छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा जलप्रपात (झरना) कौन सा है?


छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा जलप्रपात तीरथगढ़ को माना गया है। परन्तु हाल ही में सामने आये जलप्रपातो की वजह से तीरथगढ़ को सबसे ऊंचे जलप्रपात बने रहना मुश्किल हो सकता है। जहाँ तीरथगढ़ की उंचाई लगभग 300 फीट ( 91 मीटर ) है, वहीं सामने आये नये जलप्रपात इससे दोगुने ऊंचे है।


नये जलप्रपात:

नम्बी और मकरभंजा


नम्बी

यह जलप्रपात बीजापुर जिले मे तेलंगाना सीमा पर स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 180 मीटर ( 590 फीट ) है। यह जलप्रपात तीरथगढ़ से लगभग दोगुना ऊंचा है। वर्तमान में यहाँ पहुँचना कठिन है। पुर्ण पढ़ें


मकरभंजा

यह जलप्रपात जशपुर जिले में महान नदी पर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग  137 मीटर (450 फीट) है। यह जलप्रपात भी तीरथगढ़ से ऊंचा है परन्तु नम्बी से ऊंचाई में कम है। जिला प्रशासन ने वर्तमान में यहाँ पर्यटन को बढ़ावा दिया है। पुर्ण पढ़ें

एडल्ट्री क़ानून (व्याभिचार) क्या है ? - धारा-497

IPC की धारा-497 के तहत अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी अन्य शादीशुदा महिला के साथ आपसी रजामंदी से संबंध बनाता है तो उक्त महिला का पति एडल्टरी के नाम पर उस पुरुष के खिलाफ केस दर्ज करा सकता था। लेकिन अपनी पत्नी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता। न ही विवाहेतर संबंध में लिप्त पुरुष की पत्नी इस दूसरी महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती थी।


इस धारा के तहत ये भी प्रावधान था कि विवाहेतर संबंध में लिप्त पुरुष के खिलाफ केवल उसकी साथी महिला का पति ही शिकायत दर्ज कर कार्रवाई करा सकता था। किसी दूसरे रिश्तेदार अथवा करीबी की शिकायत पर ऐसे पुरुष के खिलाफ कोई शिकायत स्वीकार नहीं थी।


निरस्त :

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने सर्वसम्मति से 14 फरवरी, 2019 को कहा कि व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया।

स्वामी आत्मानंद - Swami Atmanand


स्वामी आत्मानंद जी का जन्म रायपुर जिले के बरबंदा गांव में 6 अक्टूबर 1929 को हुआ था। स्वामी आत्मानंद जी का वास्तविक नाम तुलेन्द्र था। स्वामी आत्मानंद के पिता धनीराम वर्मा रायपुर के पास मांढर स्कूल में शिक्षक थे. कुछ समय बाद धनीराम का चनय वर्धा में शिक्षा के उच्च प्रशिक्षण के लिए हो गया और वे परिवार सहित वर्धा चले गए। वर्धा में ही स्वामी आत्मानंद जी सेवाग्राम आश्रम में महात्मा गांधी के संपर्क में आए, इसी दौरान तुलेन्द्र भी साथ रहते। तुलेन्द्र बचपन से प्रतिभा संपन्न थे। वे मधुर स्वर में भजन भी गाते। धीरे-धीरे तुलेन्द्र फिर गांधी के बेहद करीब आ गए और उनके स्नेही हो गए। वर्धा आश्रम से धनीराम वर्मा कुछ वर्ष बाद रायपुर वापस आ गए और रायपुर में 1943 में श्रीराम स्टोर नामक दुकान खोलकर जीवन यापन करने लगे।


शिक्षा:

तुलेन्द्र ने सेन्टपॉल स्कूल में प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल की परीक्षा पास की और उच्च शिक्षा के लिए साइंस कॉलेज नागपुर चले गए। वहां उन्हें कॉलेज में छात्रावास उपलब्ध नहीं होने के फलस्वरूप वे रामकृष्ण आश्रम में रहने लगे। यहीं से उनके मन में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों ने प्रवेश किया। तुलेन्द्र ने नागपुर से प्रथम श्रेणी में एम.एससी. गणित की परीक्षा उत्तीर्ण की उसके बाद दोस्तों की सलाह पर आई.ए.एस. की परीक्षा में शामिल हुए। वहां उन्होंने प्रथम दस सफल उम्मीदवारों में स्थान प्राप्त किया, पर मानव सेवा और विवेक दर्शन से आलोकित तुलेन्द्र नौकरी से विलग रहते हुए, मौखिक परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।


तुलेन्द्र से चैतन्य, चैतन्य से स्वामी आत्मानंद तक का सफर

भारत की आजादी के बाद तुलेन्द्र रामकृष्ण मिशन से जुड गए। वर्ष 1957 में रामकृष्ण मिशन के महाध्यक्ष स्वामी शंकरानंद ने तुलेन्द्र की प्रतिभा से प्रभावित होकर ब्रम्हचर्य में दीक्षित किया और उन्हें नया नाम दिया, स्वामी तेज चैतन्य। स्वामी तेज चैतन्य ने अपने नाम के ही अनुरूप अपनी प्रतिभा और ज्ञान के तेज से मिशन को आलोकित किया। निरंतर विकास और साधना सिद्धि के लिए वे हिमालय स्थित स्वर्गाश्रम में एक वर्ष तक कठिन साधना कर वापस रायपुर आए। स्वामी भास्करेश्वरानंद के सानिध्य में उन्होंने संस्कार की शिक्षा ग्रहण की, यहीं पर उन्हें स्वामी आत्मानंद का नया नाम मिला।


छत्तिसगढ़ में विवेकानंद आश्रम की स्थापना :

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास को अविस्मरणीय बनाने के उद्देश्य से रायपुर में विवेकानंद आश्रम बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया. इस कार्य के लिए उन्होंने मिशन से विधिवत स्वीकृति नहीं मिली, किन्तु वे इस प्रयास में सफल रहे और आश्रम निर्माण के साथ ही रामकृष्ण मिशन बेलूर मठ से संबद्धता भी प्राप्त की। उन्होंने शासन के अनुरोध पर वनवासियों के उत्थान के लिए नारायणपुर में उच्च स्तरीय शिक्षा केन्द्र की स्थापना की।


मृत्यू:

27 अगस्त, 1989 को भोपाल से रायपुर लौटते समय में राजनांदगांव के समीप सड़क हादसे में वे चल बसे।


इन्हे देखें :

रायपुर विवेकानंद आश्रम





रामकृष्ण मिशन रायपुर - Ramkrishna Mission Raipur

 


रायपुर में आश्रम की प्रारम्भिक स्थापना यहाँ के स्थानीय भक्तों द्वारा ‘श्रीरामकृष्ण सेवा समिति’ के नाम से 1958 में हुई। विश्ववन्द्य स्वामी विवेकानन्द के कैशोर्य के दो वर्ष (1877-79) रायपुर में ही बीते थे। उन्हीं की पावन स्मृति को सुरक्षित रखने के लिए ‘विवेकानन्द जन्म शताब्दी’ के अवसर पर आश्रम के निर्माण की योजना बनाई गई। अप्रैल, 1962 में आश्रम अपनी भूमि पर स्थानान्तरित हुआ।


7 अप्रैल, 1968 को रामनवमी के पावन अवसर पर इस समिति का विलय रामकृष्ण मिशन, बेलूड़ मठ में हो गया। तब से यह आश्रम रामकृष्ण मिशन का पंजीकृत शाखा-केन्द्र होकर रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द आश्रम के नाम में परिवर्तित हुआ। ब्रह्मलीन स्वामी आत्मानन्द जी इस आश्रम के संस्थापक सचिव थे और उन्हीं के अथक प्रयत्नों से छत्तीसढ़-मध्यप्रदेश में रामकृष्ण विवेकानन्द भावधारा का विस्तार हुआ।

लाईट हाउस प्रोजेक्ट क्या है ? WHAT IS LIGHTHOUSE PROJECT


पीएम नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज-इंडिया के तहत लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (LHPs) का शिलान्यास 1 जनवरी, 2021 को किया। 


लाईट हाउस प्रोजेक्ट क्या है ?

लाईट हाउस प्रोजेक्ट, भारत सरकार के द्वारा सस्ते और मजबूत मकान के लिये लाया गया। इस प्रोजेक्ट (परियोजना) में फैक्टरी से ही बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर घर बनाने के स्थान पर लाया जाता है, इसका फायदा ये होता है कि निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है। इसलिए प्रोजेक्ट में खर्च कम आता है. इस प्रोजेक्ट के तहत बने मकान पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे।


2017 में लाया गया था प्रोजेक्ट :

यह प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा जीएचटीसी-भारत के तहत "लाइट हाउस परियोजना" के निर्माण हेतु देशभर के 6 राज्यों का चयन करने के लिए राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक चुनौती की शुरुआत की गयी थी। निर्धारित मानदंड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा अंक पाने वाले 6 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को "लाइट हाउस प्रोजेक्ट" प्रदान करने की घोषणा की गई थी।

निर्माण प्रौद्योगिकी भारत-2019 प्रदर्शनी-सह-सम्मेलन के दौरान तकनीक मूल्यांकन समिति ने 25 देशों की 32 नयी प्रौद्योगिकियों एवं प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने वाले 54 संगठनों का मूल्यांकन किया।


प्रोजेक्ट के लिये चयनित राज्य एवं शहर :

लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स (LHPs) परियोजना के तहत, केंद्र सरकार छह राज्यो के छह शहरों- इंदौर (मध्यप्रदेश), चेन्नई (तमिलनाडु), रांची (झारखण्ड), अगरतला (त्रिपुरा), लखनऊ (उत्तरप्रदेश) और राजकोट (गुजरात) में 1,000-1000 से अधिक मकानों का निर्माण करेगी।


चयनित शहर एवं उनमे इस्तेमाल होने वाले तकनीक:

चयनित शहर तकनीकघरो की संख्या
Indore
Madhya Pradesh
Prefabricated Sandwich Panel System1024
Rajkot
Gujarat
Monolithic Concrete Construction1144
Chennai
Tamil Nadu
Precast Concrete Construction System- Precast components assembled at site1152
Ranchi
Jharkhand
Precast Concrete Construction System-3D Precast Volumetric1008
Agartala
Tripura
Light Gauge Steel Structural System & Preengineered Steel Structural System1000
Lucknow
Uttar Pradesh
Stay In-place Formwork System1040

खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़- Khadiya tribe in Chhattisgarh


खड़िया जनजाति छत्तीसगढ़ के रायगढ़ एवं सरगुजा क्षेत्र में निवास करती है। खड़िया जनजाति के लोग पुस्पुन्नी व करमा पर्व मनाते है। खड़िया जनजाति की मातृभाषा खड़िया है, इनके प्रमुख देवता बन्दा देव है। खड़िया जनजाति पालकी ढोने का कार्य करती है।


अमरटापू धाम - Amartapu Dham


अमर टापू या अमरतटापू धाम ( Amartapu Dham ) छत्तीसगढ़ राज्य के मुंगेली जिले में जिला मुख्यालय से करीब 11 किलोमीटर की दुरी पर मोतिमपुर में आगर नदी पर स्थित एक टापू है। यह एक धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। यह टापू सतनामी समाज के लोगो के लिये आस्था का एक प्रमुख केंद्र है।


इतिहास 

'सतनाम धर्म' के प्रवर्तक गुरु घासीदास बाबा जी के ज्येष्ट पुत्र बाबा अमरदास जी अमर टापू पर कई बार पड़ाव डालकर सतसंग करके लोगो को सतनाम का संदेश दिये थे इसीलिये इस टापू का नाम अमरटापू पड़ गया ।


 मेला

प्रतिवर्ष गुरू घासीदास बाबा जी के जयंती पर्व 18 दिसम्बर को भव्य और विशाल मेला लगता है। यहाँ मेला का प्रारंभ 18 दिसम्बर १९९६ 1996 को अमरटापू पर जैतखाम की स्थापना के साथ हुआ था। जयंती कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायकों, कलाकारों और पंथी नृत्य दलों द्वारा मंगल, भजन और प्रवचन के साथ आकर्षक पंथी नृत्य प्रस्तुत किया जाता है।


घोषणा :

18 दिसम्बर, 2020 को बाबा गुरु घासीदास जयंती समारोह में शामिल होते हुए मुख्यमंत्री ने अमरटापू धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की।

आजाद हिंद बैंक - Azad Hind Bank


आज़ाद हिंद बैंक की स्थापना 5 अप्रैल 1944 को सुभाष चन्द्र बोस  के द्वारा रंगून, बर्मा में की गाई थी। इस बैंक के अध्यक्ष देबनाथ दास (Debnath Das) थे।


स्थापना :

सुभाष चंद्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 को आज़ाद हिंद की सरकार बनाई और इसके तुरंत बाद बोस ने 23 अक्टूबर 1943 को ब्रिटिश राज और उसके सहयोगियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

ब्रिटिश राज से भारत की मुक्ति के लिए दुनिया भर से भारतीय समुदाय द्वारा दान किए गए धन का प्रबंधन करने के लिए आज़ाद हिंद बैंक की स्थापना की। बोस ने बैंक की सेवाओं का उपयोग आज़ाद हिंद फ़ौज के संचालन के लिए करते थे। बैंक ने जापान के कब्जे वाले देशों में अपनी शाखाएं बना रखीं थी। मुद्रा को प्रॉमिसरी नोट के रूप में जारी किया गया था, और ये नोट आमतौर पर एक तरफ छपे होते थे। आजाद हिंद बैंक ने 10 रुपए के सिक्के से एक लाख रुपए तक के नोट जारी किए थे। इनमें से 10 हजार रुपए के नोट पर खुद नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर छपती थी।




आबादकारी बिल 1906 - ABADKARI BILL


भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1906 में आबादकारी नामक बिल लाया गया था। 

क्या था बिल में ?

  • कोई भी किसान अपनी जमीन से पेड़ तक नहीं काट सकता था। अगर किसान ऐसा करता पाया जाता तो नोटिस देकर 24 घंटे में उसकी जमीन का पट्‌टा कैंसिल करने का अधिकार शासन के पास था।
  • जमीन किसान के बड़े बेटे के नाम पर ही चढ़ सकती थी। अगर उसकी औलाद नहीं होती और मुखिया किसान मर जाता तो जमीन अंग्रेजी शासन या रियासत को चली जानी थी।  
  • अंग्रेजों ने बारी दोआब नहर से सिंचित होने वाली जमीनों का लगान दोगुना कर दिया था।


बिल के खिलाफ 1907 में किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इसकी अगुवाई सरदार अजीत सिंह ने की। यह आन्दोलन 9 महीनों तक चला। 22 मार्च 1907 लाला बांके दयाल ने "पगड़ी संभाल जट्‌टा पगड़ी संभाल ओए..." गीत गाया। किसानों के दबाव के आगे शासन को झुकना पड़ा और नवंबर 1907 को कानून वापस ले लिया।

"पीएम वाणी" क्या है ? - what is PM WANI ?

भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9 दिसम्बर, 2020 को दूरसंचार विभाग को देशभर में पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) के जरिए सार्वजनिक रूप से वाई-फाई सेवा प्रदान करने का नेटवर्क तैयार करने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी। इस सेवा का नाम "पीएम वाणी"( PM-WANI - Wi-Fi Access Network Interface है।


कैसे काम करेगा?

देश भर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंच के विस्तार के लिए सरकार ने तमाम पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) के जरिए सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क की स्थापना को मंजूरी दे दी है. पीडीओ एक छोटी दुकान या साझा सेवा केंद्र (CSC) भी हो सकते हैं, जिनके लिए न तो लाइसेंस और न ही पंजीकरण की जरूरत होगी।


लोग को रोजगार मिलेगा:

वाईफाई स्पॉट से डेटा इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं से जितना डेटा इस्तेमाल हुआ उसका चार्ज किया जाएगा। इसका एक हिस्सा उस व्यक्ति के पास जाएगा जिसने वाईफाई हॉटस्पॉट बनाया है। एग्रीगेटर ऐप से उपभोक्ता का केवाईसी केवल एक बार होगा और बार-बार वाईफाई हॉटस्पॉट से कनेक्ट होते समय ओटीपी या लॉग इन न नही करना पड़ेगा।