डीपाडीह - Dipadih Balrampur

डीपाडीह बलरामपुर जिले में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है। यह अम्बिकापुर से कुसमी मार्ग पर 75 कि.मी. दूरी पर स्थित है। यहां 8वीं से 14वीं शताब्दी के शैव एवं शाक्य संप्रदाय के पुरातात्विक अवशेष देखने को मिलते हैं।

डीपाडीह के आसपास अनेक शिव मंदिरो के प्रमाण मिलते है। यहां अनेक शिवलिंग, नदी तथा देवी दुर्गा की कलात्मक मूर्ति स्थित है। इस मंदिर के खंभों पर भगवान विष्णु, कुबेर, कार्तिकेय तथा अनेक देवी-देवताओं की कलात्मक मूर्तियां दर्शनीय हैं। देवी प्रतिमाओं में एक विशिष्ट मूर्ति महिषासुर मर्दिनी की है। देवी-चामुंडा की अनेक प्रतिमाएं हैं।
उरांव टोला स्थित शिव मंदिर अत्यंत कलात्मक है। शिव मंदिर के जंघा बाह्य भित्तियों में सर्प, मयूर, बंदर, हंस एवं मैथुनी मूर्तियां उत्कीर्ण हैं।
सावंत सरना परिसर में पंचायन शैली में निर्मित शिव मंदिर है। इस मंदिर के भित्तियों पर आकर्षक ज्यामितिय अलंकरण हैं। मंदिर का प्रवेष द्वार गजभिषेकिय लक्ष्मी की प्रतिमा से सुशोभित है। उमा-महेश्वर की आलिंगरत प्रतिमा दर्शनीय है। इस स्थान पर रानी पोखरा, बोरजो टीला, सेमल टीला, आमा टीला आदि के कलात्मक भग्नावशेष दर्शनीय हैं। डीपाडीह की मैथुनी मूर्तियां खजुराहो शैली की बनी हुयी है।

दर्शनीय स्थल
उरांव टोला शिव मंदिर, सावंत सरना प्रवेश द्वार, महिषासुर मर्दिनी की विशिष्ट मूर्ति, पंचायतन शैली शिव मंदिर, गजाभिषेकित की लक्ष्मी मूर्ति, उमा-महेश्वर की आलिंगनरत मूर्ति, भगवान विष्णु, कुबेर, कार्तिकेय आदि की कलात्मक मूर्तियां।

Source : https://balrampur.gov.in/hi/रुचि-के-स्थान/

नोबेल पुरस्कार 2019 - विजेताओं की सूची

अर्थशास्त्र का नोबेल
विजेता - भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डुफलो और माइकल क्रेमर।
कारण - वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए किए गए अपने कामों के लिए नोबेल से सम्मानित किया गया. अभिजीत बनर्जी ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.

चिकित्सा का नोबेल
विजेता - विलियम जी केलिन, सर पीटर जे रैटक्लिफ और ग्रेग एल सेमेन्जा।
कारण - इन्होंने शोध किया था कि कैसे सेल्स ऑक्सीजन को जलाते हैं ताकि शरीर को ऊर्जा मिल सके और नई कोशिकाओं को बनने में मदद मिले।

भौतिकी का नोबेल
विजेता - जेम्स पीबल्स, मिशेल मेयर और डिडिएर क्यूलॉज।
कारण - कनाडियन-अमेरिकन वैज्ञानिक जेम्स पीबल्स को भौतिक ब्रह्माण्ड विज्ञान में सैद्धांतिक खोज के लिए और स्विस वैज्ञानिक मिशेल मेयर तथा डिडिएर क्यूलॉज को संयुक्त रूप से एक्सोप्लैनेट की खोज के लिए पुरस्कृत किया गया।

रसायन का नोबेल
विजेता - जॉन बी- गुडएनफ, एम स्टैनली विटिंघम, और अकीरा योशिनो।
कारण - लीथियम आयन बैटरी विकसित करने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है।
विशेष - 97 साल की उम्र में जॉन बी. गुडइनफ, सबसे उम्रदराज नोबेल विजेता बने।

साहित्य का नोबेल
विजेता - पोलिश लेखक ओल्गा टोकार्चुक और ऑस्ट्रियाई उपन्यासकार पीटर हैंडका।
इनमें से ओल्गा टोकार्चुक को 2018 के लिए जबकि पीटर हैंडका को 2019 के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। 2018 साहित्य पुरस्कार की घोषणा पिछले साल साहित्य का नोबेल की घोषणा नहीं किए जाने के कारण की गई है।
टोकार्चुक को 2018 में "FLIGHTS" के लिए बुकर इंटरनेशनल पुरस्कार भी दिया गया था।

शांति का नोबेल
विजेता - इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली
कारण - अली को अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के उनके प्रयासों, खासतौर से पड़ोसी मुल्क इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को हल करने को लेकर उनकी निर्णायक पहल की वजह से नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनका नाम चुना गया।

विशेष : यह पेज अभी अपडेट हो रहा है.....

भारतीय इतिहास के प्रमुख युद्ध - Battles of Indian History

ई.पू. :-
326 हाईडेस्पीज का युद्ध : सिकंदर और पंजाब के राजा पोरस के बीच, सिकंदर की विजय हुई।

261 कलिंग की लड़ाई : सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया था और युद्ध के रक्तपात से विचलित होकर उन्होंने युद्ध न करने की कसम खाई।

ईस्वी :-
712 - सिंध की लड़ाई : मोहम्मद कासिम ने अरबों की सत्ता स्थापित की।

1191 - तराईन का प्रथम युद्ध : मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच हुआ था। चौहान की विजय हुई।

1192 - तराईन का द्वितीय युद्ध : मोहम्मद गौरी और पृथ्वी राज चौहान के बीच, इसमें मोहम्मद गौरी की विजय हुई।

1194 - चंदावर का युद्ध : इसमें मुहम्मद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हराया।

1526 - पानीपत का प्रथम युद्ध : मुग़ल शासक बाबर और इब्राहीम लोधी के बीच।

1527 - खानवा का युद्ध : इसमें बाबर ने राणा सांगा को पराजित किया।

1529 - घाघरा का युद्ध : इसमें बाबर ने महमूद लोदी के नेतृत्व में अफगानों को हराया।

1539 - चौसा का युद्ध : इसमें शेरशाह सूरी ने हुमायु को हराया।

1540 - कन्नौज (बिलग्राम का युद्ध) : इसमें फिर से शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को हराया व भारत छोड़ने पर मजबूर किया।

1556 - पानीपत का द्वितीय युद्ध : अकबर और हेमू के बीच।

1565 - तालीकोटा का युद्ध : इस युद्ध से विजयनगर साम्राज्य का अंत हो गया क्यूंकि बीजापुर, बीदर,अहमदनगर व गोलकुंडा की संगठित सेना ने लड़ी थी।

1576 - हल्दीघाटी का युद्ध : अकबर और राणा प्रताप के बीच, इसमें राणा प्रताप की हार हुई।

1757 - प्लासी का युद्ध : अंग्रेजों और सिराजुद्दौला के बीच, जिसमे अंग्रेजों की विजय हुई और भारत में अंग्रेजी शासन की नीव पड़ी।

1760- वांडीवाश का युद्ध : अंग्रेजों और फ्रांसीसियो के बीच, जिसमे फ्रांसीसियो की हार हुई।

1761 - पानीपत का तृतीय युद्ध : अहमदशाह अब्दाली और मराठों के बीच। जिसमे फ्रांसीसियों की हार हुई।

1764 - बक्सर का युद्ध : अंग्रेजों और शुजाउद्दौला, मीर कासिम एवं शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना के बीच। अंग्रेजों की विजय हुई। अंग्रेजों को भारत वर्ष में सर्वोच्च शक्ति माना जाने लगा।

1767-69 - प्रथम मैसूर युद्ध : हैदर अली और अंग्रेजों के बीच, जिसमे अंग्रेजों की हार हुई।

1780-84 - द्वितीय मैसूर युद्ध : हैदर अली और अंग्रेजों के बीच, जो अनिर्णित छूटा।

1790 - तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध : टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के बीच लड़ाई संधि के द्वारा समाप्त हुई।

1799 - चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध : टीपू सुल्तान और अंग्रेजों के बीच , टीपू की हार हुई और मैसूर शक्ति का पतन हुआ।

1849 - चिलियान वाला युद्ध : ईस्ट इंडिया कंपनी और सिखों के बीच हुआ था जिसमे सिखों की हार हुई।

1962 - भारत-चीन सीमा युद्ध : चीनी सेना द्वारा भारत के सीमा क्षेत्रो पर आक्रमण। कुछ दिन तक युद्ध होने के बाद एकपक्षीय युद्ध विराम की घोषणा। भारत को अपनी सीमा के कुछ हिस्सों को छोड़ना पड़ा।

1965 - भारत-पाक युद्ध : भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जिसमे पाकिस्तान की हार हुई। बांग्लादेश एक स्वतन्त्र देश बना।

1999 - कारगिल युद्ध : जम्मू एवं कश्मीर के द्रास और कारगिल क्षेत्रो में पाकिस्तानी घुसपैठियों को लेकर हुए युद्ध में पुनः पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा और भारतीयों को जीत मिली।

नीलम सरई जलप्रपात - Neelam Sarai

बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किमी दूर तेलंगाना की सीमा पर बस्तर का सबसे ऊंचा जलप्रपात नीलम सरई स्थित है। यह जलप्रपात तकरीबन 200 मीटर ऊंचे और 90 मीटर चौड़ा है। इस जलप्रपात तक पहुंचने के लिए बीजापुर जिला मुख्यालय से आवापल्ली और वहां से उसूर तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के जल प्रपात।

रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट क्या है? Repo Rate and Reverse Repo Rate

रेपो रेट:
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के द्वारा बैंको को कर्ज दिया जाता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज, जैसे होम लोन, कार लोग अब सस्ते हो जाएंगे। हालांकि बैंक इसे कब तक और कितना कम करेंगे ये उन पर निर्भर करता है। RBI इसे हर तिमाही के आधार पर तय करता है।

रिवर्स रेपो रेट:
यह दर, रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा राशि पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट का इस्तेमाल बाजार में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी आ जाती है, RBI रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2019 विजेताओं की सूची


राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों के लिए गठित 12 सदस्यीय चयन समिति ने 17 अगस्त 2019 को खेल पुरस्कारों की घोषणा की गई। यह पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ द्वारा 29 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर सम्मानित किया गया।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों की सूची

राजीव गांधी खेल रत्‍न पुरस्‍कार:
राजीव गांधी खेल रत्न भारत में दिया जाने वाला सबसे बड़ा खेल पुरस्कार है। इस पुरस्कार को भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया है. इस पुरस्कार मे एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और 7 लाख 50 हजार रुपय पुरुस्कृत व्यक्ति को दिये जाते है। इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1991-92 में की गयी थी।
पुरस्‍कृत का नाम:-
बजरंग पूनिया - कुश्ती
दीपा मलिक - पैरा एथलेटिक्स

अर्जुन पुरस्‍कार:
यह पुरस्‍कार लगातार चार वर्ष तक बेहतरीन प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1961 में हुआ था. पुरस्कार के रूप में पाँच लाख रुपये की राशि, अर्जुन की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।
पुरस्‍कृत का नाम :- 
तेजिंदर पाल सिंह तूर - एथलेटिक्स
मोहम्मन अनस - एथलेटिक्‍स
स्वप्ना बर्मन - एथलेटिक्‍स
एस भास्करन
सोनिया लाठेर - मुक्‍केबाजी
रविंद्र जडेजा - क्रिकेट
पूनम यादव - क्रिकेट
चिंगलेनसना सिंह कांगुजाम - हॉकी
अजय ठाकुर - कबड्डी
गौरव सिंह गिल - मोटरस्पोर्ट्स
अंजुम मुदगिल - निशानेबाजी
हरमीत देसाई - टेबल टेनिस
पूजा ढांडा - कुश्ती
फवाद मिर्जा - घुड़सवारी
गुरप्रीत सिंह संधू - फुटबॉल
बी साई प्रणीत - बैडमिंटन
सिमरन सिंह शेरगिल - पोलो
प्रमोद भगत - पैरा खेल-बैडमिंटन
सुरेंद्र सिंह गुज्जर - पैरा खेल – एथलेटिक्स

द्रोणाचार्य पुरस्‍कार:
यह पुरस्‍कार प्रतिष्ठित अंतर्राष्‍ट्रीय खेल स्‍पर्धाओं में पदक विजेता तैयार करने हेतु कोचों को और खेल विकास के क्षेत्र में जीवन भर योगदान देने के लिए प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1985 में हुआ था. द्रोणाचार्य पुरस्कार के तहत गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक और पाँच लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।
पुरस्‍कृत का नाम:-
मर्जबान पटेल - हाकी (लाइफ टाइम)
रामवीर सिंह खोखर - कबड्डी (लाइफ टाइम)
संजय भारद्वाज - क्रिकेट (लाइफ टाइम)
विमल कुमार - बैडमिंटन
संदीप गुप्ता - टेबल टेनिस
मोहिंदर सिंह ढिल्लन - एथलेटिक्स

ध्‍यान चंद पुरस्‍कार:
यह पुरस्कार खेल-कूद में जीवनभर आजीवन उपलब्धि के लिए वर्ष 2002 में शुरू किया गया सर्वोच्च पुरस्कार है। यह पुरस्कार महान भारतीय हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद के नाम पर है। यह पुरस्कार प्राप्त करने वालों को एक प्रतिमा, प्रमाणपत्र, पारंपरिक पोशाक और पाँच लाख रुपये नकद दिये जाते हैं. इस पुरस्कार से प्रत्येक वर्ष ज़्यादा से ज़्यादा तीन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है।
पुरस्‍कृत का नाम :-
मैनुअल फ्रेडरिक्स - हॉकी
अनूप बासक - टेबल टेनिस
मनोज कुमार - कुश्ती
नितिन कीर्तने - टेनिस
सी लालरेमसांगा - तीरंदाजी

महात्मा गांधी जी के द्वारा भारत में किये गए महत्वपूर्ण आंदोलन


महात्मा गांधी को 'फादर ऑफ नेशन' कहा जाता है। 2 अक्टूबर 1869 में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ। गांधी जी के पिता का नाम करमचंद उत्तमचंद गांधी था और वो पोरबंदर के दीवान थे।
वर्ष 1906 में ट्रांसवाल एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका में पहला सत्याग्रह अभियान चलाया। इसमें पंजीयन न कराने वाले एशियाई मूल के लोगों को दक्षिण अफ्रीका से निकालने का प्रावधान था।

महात्मा गांधी जी के द्वारा किये गए महत्वपूर्ण आंदोलन निम्न है:-

चंपारण सत्याग्रह : बिहार के चंपारण महात्मा गांधी के नेतृत्व में यह पहला सत्याग्रह था। 1917 में बिहार के चंपारण पहुंचकर खाद्यान के बजाय नील एवं अन्य नकदी फसलों की खेती के लिए बाध्य किए जाने वाले किसानों के समर्थन में सत्याग्रह किया।

खेड़ा सत्याग्रह : वर्ष 1918 में गुजरात के खेड़ा नामक गांव में बाढ़ आने के कारण किसान ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स भरने में अक्षम हो गए। किसानों ने इस दुविधा से निकलने के लिए गांधीजी की सहायता मांगी तब गांधी जी ने किसानों को टैक्स में छूट दिलाने के लिए आंदोलन किया जिसे 'खेड़ा सत्याग्रह' के नाम से जाना जाता है।

असहयोग आंदोलन : रॉलेट सत्याग्रह की सफलता के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन चलाया। जिसकी सुरुवात 1 अगस्त 1920 को हुई। यह आंदोलन1920 से फरवरी 1922 के बीच महात्‍मा गांधी तथा भारतीय राष्‍ट्रीय कॉन्‍ग्रेस के नेतृत्‍व में असहयोग आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन के तहत लोगों से अपील की कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग जताने को स्कूल, कॉलेज, न्यायालय न जाएं और न ही कर चुकाएं।

नमक सत्याग्रह : इस आंदोलन को दांड़ी सत्याग्रह भी कहा जाता है। नमक के व्यापार पर ब्रिटिश सरकार के एकाधिकार के खिलाफ 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला।

दलित आंदोलन : 1932 में गांधी जी ने अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की और इसके बाद 8 मई 1933 से छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरुआत की। ‘हरिजन’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन करते हुए हरिजन आंदोलन में मदद के लिए 21 दिन का उपवास किया।

भारत छोड़ो आंदोलन :  ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ यह गांधी जी का सबसे बड़ा आंंदोलन था। 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बंबई सत्र में ग्वालिया टैंक मैदान से ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा दिया। हालांकि, इसके तुरंत बाद गिरफ्तार हुए पर युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फोड़ के जरिए आंदोलन चलाते रहे।

सीधी कार्रवाई दिवस / डायरेक्ट एक्शन डे / कलकत्ता दंगा

भारत की स्वतंत्रता के पूर्व मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम देश की मांग के लिए 'सीधी कार्रवाई या प्रत्यक्ष कारवाही (Direct Action )' की घोषणा से 16 अगस्त, वर्ष 1946 को कोलकाता में भीषण दंगे शुरु हो गये। इसे कलकत्ता दंगा या कलकत्ता का भीषण हत्याकांड (Great Calcutta Killing) कहते हैं।

अंतरिम सरकार में 14 सदस्य होंगे, जिनमें 6 कांग्रेस मनोनीत करेगी तथा 5 को मुस्लिम लीग तथा अन्य तीन अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि होगें। मुस्लिम लीग को वायसराय का यह प्रस्ताव मंजूर नहीं था। 29 जुलाई 1946 को जिन्ना ने बम्बई में मुस्लिम लीग की बैठक बुलाई। इसमें पाकिस्तान की मांग करते हुए जिन्ना ने 16 अगस्त 1946 को 'सीधी कार्रवाई' की घोषणा की।

कलकत्ता में 72 घंटों के भीतर 4,000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई और 100,000 निवासी बेघर हो गए। नोआखली दंगे का प्रमुख केन्द्र रहा, दंगों के दौरान लगभग 6,000 लोग मारे गये और 20,000 लोग या तो घायल हुए या फिर उनके साथ बलात्कार हुआ।

Source :
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Direct_Action_Day
https://books.google.co.in/books?id=RHI9DwAAQBAJ



66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2019 - विजेताओं की सूची

66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
  • बेस्ट एक्टर- आयुष्मान खुराना (अंधाधुन) और विक्की कौशल (उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक)
  • बेस्ट एक्ट्रेस- कीर्ति सुरेश, महानती (तेलुगू फिल्म)
  • बेस्ट फिल्म - अंधाधुन
  • मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट- उत्तराखंड
  • बेस्ट फिल्म क्रिटिक अवॉर्ड- ब्लेस जॉनी और अनंत विजय
  • स्पेशल मेंशन- महान हुतात्मा 
  • बेस्ट राजस्थानी फिल्म- टर्टल
  • बेस्ट गुजराती फिल्म: रेवा
  • बेस्ट मराठी फिल्म-  भोंगा
  • सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार- स्वानंद किरकिरे ,चुम्बक (मराठी) के लिए
  • बेस्ट उर्दू फिल्म- हामिद
  • बेस्ट तेलुगू फिल्म- महानती
  • गारो में बेस्ट फिल्म अवॉर्ड- मामा
  • बेस्ट पंजाबी फिल्म- हरजीता
  • बेस्ट तमिल फिल्म- बारम
  • बेस्ट बंगाली फिल्म - एक जे छीलो राजा
  • बेस्ट कोरियोग्राफर: पद्मावात के गाने घूमर के लिए कृति महेश और ज्योति तोमर
  • बेस्ट एक्शन डायरेक्टर- केजीएफ के लिए प्रशांत नील
  • बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन- फिल्म पद्मावत के लिए संजय लीला भंसाली
  • बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (बैकग्राउंड म्यूजिक) - उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
  • बेस्ट ऑडियोग्राफी (साउंड डिजाइनर) - उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
  • बेस्ट प्लेबैक सिंगर- अरिजीत सिंह (बिन्ते दिल, पद्मावत)
  • बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस- सुरेखा सीकरी (बधाई हो)
  • बेस्ट मेकअप - रंजीत
  • सामाजिक मुद्दे पर बेस्ट फिल्म- पैडमैन
  • बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड- आदित्य धर, उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक के लिए जीता
  • बेस्ट एंटरटेनमेंट फिल्म- बधाई हो

मंदराजी - Mandraji

दाऊ दुलार सिंह मंदराजी का जन्म राजनांदगांव से 5 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम रवेली में 1 अप्रैल, 1911 को एक संपन्न मालगुजार परिवार में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा गांव की पाठशाला में ही प्राप्त की। उच्च शिक्षा की व्यवस्था गांव में नहीं होने के कारण वे आगे नहीं पढ़ सके। स्कूल का साथ छूटने के बाद वे गांव के कुछ लोक कलाकारों के संपर्क में आये और उन्हीं से चिकारा एवं तबला बजाना सीखा तथा गाने का भी अभ्यास किया।

मंदराजी का नाच- गान दाऊजी के पिता को बिल्कुल भी पसंद नहीं था लेकिन पिता के विरोध के बावजूद मंदराजी दाऊ गांव में होने वाले सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़- चढ़कर हिस्सा लेते थे।

मंदराजी ने सन् 1928-29 में कुछ लोक कलाकारों को एकत्रित कर अपने गांव में "रवेली नाचा पार्टी" की स्थापना की। रवेली नाचा पार्टी के 1928 से 1953 तक लगभग पच्चीस वर्षों के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के अनेक मूर्धन्य एवं नामी कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

रवेली नाच पार्टी के प्रारंभिक दिनों में खड़े साज का प्रचलन या यानि वादक पूरे कार्यक्रम के दौरान मशाल की रोशनी में खड़े होकर ही वादन करते थे। दाऊजी ने इसमें परिवर्तन किया और नाचा का वर्तमान स्वरूप दिया। इसके अलावा मध्यरात्रि को समाप्त हो जाने वाले नाचा के समय सीमा को उन्होंने प्रातः काल तक बढ़ा दिया। उसी प्रकार पूर्व में चिकारा नाचा का प्रमुख वाद्य था। उसके स्थान पर दाऊजी ने नाचा में हारमोनियम का प्रयोग शुरू किया। नाचा में हारमोनियम का प्रयोग सन् 1933-34 में हुआ। 1936 के आते- आते नाचा में मशाल के स्थान पर पेट्रोमैक्स का प्रयोग शुरू हो गया था। रवेली नाचा पार्टी में 1936 में एक पेट्रोमैक्स आ गया था।

वर्ष 1940 तक रवेली नाचा पार्टी ने समूचे छत्तीसगढ़ में प्रशिद्ध हो चुकी थी। उन दिनों इसके समकक्ष छत्तीसगढ़ में कोई भी पार्टी नहीं थी। सन 1940 से 1952 तक का समय रवेली नाचा पार्टी का स्वर्ण युग माना जाता है।

मंदराजी दाऊ ने रवेली नाचा पार्टी में अपने गम्मत के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक बुराईयों पर जमकर प्रहार किया तथा जन जागरण लाने में अपनी सार्थक भूमिका निभायी। इसके साथ ही उन्होंने कुछ देश भक्ति के गीतों को भी नाचा में शामिल कर अंग्रेजी राज के खिलाफ जनजागरण का प्रयास किया।

रवेली नाचा पार्टी के उत्तरार्द्ध में 1948-49 में भिलाई के समीप स्थित ग्राम रिगनी में "रिगनी नाचा पार्टी" का जोर- शोर से अभ्युदय हुआ था। सन् 1951-52 तक यह पार्टी भी प्रसिद्ध के शिखर पर पहुंच चुकी थी। तब समूचे छत्तीसगढ़ में सिर्फ रवेली और रिंगनी नाचा पार्टी का डंका बज रहा था। लोककला मर्मज्ञ दाऊ रामचंद देशमुख ने फरवरी सन् 1952 में अपने गृहग्राम पिनकापार में दो दिवसीय मंड़ई का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के बाद रवेली एवं रिगनी नाच पार्टी का एक - दूसरे में विलय हो गया। यही से रेवली नाचा पार्टी का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो गया। बाद में रिगनी- रवेली नाचा पार्टी के प्रमुख कलाकार दाऊ रामचंद देशमुख की सांस्कृतिक संस्था "छत्तीसगढ़ देहाती कला विकास मंच" में शामिल हो गये।

आर्थिक प्रलोभनों के कारण मंदराजी के कलाकार धीरे- धीरे अलग होते चले गये और कुछ कलाकारों ने छत्तीसगढ़ से पलायन भी किया। इन बीते वर्षों में मंदराजी दाऊ अपनी सारी संपत्ति नाचा में लगा चुके थे। इस कारण वे अपनी नई टीम भी नहीं बना पाये, लेकिन कलाकरों के छोड़कर जाने के बाद भी नाचा के प्रति उनका मोह मृत्युपर्यन्त बना रहा।

मंदराजी की मृत्यु 24 सिंतबर, 1984 को हुई। बाद में छत्तीसगढ़ सरकार ने दाऊजी की स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए उनके नाम पर दो लाख रूपये का दाऊ मंदराजी सम्मान देना शुरू किया है।

>>छत्तीसगढ़ के लोक कलाकार