मिलेट मिशन – Millet Mission


मिलेट मिशन की शुरुआत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा 10 सितंबर, 2021 को की गई। मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में किसानों को लघु धान्य फसलों की सही कीमत दिलाने, आदान (exchange) सहायता देने, खरीदी की व्यवस्था, प्रोसेसिंग और विशेषज्ञों के परामर्श का लाभ दिलाने की पहल की जाएगी।

वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट के रूप में मनाया जाएगा और मिलेट मिशन के जरिये साल 2023 तक छत्तीसगढ़ देश में मिलेट हब के रूप में पहचान बनाने में सफल होगा।


मिलेट / millet क्या है ?

छोटे अनाज को मिलेट कहा जाता है। इन फसलों को सूखे क्षेत्रों, वर्षा आधारित क्षेत्रों, तटीय क्षेत्रों, या पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता हैं।


मिलेटस की मुख्‍य किस्‍में इस प्रकार हैं-  

  1. ज्‍वार  (Sorghum)
  2. बाजरा (Pearl millet)
  3. रागी (Finger millet)
  4. झंगोरा (Barnyard millet)
  5. बैरी (Proso / Common millet)
  6. कंगनी ( Foxtail / Italian millet)
  7. कुटकी (Little millet)  
  8. कोदो Kodo (Kodo millet)
  9. चेना (Proso millet)


इस मिशन के अंर्तगत कोदो, कुटकी एवं रागी की उत्पादकता बढ़ाने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मिलेट रिसर्च हैदराबाद और राज्य के 14 जिलों के साथ आज एमओयू किया गया।


नोट : छत्तीसगढ़ के 20 जिलों में कोदो-कुटकी, रागी का उत्पादन होता है। प्रथम चरण में इनमें से 14 जिलों के साथ ये एमओयू किया गया है।


14 जिलों के नाम :

कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर, राजनांदगांव, कवर्धा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर और जशपुर।



राजबेड़ा नारायणपुर – Rajbeda Narayanpur



छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित एक धार्मिक स्थल है। राजबेड़ा में भगवान गणेश एवं मां दुर्गा की एक प्राचीन प्रतिमा स्थित है, जो ग्रामीणों के आस्था का केंद्र है। यह जिले के दो ग्राम पंचायत छिनारी और तोयनार के पास स्थित है। 


मान्यता :

ग्रामीणों की मान्यता है की यह प्रतिमाएं यहां करीब 100 वर्ष पूर्व प्रगट हुई थी, जिसे ग्रामीणों ने यात्रा के दौरान देखा।

पोरुनई पुरातात्विक खुदाई Archaeological Excavations (Thamirabarani civilisation )


थामीरापारानी / पोरुनाई सभ्यता (Thamirabarani / Porunai civilisation) भारत के तमिलनाडु राज्य के थामीरापारानी नदी के किनारे 'पोरुनई' पुरातात्विक खुदाई (Archaeological Excavations) में मिले है। यहां 3,200 वर्षों से अधिक पुराने उन्नत मानव सभ्यता के वैज्ञानिक प्रमाण प्राप्त हुआ है।


रेडियो कार्बन डेटिंग :

मियामी स्थित बीटा विश्लेषणात्मक परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा यहां से प्राप्त कलश में पाए गए चावल के दानों और भूसी की कार्बन डेटिंग जांच से पता चला है कि वे 1155 ईसा पूर्व के हैं। बीटा विश्लेषणात्मक परीक्षण प्रयोगशाला ने यह रिपोर्ट 27 अगस्त, 2021 को जारी किया।


अन्य स्थल :

तूतीकोरिन जिले में अधिचनल्लूर और कोरकाई से खुदाई में विशेषज्ञों द्वारा पुष्टि की गई है कि वे क्रमशः 9वीं शताब्दी ईसा पूर्व और 8 ईसा पूर्व के हैं, जो वहां एक परिपक्व सभ्यता की पुष्टि करते हैं। जिसे थामीरापारानी के नाम से जाना जाता है।


Source : NDTV 







 

समझिए "स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट" को – let's Understand the Starlink satelite internet



एलन मस्क ने हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए स्टारलिंक की शुरुआत की थी। इस तकनीक में डाउनलोड 50 एमबीपीएस से 150 एमबीपीएस के बीच है। स्टारलिंक के माध्यम से हम इंटरनेट का इस्तेमाल धरती के लगभग किसी भी हिस्से से कर सकते है।

यह कैसे काम करती है ?

इस तकनीक में इंटरनेट की सेवा अंतरिक्ष में स्थापित सैटेलाइट के माध्यम से दी जाती है। इस प्रकार की तकनीक का उपयोग सैटेलाइट टीवी (d2h) देखने और GPS लोकेशन लेने में हम कर ही रहे हैं।

चूंकि पारंपरिक सैटेलाइट्स बहुत दूर होते हैं, इस वजह से उससे ली जाने वाली सर्विसेस सीमित होती हैं। इस वजह से सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के लिए मस्क की कंपनी ने सैटेलाइट्स को लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO–2,000 km) में स्थापित किया है। ये सैटेलाइट्स डेटा ट्रांसमिट करने के लिए लेकर का इस्तेमाल करते है। यह फाइबर ऑप्टिक ब्रॉडबैंड की तरह ही है, जिसमें लाइट की स्पीड से डेटा ट्रैवल करता है। ये लेजर का सिग्नल अच्छा मिलना चाहिए, इसके लिए एक सैटेलाइट अपने पास के चार अन्य सैटेलाइट्स से जुड़कर एक नेटवर्क बनाता है। वह सैटेलाइट फिर चार अन्य सैटेलाइट्स से जुड़ा होता है। इस तरह से सैटेलाइट्स का नेटवर्क बन जाता है, जो हाई स्पीड इंटरनेट दे सकता है।

छत्तीसगढ़ के प्राचीन गणेश मंदिर – Ancient Ganesh Temples Of Chhattisgarh

ढोलकल गणेश ( Source : dantewada.nic.in )


छत्तीसगढ़ राज्य में विभिन्न स्थानों में हुए पुरातात्विक खोजो से यह सिद्ध हो चुका है की राज्य में हजारों वर्षो से भगवान गणेश की आराधना होते आई है। ऐसे प्राचीन मंदिरों को इस सूची में शामिल किया गया है, जिनकी खोज पुरातत्वविदों के द्वारा की गई है।


बारसूर :

बस्तर संभाग के बारसूर स्थित गणेश की मूर्ति विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गणेश की मूर्ति है। यहां जुड़वां गणेश मंदिर में दो गणेश प्रतिमा है। एक की ऊंचाई सात फीट की है तो दूसरी की पांच फीट है। बारसूर की यह प्रतिमा एक पत्थर से ही निर्मित है। 

मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा बाणासुर ने करवाया था. राजा की पुत्री और उसकी सहेली दोनों भगवान गणेश की खूब पूजा करती थी। लेकिन इस इलाके में दूर तक कोई गणेश मंदिर नहीं था। इस वजह से राजा की पुत्री को गणेश जी की आराधना के लिए दूर जाना पड़ता था। राजा ने अपनी पुत्री के कहने पर इस मंदिर का निर्माण कराया था। पूर्ण पढ़ें


ढोलकल :

यह पहाड़ी बैलाडीला की पहाड़ी श्रृंखला में छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा में स्थित है। यह पहाड़ी एक पर्यटन क्षेत्र है। ढोलकल पहाड़ी पर 11 वीं शताब्दी की गणेश प्रतिमा विराजित विराजित है। प्रतिमा साढ़े तीन फीट ऊंची काले ग्रेनाईट से बनी है। पूर्ण पढ़ें


कपिलेश्वर मंदिर समूह :

इस मंदिर समूह छः मंदिरो का एक समूह है, जो अलग–अलग देवताओं को समर्पित है। कपिलेश्वर मंदिर समूह बालोद छत्तीसगढ़ - 13 वी -14 वी शताब्दी में नागवंशी शासन काल में निर्मित है। 

दुसरा मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश की 6 फीट की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर का शिखर पीड़ा देवल प्रकार में निर्मित है। छत्तीसगढ़ में भगवान गणेश की अनेकों प्रतिमायें मिलती है किन्तु अधिकांश प्रतिमायें खुले में या किसी मंदिर के मंडप में स्थापित प्राप्त होती है किन्तु ऐसे मंदिर बेहद की कम प्राप्त होते है। पूर्ण पढ़ें


माता दंतेश्वरी मंदिर :

माता दंतेश्वरी के मंदिर में गर्भगृह के ठीक बाहर, निकासी द्वार से लग कर भगवान गणेश जी की विशाल काले रंग की मूर्ति स्थापित है। दंतेश्वरी मंदिर के निर्माण का श्रेय तो चालुक्य शासक अन्नमदेव को जाता है किंतु मंदिर के भीतर अवस्थित अधिकतम प्रतिमायें नाग (760 – 1324 ई) अथवा नल (ईसापूर्व 600 – 760 ई.) काल की है।


अन्य :

मदकू द्वीप में कल्चुरी कालीन चतुर्भुजी नृत्य गणेश की प्रतिमा बकुल पेड़ के नीचे मिली है। सातवी शताब्दी के सुरंग टीला मंदिर में पाँच गर्भगृह हैं जिनमें चार भिन्न प्रकार के शिवलिंग हैं – सफ़ेद, काला, लाल और पीला, और अन्य एक गर्भगृह में भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान है। भोरम देव के गर्भगृह में एक पंचमुखी नाग की मुर्ति है साथ ही नृत्य करते हुए गणेश जी की मुर्ति तथा ध्यानमग्न अवस्था में राजपुरूष एवं उपासना करते हुए एक स्त्री पुरूष की मुर्ति भी है।


गढ़ धनोरा पुरातात्विक स्थल – Garh Dhanaura Archaeological site

भोरम देव


गढ़ धनोरा पुरातात्विक स्थल ( Garh Dhanaura Archaeological site ) कोंडागांव जिले के केशकाल तहसील में स्थित है। यह ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यहां टीलों की खुदाई पर अनेक शिव मंदिर प्राप्त हुए है। यहां स्थित एक टीले पर कई शिवलिंग है, यह गोबरहीन (Gobarhin) के नाम से प्रसिद्ध है। 


मंदिर समूह :

यहां मंदिरों के तीन समूहों की पहचान विष्णु मंदिर समूह, बंजारिन मंदिर समूह और गोबरहिन मंदिर समूह के रूप में की गई है। विष्णु मंदिर समूह में 10 मंदिर शामिल हैं जिनमें विष्णु, शिव और नरसिंह मंदिर शामिल हैं। बंजारिन मंदिर समूह में चार खंडहर मंदिर और आवासीय भवनों के अवशेष शामिल हैं। गोबरहिन समूह के पास एक बड़ा ईंट का टीला है जिसके शीर्ष पर गर्भगृह में शिव लिंग है और अन्य छोटे मंदिर अवशेष हैं। सभी ईंट संरचनाओं का निर्माण लगभग 5वीं-7वीं शताब्दी में नलवंशी शासकों के शासनकाल के दौरान किया गया था।


इन्हे देखें :

छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक स्थल

नान्हू दाई (Nanhu Dai Chawhan) – छत्तीसगढ़ की पहली दलित विधायक

 नान्हू दाई चौहान (  Nanhu Dai Chawhan ) को छत्तीसगढ़ की (अविभाजित मध्यप्रदेश) पहली दलित महिला विधायक होने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने दो बार सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व किया। पहली बार 1957 में तथा दूसरी बार 1962 में सारंगढ़ विधानसभा से विधायक चुनी गई।


नान्हू दाई चौहान छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जाति वर्ग की दूसरी सर्वाधिक जनसंख्या वाली गांडा जाति से आती है। इस जाति का छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है।


इन्हे देखें:

मिनी माता



मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला – Manendragarh Chirmiri Bharatpur

 15 अगस्त, 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरिया जिले से अलग कर मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला बनाने की घोषणा की थी।


पर्यटन स्थल :

अमृतधरा जलप्रपात – प्रसिद्ध जलप्रपात अमृतधार मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिला में स्थित है। अमृतधरा जलप्रपात मनेंद्रगढ़ ब्लॉक में स्थित नागपुर क्षेत्र में है।

रामदाह जलप्रपात – यह बनास नदी पर एक बहुत ही सुंदर झरना है जो भरतपुर जनपद पंचायत में स्थित है। 


नोट : अभी ये स्थल संभावित है।



105 वां संविधान संशोधन – 105 constitution amendment

 


संसद में 11 अगस्त, 2021 को सर्वसम्मति से विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रपति के सामने पेश किया गया। राष्ट्रपति से 18 अगस्त को मंजूरी मिलने के बाद इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

127 वां विधेयक या बिल के रूप में दोनों सदनों से पास हो राष्ट्रपति से हस्ताक्षरित यह 105 वां संशोधन अधिनियम बना जिसके तहत राज्यों को पिछड़ी जातियों (OBC) की लिस्टिंग का अधिकार मिल गया। संविधान के अनुच्छेद 342ए में संशोधन किया गया है इसके साथ ही अनुच्छेद 338बी और 366(26) सी में भी संशोधन हुए हैं। अब राज्य सरकारें अपने राज्य के हिसाब से अलग-अलग जातियों को ओबीसी कोटे में डाल सकेंगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग एक्ट, 1993 के अंतर्गत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की स्थापना की गई थी। संविधान (एक सौ दूसरा संशोधन) एक्ट, 2018 ने एनसीबीसी को संवैधानिक दर्जा दिया है।


इन्हे देखें :

प्रमुख संविधान संशोधन


सक्ती जिला – Sakti zila



सक्ती जिला गठन की घोषणा 15 अगस्त, 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा की गई थी। जांजगीर–चांपा जिले से पृथक हो कर,चार ब्लाक सक्ती, मालखरौदा, जैजैपुर और डभरा को मिलाकर  यह जिला बनाया जा सकता है। इस तरह नवगठित जिले में 295 पंचायत और 458 गांव होंगे।  


इतिहास:

अंग्रेज शासन के दौरान सक्ति, सक्ति राज्य की राजधानी हुआ करती थी। यह छत्तीसगढ़ में स्थित 14 रियासतों (  princely states ) में से एक था। इस रियासत की स्थापन हरी और गुर्जर नामक दो राज गोड़ों ने किया था। वर्ष 1865 में सक्ति को एडाप्सन सनद दिया गया।


संभावित पर्यटन स्थल :

नगर्दा (Nagarda)

अड़भार ( Adbhaar )

मालखरौदा तहसील में स्थित शहर सक्ती से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण 5वीं शताब्दी में माना जाता है। जिसमें आठ हाथ वाली देवी विराजमान है। नवरात्रि के अवसर पर यहॉ ज्योति कलश जलाया जाता हैं।


दमाऊधारा ( Damau Dhara )

सक्ती तहसील में सक्ति-कोरबा के रास्ते में एक आकर्षण का केन्द्र हैं यहॉ प्राकृतिक पानी का जल प्रपात, गुफाएॅ रामजानकी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, ऋषभ देव मंदिर इत्यादि है। इसके पास ही अन्य पर्यटन स्थल पंचवटी, सीतामणी आदि स्थित है।