दिया था। Wireless communication की खोज श्रेय जगदीश चंद्र को जाता है।


अभय भूषण फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल (जिस पर उन्होंने आईआईटी-कानपुर में एक छात्र के रूप में काम करना शुरू किया था) और ईमेल प्रोटोकॉल के शुरुआती संस्करणों के लेखक हैं।


नरिंदर सिंह कपनी एक भारतीय-अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें फाइबर ऑप्टिक्स पर अपने काम के लिए जाना जाता था। उन्हें फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार किया, जिस वजह से उन्हें उन्हें 'फाइबर ऑप्टिक्स का जनक' माना जाता है। फॉर्च्यून ने उनके नोबेल पुरस्कार-योग्य आविष्कार के लिए उन्हें सात '20वीं सदी के अनसंग नायकों' में से एक का नाम दिया। उन्हें 2021 में मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।



विमुद्रिकारण क्या है ? आसान भाषा में What is demonetisation?

विमुद्रीकरण एक ऐसी आर्थिक गतिविधि है जिसके अंतर्गत सरकार पुरानी प्रचलित मुद्रा को चलन से बाहर करने के लिए समाप्त कर देती है और नई मुद्रा को सुरु करती है। दूसरे शब्दों में कहें तो, विमुद्रीकरण में एक मुद्रा इकाई से "कानूनी निविदा (Legal tender) का दर्जा वापस ले लिया जाता है।


दुनिया में विमुद्रिकारण : 

  • वर्ष 1943 में नीदरलैंड के नाजी कब्जे के दौरान, 500- और 1000-गिल्डर बैंक नोटों का विमुद्रीकरण किया गया था, बाद में जब नाजी शासन समाप्त हुआ तो 100-गिल्डर नोटों को विमुद्रीकृत किया गया था।
  • ब्रिटेन में दशमलव प्रणाली अपनाने के बाद वर्ष 1971 में पहली बार वर्ष 1971 में पुराने नोटो को चलन से बाहर निकाला।
  • वर्ष 1984 में मुहम्मदु बुहारी की सरकार के दौरान, नाइजीरिया में पुराने नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और एक नई मुद्रा पेश की गयी।
  • अफ्रीकी देश घाना में वर्ष 1982 में विमुद्रीकरण किया था।
  • वर्ष 2015 में जिम्बाब्वे सरकार ने जिम्बाब्वे डॉलर को अमेरिकी डॉलर से बदला।
  • वर्ष 1987 में म्यांमार की सैन्य सरकार ने कालाबाजारी और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए म्यांमार के चलन के 80% मुद्रा को अमान्य कर दिया।
  • वर्ष 1991 में मिखाइल गोर्बाचेव ने 50 और 100 रूबल के नोट वापस लेने का फैसला किया। इसे वित्त मंत्री वैलेन्टिन पावलोव के नाम पर पावलोव सुधार के नाम से भी जाना जाता था।
  • ऑस्ट्रेलिया ने विमुद्रीकरण किया और 1996 में सभी कागजी नोटों को प्लास्टिक मुद्रा से बदल दिया।
  • पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने 2016 में काले धन पर अंकुश लगाने के लिए पुराने डिजाइन के नोटों को बंद करने का फैसला किया।
  • भारत में आजादी के पहले 12 जनवरी 1946 को, आजादी के बाद 1978 और 8 नवंबर 2016 को विमुद्रिकारण किया।


विमुद्रिकारण के कारण :

जैसा कि हम इतिहास में देख सकते है कि विभिन्न देशो ने विभिन्न कारणों से विमुद्रिकारण किया। भारत सरकार ने विमुद्रिकारण के निम्न कारण बताए थे :

  • काले धन/समानांतर अर्थव्यवस्था/छाया अर्थव्यवस्था के खतरे से निपटने के लिए।
  • भारत में कैश सर्कुलेशन सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जुड़ा है इसलिए कैश ट्रांजैक्शन को कम कर भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने और कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने ले लिए।
  • जाली मुद्रा के खतरे से निपटने के लिए
  • आतंकवादी गतिविधियों/आतंकवादी वित्त पोषण के लिए उपयोग की जा रही नकदी पर रोक लगाने के लिए।


विमुद्रीकरण के प्रभाव 

विमुद्रीकरण या नोटबंदी का गहरा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत में विमुद्रिकारण की वजह से अर्थव्यवस्था में तरलता की कमी हुई, और डिजिट लेनदेन में वृद्धि हुई। विमुद्रीकरण के बाद, मांग गिर गई, व्यवसायों को संकट का सामना करना पड़ा और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर भी इसका प्रभाव हुआ।



इंटरनेट और इसका इतिहास व वर्तमान - History Of Internet and Present


वर्तमान में इंटरनेट दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। अप्रैल 2022 तक, दुनिया भर में पांच अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जो वैश्विक आबादी का 63 प्रतिशत है। इसमें से 4.65 अरब सोशल मीडिया यूजर्स थे।


इंटरनेट के बारे में किसने सोचा ?

1960 के दशक की शुरुआत में रैंड कॉर्पोरेशन में एक पोलिश-अमेरिकन इंजीनियर पॉल बरन द्वारा शीत युद्ध के दौरान आंशिक विनाश के दौरान संचालन को बनाए रखने के लिए "distributed adaptive message block switching" का सैद्धांतिक मॉडल विकसित किया था। शुरुआत में इस विचार को नकार दिया गया। यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL) में डोनाल्ड डेविस ने भी स्वतंत्र रूप से  वर्ष 1965 में इसी तरह की अवधारणा प्रस्तुत किया था। ये दोनों अवधारणाओं ने वर्तमान इंटरनेट की नींव डाली।


इतिहास :

इंटरनेट के विकास का कार्य 1960 के दशक में USA में  Advanced Research Projects Agency (ARPA) के द्वारा अनुसंधान (Research) और पैकेट स्विचन के लिए किया गया। वर्ष 1969 में पहली बार दो कंप्यूटरों को नेटवर्क के मन्ध्यम से जोड़ा गया, और नेटवर्क नियंत्रण कार्यक्रम 1970 में लागू किया गया था। इस नेटवर्क की घोषण वर्ष 1971 में की गई।

वर्ष 1973 में NPL नेटवर्क और ARPANET को आपस में जोड़ा गया। ये दोनों नेटवर्क पैकेट स्विचिंग का उपयोग करने वाले दुनिया के पहले दो नेटवर्क थे।

1 जनवरी 1983 को इंटरनेट का आधिकारिक जन्मदिन माना जाता है। क्यो की, इससे पहले विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्क में एक दूसरे के साथ संवाद करने का कोई मानक तरीका नहीं था। ट्रांसफर कंट्रोल प्रोटोकॉल/इंटरनेटवर्क प्रोटोकॉल (TCP/IP) नामक एक नया संचार प्रोटोकॉल स्थापित किया गया था। इसने विभिन्न नेटवर्क पर विभिन्न प्रकार के कंप्यूटरों को एक दूसरे से जोड़ा जा सका।

वाणिज्यिक इंटरनेट सेवा प्रदाता (Commercial Internet service providers -ISPs) की शुरूआत वर्ष 1989 में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला वाणिज्यिक डायलअप आईएसपी The World था, जो 1989 में शुरू हुआ।


भारत में इंटरनेट की शुरुआत कब हुई ?

भारत में इंटरनेट की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। वर्ष 1986 में Educational Research Network (ERNET) की स्थापना की गई थी। तब यह केवल शैक्षिक और अनुसंधानो के लिए उपलब्ध थी। 15 अगस्त 1995 को भारत में इंटरनेट आम जनता के लिए उपलब्ध हुआ।



महाराणा प्रताप संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य जो आप को जानने चाहिए



महाराणा प्रताप एक वीर राजपूत योद्धा थे जिन्होंने मुगलो की अधीनता स्वीकार नही की और अपने राज्य को स्वतंत्र बनाये रखने के प्रयास में मृत्युपर्यन्त लगे रहें। ऐसे योद्धा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न है जिन्हें आप को जानने चाहिए :

  • महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ के उदय सिंह द्वितीय और जयवंता बाई के घर, भारतीय पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 1597 की ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार को सूर्योदय से 47 घड़ी, 13 पल पर कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। हालांकि जन्म के दिन अंग्रेजी वर्ष 1540 के मई महीने की 9 तारीख थी।
  • उनके छोटे भाई शक्ति सिंह, विक्रम सिंह और जगमल सिंह थे। प्रताप की 2  बहनें भी थीं: चांद कंवर और मान कंवर।
  • इनका राज्यभिषेक 28 फरवरी, 1572 गोगुंदा मे हुआ था। दूसरी बार राजतिलक कुंभलगढ़ दुर्ग में 1 मार्च 1573 को हुआ था।
  • महाराणा प्रताप के गुरु का नाम श्री राघवेंद्र था। श्री राघवेंद्र जी से पूर्ण रूप से सारी अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्राप्त की।
  • हल्दीघाटी की लड़ाई 18 जून 1576 को प्रताप सिंह और आमेर के मान सिंह प्रथम के नेतृत्व वाली मुगल सेना के बीच लड़ी गई थी।
  • महाराणा प्रताप ने 1577, 1578 और 1579 में तीन बार मुगलो को हराया।
  • 1582 में, प्रताप सिंह ने देवर की लड़ाई में देवर (या देवर) में मुगल चौकी पर हमला किया और कब्जा कर लिया। इस युद्ध का परिणाम यह हुआ कि 36 हजार मुगल सैनिकों ने महाराणा प्रताप के सामने आत्मसमर्पण कर दिए और मेवाड़ में मुगलों के सभी 36 चौकियों को बंद कर दिया गया।
  • मुगल सम्राट अकबर ने वर्ष 1584 ई. को आमेर के भारमल के छोटे पुत्र जगन्नाथ कछवाहा को प्रताप के विरुद्ध भेजा। वह भी सफलता नहीं पा सका अपितु उसकी मांडलगढ़ में मृत्यु हो गई। 
  • 1585 से अपनी मृत्यु तक राणा ने मेवाड़ के एक बड़े हिस्से को पुनः प्राप्त कर लिया था, और मेवाड़ से पलायन कर चुके नागरिक इस दौरान वापस लौटने लगे।
  • महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी, 1597 ई. को  ‘चावंड’ में हुई।



कंप्यूटर जनरेशन ( पीढियां ) Generation Of Computer



प्रारंभिक कंप्यूटर विकास के बाद जब आधुनिक कंप्यूटरो (ELECTRONIC COMPUTER) का विकास शुरू हुआ तो उन कंप्यूटरों में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरणों के विकास के आधार पर इन कंप्यूटरों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया, जिन्हें पीढ़ी (GENERATION) कहा जाता है।


पहली पीढ़ी (1940-1950)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक - वैक्यूम ट्यूब

मुख्य मेमोरी - चुंबकीय ड्रम और चुंबकीय टेप

प्रोग्रामिंग भाषा - मशीनी भाषा

शक्ति - बहुत अधिक बिजली की खपत करें और बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करें।

गति और आकार - बहुत धीमा और आकार में बहुत बड़ा (अक्सर पूरे कमरे को घेर लेता है)।

इनपुट/आउटपुट डिवाइस - पंच कार्ड और पेपर टेप।

उदाहरण - ENIAC, UNIVAC1, IBM 650, IBM 701, आदि।


दूसरी पीढ़ी (1950-1960)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक – ट्रांजिस्टर

मेमोरी - चुंबकीय कोर और चुंबकीय टेप / डिस्क

प्रोग्रामिंग भाषा - ASSEMBLY (1949), FORTRAN (1957), ALGOL (1958), and COBOL (1959).

शक्ति और आकार - कम बिजली की खपत, कम गर्मी उत्पन्न, और आकार में छोटा (पहली पीढ़ी के कंप्यूटर की तुलना में)।

गति - गति और विश्वसनीयता में सुधार (पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में)।

इनपुट/आउटपुट डिवाइस - पंच कार्ड और चुंबकीय टेप।

उदाहरण- IBM 1401, IBM 7090 और 7094, UNIVAC 1107, आदि।


तीसरी पीढ़ी (1960-1970)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक - एकीकृत सर्किट (Integrated Circuit - IC)

मेमोरी - बड़ा चुंबकीय कोर, चुंबकीय टेप / डिस्क

प्रोग्रामिंग भाषा - उच्च स्तरीय भाषा BASIC (1964).

आकार - दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में छोटा, सस्ता और अधिक कुशल (इन्हें मिनी कंप्यूटर कहा जाता था)।

गति - गति और विश्वसनीयता में सुधार (दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में)।

इनपुट/आउटपुट डिवाइस- मैग्नेटिक टेप, कीबोर्ड, मॉनिटर, प्रिंटर आदि।

उदाहरण- IBM 360, IBM 370, PDP-11, UNIVAC 1108, आदि।


चौथी पीढ़ी (1970-1980)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक - Very large scale integrated (VLSI) और माइक्रोप्रोसेसर।

मेमोरी - सेमीकंडक्टर मेमोरी (जैसे RAM, ROM, आदि)

RAM (रैंडम-एक्सेस मेमोरी) - कंप्यूटर में उपयोग किया जाने वाला एक प्रकार का डेटा स्टोरेज (मेमोरी एलिमेंट) जो प्रोग्राम और डेटा के अस्थायी स्टोर।

ROM (रीड-ओनली मेमोरी) - कंप्यूटर में उपयोग किया जाने वाला एक प्रकार का डेटा स्टोरेज जो डेटा और प्रोग्राम को स्थायी रूप से स्टोर करता है।

प्रोग्रामिंग भाषा - उच्च स्तरीय भाषा, C, SQL आदि।

तीसरी और चौथी पीढ़ी की दोनों भाषाओं का मिश्रण

आकार - तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में छोटा, सस्ता और अधिक कुशल।

गति - तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तुलना में सुधार हुए।

इनपुट/आउटपुट डिवाइस - कीबोर्ड, पॉइंटिंग डिवाइस, ऑप्टिकल स्कैनिंग, मॉनिटर, प्रिंटर आदि।

नेटवर्क - एक साथ जुड़े दो या दो से अधिक कंप्यूटर सिस्टम का समूह।

उदाहरण - IBM PC, STAR 1000, Apple II, Apple Macintosh, आदि।


पांचवी पीढ़ी (1980 - आज तक)

मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक - Very large scale integrated (VLSI) की जगह Ultra Large Scale Integration (ULSI) का इस्तेमाल होने लगा जिस वजह से कंप्यूटरों का आकार भी कम हो गया।

गति - चौथी पीढ़ी की तुलना में अत्यधिक।

प्रोग्रामिंग भाषा - C++, Perl, Python, Java, PHP आदि।

इनपुट/आउटपुट - इनपुट के लिए आवाज (Voice) और टच स्क्रीन का इस्तेमाल और आउटपुट के लिए 3Dप्रिंटर्स का इतेमाल शुरू हुआ।

इस पीढ़ी के कंप्यूटर समानांतर प्रोसेसिंग हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल होने लगा।

इस जनरेशन में Quantum computer का विकास शुरू हुआ।












कंप्यूटर का इतिहास और विकास : History of computer and development



प्रारम्भ में मानव गणना के लिए लाठी, पत्थर और हड्डियों का इस्तेमाल करते थे। समय के साथ मानव मन और प्रौद्योगिकी में सुधार हुआ और अधिक कंप्यूटिंग उपकरणों का विकास गणना के लिए हुआ। ऐसे ही उपकरणों के बारे में हम इस आर्टिकल में बात करेंगे।


अबेकस (Abacus)

अबेकस को दुनिया का पहला कंप्यूटर माना जाता है। इसे चीनियों के द्वारा लगभग 4,000 साल पहले बनाया गया था।यह एक लकड़ी का रैक होती है, जिसमें धातु की छड़ें लगी होती हैं जिन पर मोतियों की माला होती है। इन मोतियों का इस्तेमा गणना के लिए होती है।


नेपियर बोन्स (Napier's Bones)

यह एक मैन्युअल रूप से संचालित गणना उपकरण था जिसका इसका आविष्कार मर्चिस्टन के जॉन नेपियर (1550-1617) ने किया था। इसमे  गुणा और भाग करने के लिए 9 अलग-अलग हाथीदांत पट्टियों या संख्याओं के साथ चिह्नित हड्डियों का उपयोग किया जाता था। जिस वजह से इसका नाम "नेपियर बोन्स" पड़ा। यह दशमलव बिंदु का उपयोग करने वाला पहला यंत्र था।


पास्कलाइन (Pascaline)

पास्कलाइन का अविष्कार (1642 - 1644) एक फ्रांसीसी गणितज्ञ-दार्शनिक बायिस पास्कल ने किया था। इसे पहला यांत्रिक और स्वचालित कैलकुलेटर (Automatic calculator) माना जाता है। वर्ष 1673 में जर्मन गणितज्ञ-दार्शनिक गॉटफ्राइड विल्हेम लिबनिट्ज़ ने इस मशीन में सुधार कर Stepped Reckoner or Leibnitz wheel का अविष्कार किया था, जो गियर के बजाय यह ड्रमों से बना होता था।


डिफरेन्स इंजन (Difference Engine)

डिफरेन्स इंजन को 1820 के दशक में चार्ल्स बैबेज के द्वारा डिजाइन किया गया था, जिन्हें "आधुनिक कंप्यूटर के पिता" के रूप में जाना जाता है। यह एक भाप से चलने वाला यांत्रिक कंप्यूटर था जो सरल गणना कर सकता था। इसे लॉगरिदम टेबल जैसी संख्याओं की तालिका को हल करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।


अनालीटिक इंजन (Analytical Engine)

इस मशीन को वर्ष 1830 में चार्ल्स बैबेज द्वारा ही विकसित किया गया था। इस यांत्रिक कंप्यूटर में इनपुट के रूप में पंच-कार्ड का उपयोग किया जाता तंग। यह किसी भी गणितीय समस्या को हल करने और सूचनाओं को स्थायी स्मृति के रूप में संग्रहीत करने में भी सक्षम था।


डिफरेंशियल एनालाइजर (Differential Analyzer)

वर्ष 1930 में वन्नेवर बुश और हेरोल्ड लोके हेज़ेन के द्वारा MIT में आविष्कार किया गया था। यह पहले आधुनिक कंप्यूटिंग उपकरणों में से एक था। 


Mark 1 (मार्क I)

वर्ष 1944 में, मार्क I कंप्यूटर को IBM और हार्वर्ड के बीच एक साझेदारी के रूप में बनाया गया पहला प्रोग्रामेबल डिजिटल कंप्यूटर था। मार्क I पर पहला प्रोग्राम 29 मार्च 1944 को जॉन वॉन न्यूमैन ने चलाया था।

















भारतीय संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्व directive principles of state policy

भारतीय संविधान में जनकल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) की स्थापना के उद्देश्य के लिए "नीति निर्देशक तत्वों" को रखा गया है। इसे आयरलैंड के संविधान से लिया गया था। इसे संविधान की आत्मा तथा चेतना कहा गया है। ये राज्य के लिये ऐसे सामान्य निर्देश है जो राज्य की जनता के लिये लाभदायक हो। परंतु, इन्हें किसी न्यायालय मे लागू नही करवाये जा सकते, यह तत्व वैधानिक न होकर राजनैतिक स्वरूप रखते है। इन्हें लागू करने के लिए सरकारों को बाध्य नहीं किया जा सकता है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 36 से 51 (भाग 3 -भाग 4) तक राज्य के नीति निर्देशक तत्वों का उल्लेख किया गया है।


राज्य के नीति निर्देशक तत्व : 

36 - परिभाषा का वर्णन किया गया है

37 - इस भाग में अंतर्विष्‍ट तत्‍वों का लागू होना अनिवार्य है

38 - राज्‍य लोक कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा

39 - राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति तत्‍व

39क - समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता 42वें संविधान संशोधन, 1976 के द्वारा पूर्ण किया गया।

40 - ग्राम पंचायतों का संगठन ( 73 वें संविधान संशोधन, 1993 के द्वारा पूर्ण किया गया।)

41 - कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार

42 - काम की न्‍यायसंगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध

43 - कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि

43क - उद्योगों के प्रबंध में कार्मकारों का भाग लेना

43ख - सहकारी समितियों के स्वैच्छिक स्थापना, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण एवं व्यावसायिक प्रबंधन को प्रोत्साहन देने का प्रयास ( 97वें संविधान संशोधन से पूर्ण किया गया।)

44 - नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता

45 - बालकों के लिए नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा। 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा इसे पूर्ण किया गया था।

46 - अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य दुर्बल वर्गों के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि

47 - पोषाहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को ऊंचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य को सुधार करने का राज्‍य का कर्तव्‍य

48 - कृषि और पशुपालन का संगठन। गायों और बछड़ों और अन्य दुधारू और भारोत्तोलक मवेशियों की नस्लों के संरक्षण और सुधार और वध पर रोक लगाने के लिए कदम उठाने की बात कही गयी है।

48क - पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन और वन तथा वन्‍य जीवों की रक्षा करना। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986। जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों ने वर्ष 1974 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना के लिये प्रावधान किया है।

49 - राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण देना

50 - कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्‍करण

51 - अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि



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मैन बुकर पुरस्कार - Man Booker Prize


बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी। इसमें 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है।  बुकर पुरस्कार राष्ट्रकुल (कॉमनवैल्थ) या आयरलैंड के नागरिक द्वारा लिखे गए मौलिक अंग्रेजी उपन्यास के लिए हर वर्ष दिया जाता है। मैन बुकर पुरस्कार फ़ॉर फ़िक्शन (अंग्रेज़ी: Man Booker Prize for Fiction) जिसे लघु रूप में मैन बुकर पुरस्कार या बुकर पुरस्कार भी कहा जाता है। प्रथम विजेता पी. एच. न्यूबी है।


भारतीय मूल के लेखक : 

सलमान रुश्दी को वर्ष 1981 में 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' के लिए, अरूंधति रॉय को वर्ष 1997 'द गॉड ऑफ स्माल थिंग्स' के लिए, किरण देसाई को वर्ष 2006 'द इनहेरिटेंस ऑफ लॉस' के लिए और अरविंद अडिगा को वर्ष 2008 में 'व्हाइट टाइगर' के लिए बुकर पुरस्कार मिल चुका है।

 
भारतीय विजेता :

भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री को उनके उपन्यास 'रेत समाधि' के लिए वर्ष 2022 का बुकर पुरस्कार प्रदान किया गया।  इनका मूल उपन्यास हिंदी में है जिसे अंग्रेजी में "Tomb Of Sand" नाम से अनुवाद किया गया है। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीतने वाली किसी भी भारतीय भाषा की पहली पुस्तक है।