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भारतीय वायु सेना (IAF) में 334 पदो पर होगी नियुक्ति


भारतीय वायु सेना (IAF) में 334 पदो पर होगी नियुक्ति होगी। इन पदों पर एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT-2) के माध्यम से कमीशन अधिकारियों के पद पर भर्ती (IAF AFCAT 2 Recruitment 2021) के लिए आवेदन मांगे हैं।


आवेदन तिथि : अध्यर्थी 30 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


आयु सीमा 

फ्लाइंग ब्रांच : AFCAT से - 20 से 24 वर्ष। आयु की गणना 1 जुलाई 2022 से होगी। यानी आवेदक का जन्म 02 जुलाई 1998 से 01 जुलाई 2002 के बीच हुआ हो। 

ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल एंड नॉन टेक्निकल) - 20 से 26 वर्ष। आयु की गणना 1 जुलाई 2022 से होगी। यानी आवेदक का जन्म 02 जुलाई 1996 से 01 जुलाई 2002 के बीच हुआ हो।


शैक्षणिक योग्यता

फ्लाइंग ब्रांच : 50 फीसदी मार्क्स के साथ 12वीं पास, 12वीं में मैथ्स व फिजिक्स विषय होना जरूरी एवं कम से कम 60 फीसदी अंको के साथ किसी भी विषय में स्नातक

या 

कम से कम 60 फीसदी अंको के साथ बीई/बीटेक डिग्री


ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल) ब्रांच 

50 फीसदी मार्क्स के साथ 12वीं पास, 12वीं में गणित व फिजिक्स विषय होना जरूरी एवं इंजीनियरिंग में चार वर्षीय डिग्री/इंटीग्रेटेड पोस्ट ग्रेजुएशन 


ग्राउंड ड्यूटी (नॉन टेक्निकल) 

एडमिनिस्ट्रेशन : 12वीं पास एवं 60 फीसदी अंकों के साथ किसी भी विषय में ग्रेजुएशन 

एजुकेशन : 12वीं पास, कम से कम 50 फीसदी मार्क्स के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन एवं कम से कम 60 फीसदी मार्क्स के साथ ग्रेजुएशन

मेट्रोलॉजी : 12वीं पास एवं साइंस स्ट्रीम/मैथ्स/स्टैट्स/ज्योग्राफी/कंप्यूटर एप्लीकेशन/एनवायरमेंट साइंस/एप्लाइड फिजिक्स/ओशियनोग्राफी/मेट्रोलॉजी/एग्रीकल्चर मेट्रोलॉजी/इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट/जियो फिजक्स/एनवायरनमेंटल बायोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री (50 फीसदी अंको के साथ)





नोटिफिकेशन डाउनलोड करें

ऑनलाइन एप्लीकेशन लिंक


छत्तीसगढ़ में स्टाफ नर्स के 267 पदों पर भर्ती


स्वास्थ्य सेवा (DHS) निदेशालय, छत्तीसगढ़ ने स्टाफ नर्स के 267 पदों पर भर्ती के लिए योग्य अभ्यर्थी से आवेदन मांगे हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू हो चुकी है। अभ्यर्थी ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की आखिरी तारीख 26 जून तय की गई है।


पदों की संख्या : 267

योग्यता : बी.एससी (नर्सिंग), पी.बी.बी.एससी. नर्सिंग या जनरल नर्सिंग और सीनियर ऑब्सटेट्रिक्स (सीनियर मिडवाइफरी) प्रशिक्षण पास।

आयु सीमा :  18 – 35 वर्ष। राज्य के मूल निवासी के लिए अधिकतम उम्र 40 साल तक तय की गई है। 

जरूरी तारीखें :

ऑनलाइन आवेदन शुरू होने की तारीख- 27 मई

ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख- 26 जून

 चयन प्रक्रिया : मेरिट के आधार।

ऑफिशियल नोटिफिकेशन देख सकते हैं।

Registration link https://cg.nic.in/health/recstaffnurse2021may/

गोपालकृष्ण गोखले का छत्तीसगढ़ आगमन

स्वतंत्रता सेनानी गोपालकृष्ण गोखले का छत्तीसगढ़ के रायपुर में मई, 1915 को आगमन हुआ था। का उनके आगमन का उद्देश्य बुद्धिजीवियों को देश की राजनीति से जागृत एवं सक्रिय करना था ।


उनके आगमन पर वामन राव लाखे के निवास पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में रायपुर से पं. रविशंकर शुक्ल, लक्ष्मण राव उदयगीरकर, वामन राव लाखे; धमतरी से नारायण राब मेघावाले, नत्थूजी जगताप, बाबू छोटे लाल; राजनांदगांव से ठा. प्यारेलाल सिंह; राजिम से पं. सुंदर लाल शर्मा आदि शामिल हुए।

इस सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का प्रचार गाँव-गाँव में किया जाए।

लघु वनोपज – समर्थन मूल्य(छत्तीसगढ़)


लघु वनोपज (Minor Forest Produce - MFP) में सभी गैर-लकड़ी वन उपज को शामिल शामिल किया गया है।


वन धन विकास केंद्र:

इसका उद्देश्य जनजातीय लोगों और कारीगरों को "लघु वनोपज" केंद्रित आजीविका विकास को बढ़ावा देना है। वन धन विकास केंद्रों की स्थापना "वन धन योजना" कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसे देश में सबसे पहले छत्तीसगढ़ में 2018 में लॉन्च किया गया था।


समर्थन मूल्य(छत्तीसगढ़)

भारत सरकार, जनजातीय कार्य मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2014-15 में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना लागू की गई है। संघ द्वारा भारत शासन के न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनांतर्गत हर्रा एवं सालबीज का संग्रहण वर्ष 2014-15 से, महुआ बीज, इमली, चिरौंजी गुठली, कुसुमी लाख एवं रंगीनी लाख 2015-16 से कालमेघ, बहेड़ा, नागरमोथा, कुल्लू गॉद, पुवाड़, बेलगुदा, शहद, फूल झाडू वर्ष 2018-19 से, महुआ फूल (सूखा), जामुन बीज (सूखा), काँच, धवई फूल (सूखा), करंज बीज, बायबडिंग, आंवला बीज रहित वर्ष 2019-20 से एवं मेलवा, इमली बीज, फूल इमली (इमली बीज रहित), बहेड़, कचरिया, गिलोय, नीम बीज, हर्रा कचरिया, वन जीरा, वन तुलसी (बीज) वर्ष 2020-21 से इस प्रकार कुल 31 लघु वनोपज का कय किया जा रहा है साथ ही अन्य प्रमुख एवं गौण वनोपजों का सफलतापूर्वक संग्रहण किया जा रहा है।

दिसंबर, 2020 से राज्य शासन ने 38 प्रमुख लघु वनोपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। इसके अलावा राज्य लघु वनोपज संघ के द्वारा 14 अन्य महत्वपूर्ण लघु वनोपज की खरीदी निर्धारित दर पर किया जा रहा है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ में कुल 52 लघु वनोपज को समर्थन मूल्य में खरीदा जायेगा।

राज्य शासन द्वारा 38 लघु वनोपज हेतु निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत 

  1. ईमली बीज सहित 36 रुपए प्रति किलोग्राम,
  2. महुआ बीज 29 रुपए,
  3. कालमेघ 35 रुपए, 
  4. नागरमोथा 30 रुपए,
  5. बेलगुदा 30 रुपए,
  6. शहद 225 रुपए, 
  7. महुआ फूल सूखा 30 रुपए, 
  8. जामुन बीज सूखा 42 रुपए,
  9. जामुन (कच्चा) 23 रुपए,
  10. बेल (कच्चा) 10 रुपए,
  11. कौंच बीज 21 रुपए,
  12. करंज बीज 22 रुपए, 
  13. बायबडिंग 94 रुपए,
  14. आंवला बीज रहित 52 रुपए, 
  15. फूल ईमली बीज रहित 63 रुपए, 
  16. सालबीज 20 रुपए, 
  17. चिरौंजी गुठली 126 रुपए, 
  18. हर्रा साबुत 15 रुपए,
  19. बहेड़ा साबुत 17 रुपए, 
  20. पुवाड़ चरौटा बीज 16 रुपए,
  21. गिलोय 40 रुपए,
  22. भेलवां 9 रुपए,
  23. कुसमी लाख 300 रुपए,
  24. रंगीनी लाख 220 रुपए,
  25. कुल्लू गोंद 125 रुपए,
  26. वन तुलसी बीज 16 रुपए,
  27. वन जीरा बीज 70 रुपए, 
  28. ईमली बीज 11 रुपए, 
  29. बहेड़ा कचरिया 20 रुपए,
  30. हर्रा कचरिया 25 रुपए, 
  31. नीम बीज 27 रुपए,
  32. कुसुम बीज 23 रुपए,
  33. रीठा फल सूखा 14 रुपए,
  34. शिकाकाई फल्ली सूखा 14 रुपए,
  35. सतावर जड़ सूखा 107 रुपए,
  36. काजू गुठली 90 रुपए,
  37. मालकांगनी बीज 100 रुपए,
  38. माहुल पत्ता का 15 रुपए

FIRMS क्या है ?


FIRMS का पूरा नाम Flood Reporting and Information Management System है, यह एक डिजिटल वास्तविक समय (रियल टाइम) ऑनलाइन बाढ़ रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसे 08 मई, 2021 को असम के मुख्य सचिव जिष्णु बरुआ ने शुभारंभ किया।

असम एक डिजिटल बाढ़ रिपोर्टिंग प्रणाली को अपनाने वाला ऐसा पहला भारतीय राज्य है। FRIMS प्रणाली 15 मई, 2021 से चालू हो जाएगा।


किसने विकसित किया ?

इसे असम राज्य आपदा प्रबंधन एजेंसी (ASDMA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित की गई है।





क्या है ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइसिस) रोग


म्यूकोरमाइसिस (Mucormycosis) फंगस (ब्लैक फंगस) इंफेक्शन से जुड़ी बीमारी है। इस फंगस के स्पोर्स या बीजाणु वातावरण में प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। आमतौर पर इनसे कोई ख़तरा नहीं, लेकिन शरीर का इम्युनिटी सिस्टम कमजोर हो, तो यह फंगस जानलेवा साबित हो जाते हैं। 

शुगर के मरीज इस बीमारी के ज्यादा ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इस रोग में आंख की नसों के पास फंगस इंफेक्शन जमा हो जाता है, जो सेंट्रल रेटिनल आर्टरी का ब्लड फ्लो बंद कर देता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी चली जाती है। 


ब्लैक फंगस कैसे शरीर हो प्रभावित करता है ?

ब्लैक फंगस आंख, नाक के रास्ते ये फंगस दिमाग तक पहुंचता है।साइनस, मस्तिष्क और फेफड़े को प्रभावित करता है। यह रास्ते में आने वाली हड्डी और त्वचा को नष्ट कर देता है और इसमें मृत्यु दर काफी ज्यादा है। 


ब्लैक फंगस के लक्षण :

चेहरे का एक तरफ से सूज जाना, सिरदर्द होना, नाक बंद होना, उल्टी आना, बुखार आना, चेस्ट पेन होना, साइनस कंजेशन, मुंह के ऊपर हिस्से या नाक में काले घाव होना जो बहुत ही तेजी से गंभीर हो जाते हैं। Source


बचाव :

कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों को हाइपरग्लाइसिमिया पर नियंत्रण करना जरूरी है। इसके अलावा डायबिटिक मरीजों को ब्लड ग्लूकोज लेवल चेक करते रहना चाहिए।

स्टेरॉयड लेते वक्त सही समय, सही डोज और अवधि का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है।



वर्तमान में चर्चा में क्यों है ?

कोरोना संक्रमित मरीज या कोरोना से स्वस्थ हुए कुछ मरीजों में ब्लैक फंगस इंफेक्शन देखा गया है।


Source : अमर उजाला

"सीजी टीका" / CG TEEKA APP/Portal


राजधानी रायपुर में 18 प्लस टीकाकरण के लिए लोगों को वैक्सीनेशन सेंटर में रजिस्ट्रेशन के लिए मारामारी से बचाने के लिए स्वास्थ्य के विभाग द्वारा 12 मई को ‘सीजी टीका / CG TEEKA' एप/पोर्टल(Portal) लॉच किया।

Note : सीजी टीका एक वेब एप्लीकेशन है।


टीकाकरण कराने जाएं तो ये दस्तावेज जरूरी

  • अंत्योदय और बीपीएल श्रेणी के लिए हितग्राहियों को निर्धारित आईडी- दस्तावेज के साथ राशन कार्ड भी दिखाना होगा।
  • एपीएल श्रेणी के लिए निर्धारित पहचान पत्र आईडी जैसे आधार, पेन कार्ड या अन्य मान्य दस्तावेज में से कोई एक दिखाना होगा।
  • फ्रंटलाइन वर्कर की श्रेणी में आने वालों को पहचान पत्र लाना होगा।
  • इसके अलावा शासकीय कर्मचारियों के लिए जिला स्तरीय अधिकारी का प्रमाण पत्र।
  • वकीलों के लिए बार काउंसिल का पंजीकरण प्रमाण पत्र।
  • पत्रकारों के लिए जिले के पीआरओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र।
  • अन्य व्यक्तियों के लिए जिला कलेक्टर द्वारा अधिकृत अधिकारी का प्रमाण पत्र लाना होगा।

पंजीयन (Registration) कैसे करेंगे ?
पंजीयन करने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते है।

छत्तीसगढ़ का "माटी तिहार" – Mati Tihar



माटी तिहार ( माटी का मतलब "मिट्टी" और तिहार का मतलब "पर्व" होता है। ) बस्तर संभाग चैत्र माह में मनाया जाने वाला एक दिवसीय जनजातीय पर्व है। माटी तिहार का मतलब मिट्टी की पूजा कर अच्छी फसल के लिए धन्यवाद अदा करना है। यह पर्व अलग-अलग गांवों में अपने मर्जी से अलग-अलग दिन में मनाया जाता है जिसे गांव के गायता, पुजारी एवं समुदाय के सभी लोग मिल कर तय करते हैं।


माटी तिहार के दिन ग्रामीण मिट्टी से संबंधित किसी प्रकार से कोई भी कार्य जैसे मिट्टी खोदना, खेतों मे हल चलाना आदि नहीं करते है। यदि कोई नियम विरुद्ध कार्य करते पाया गया तो समुदाय द्वारा उस व्यक्ति को दण्डित भी किया जाता है। 

माटी त्योहार से साल भर के त्योहार की शुरूआत होती है और मेला-मड़ई के साथ समाप्ति होती है। माटी देव की पूजा के साथ हीं अंचल में खेती किसानी का काम शुरू हो जाता है।

क्या है स्वामित्व योजना ? Swamitva Scheme



इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि का सर्वे होगा। इस मैपिंग के आधार पर लोगों को उनकी संपत्ति ( भूमि व मकान) का एक प्रॉपर्टी कार्ड दिया जाएगा, जिसमें उनके भूमि संबंधित पूरी जानकारी रहेगी। इस प्रॉपर्टी कार्ड की मदद से बैंकों में लोन की सुविधा भी उन्हें उपलब्ध हो सकेगी। 


शुभारंभ :

24 अप्रैल 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना का शुभारंभ किया था। वित्तय वर्ष 2020-21 के दौरान पायलट फेज के अंतर्गत स्वामित्व योजना देश के नौ राज्यों- उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में शुरू की गई थी।


संपूर्ण देश में शुभारंभ :

24 अप्रैल, 2021 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री देश के सभी गांवों में स्वामित्व योजना के विस्तार का शुभारंभ करेंगे।

राज्‍य के नीति के निदेशक तत्‍व

संविधान के भाग 4 में ‍अनुच्छेद 36-51 तक "राज्‍य के नीति के निदेशक तत्‍व" को शामिल किया गया है। संविधान का यह भाग आयरलैण्‍ड के संविधान से प्रभावित है। इसमें ऐसे अधिकार है जिन्‍हे तत्‍काल देना संभव नहीं था, उन अधिकारों को बी.एन.राव की सलाह पर नीति-निदेशक तत्‍वों की श्रेणी में रख दिया गया ताकि जब सरकारें सक्षम हो जाएंगी तब धीरे-धीरे इन उपबंधों को लागू करेंगी। 

42 वें संविधान संशोधन 1976 में माध्‍यम से नीति-निदेशक तत्‍वों में अनुच्‍छेद 39क, 43क, तथा 48क को अन्‍त:स्‍थपित किया गया ।



प्रमुख अनुच्छेद

अनुच्‍छेद-36: परिभाषा – नीति-निदेशक तत्‍वों के संदर्भ में ‘राज्‍य‘ की परिभाषा है। इसमें भी राज्‍य का वही अर्थ है जो भाग 3 में है।

अनुच्‍छेद-37: इस भाग में दिये गए तत्‍वों का न्‍यायालय द्वारा प्रवर्तनीय न होते हुए भी देश के शासन में मूलभूत माना गया है तथा विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्‍य का कर्तव्‍य होगा।

अनुच्‍छेद-38: राज्‍य लोक-कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिये सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा।

अनुच्‍छेद-38(1): राज्‍य लोक-कल्‍याण की अभिवृद्धि के लिये सामाजिक व्‍यवस्‍था बनाएगा ताकि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्‍याय हो सके।

अनुच्‍छेद-38(2): आय, प्रतिष्‍ठा, सुविधाओं तथा अवसरों की असमानताओं को समाप्‍त करने का प्रयास करना।

अनुच्‍छेद-39:  राज्‍य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति-निदेशक तत्‍व

पुरूषों व स्‍त्रियों को आजीविका के पर्याप्‍त साधन प्राप्‍त करने का अधिकार।

समाज में भौतिक संसाधनों के स्‍वामित्‍व का उचित वितरण।

अर्थव्‍यवस्‍था में धन तथा उत्‍पादन के साधनों के अहितकारी केन्‍द्रीकरण का निषेध।

पुरूषों व स्त्रियों के लिये समान कार्य के लिये समान वेतन।

पुरूषों व स्‍त्री श्रमिकों तथा बच्‍चों को मजबूरी में आयु या शक्ति की दृष्टि से प्रतिकूल रोज़गार में जाने से बचाना।

बच्‍चों को स्‍वतंत्र और गरिमा के साथ विकास का अवसर प्रदान करना और शोषण से बचना।

अनुच्‍छेद-39क: समान न्‍याय और नि:शुल्‍क विधिक सहायता    

राज्‍य यह सुनिश्चित करेगा कि विधि तंत्र इस प्रकार काम करे कि समान अवसर के आधार पर न्‍याय सुलभ हो तथा अर्थिक या किसी भी अन्‍य आधार पर नागरिक न्‍याय प्राप्‍त करने से वंचित न रह जाऍं। यह विधिक सहायता नि:शुल्‍क होगी।

अनुच्‍छेद-40: ग्राम पंचायतों का गठन

राज्‍य ग्राम पंचायतों का गठन करने के लिये कदम उठाएगा और उनको ऐसी शक्तियॉ और प्राधिकार प्रदान करेगा जो उन्‍हे स्‍वायत्‍ता शासन की इकाइयों के रूप में कार्य करने योग्‍य बनाने के लिये आवश्‍यक हों।

अनुच्‍छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।

अनुच्‍छेद 42: काम की न्‍याय संगत और मानवोचित दशाओं का तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।

अनुच्‍छेद 43: कर्मकारों के लिये निर्बाह मजदूरी , शिष्ट जीवन स्तर व अवकाश की व्यवस्था करना , और कुटीर उद्धोगों को प्रोत्साहित करना।

  • क: उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों के भाग लेने के लिये उपयुक्‍त विधान बनाना।
  • ख: सहकारी समिमियों का उन्‍नयन, सहकारी समितियों के स्‍वैच्छिक गठन, स्‍वायत्‍त प्रचालन , लोकतंत्रिक नियंत्रण तथा पेशेवर प्रबंधन को प्रोत्‍साहित करना ।

अनुच्‍छेद 44: नागरिकों के लिये एक समान सिविल संहिता लागू करने का प्रयास करना।

नोट:- भारत में ‘गोवा’ एक अकेला राज्‍य है जहॉं समान नागरिक संहिता लागू है।


अनुच्‍छेद 45: शिशुओं की देखभाल तथा 6 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों को शिक्षा देने का प्रयास करना।

अनुच्‍छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य दुर्बल वर्गो के शिक्षा और अर्थ संबंधी हितों की अभिवृद्धि करना और हर तरह के शोषण व सामाजिक अन्‍याय से उनकी रक्षा करना।

अनुच्‍छेद 47: लोगों के पोषहार स्‍तर और जीवन स्‍तर को उॅचा करने तथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य के सुधार करने को प्राथमिक कर्तव्‍य मानना तथा मादक पेयों व हानिकारक नशीले पदार्थों के सेवन का प्रतिषेध करने का प्रयास करना।


अनुच्‍छेद 48: कृषि और पशुपालन का संगठन

कृषि तथा पशुपालन का संगठन आधुनिक-वैज्ञानिक प्रणालियों के अनुसार करना तथा गाय-बछडों व अन्‍य दुधारू या वाहक पशुओं की नस्‍लों का परिरक्षण और सुधार करना व उनके वध का प्रतिषेध करने के लिये कदम उठाना।


अनुच्‍छेद 48क: पर्यावरण के संरक्षण व संवर्द्धन तथा वन व वन्‍य जीवों की रक्षा का प्रयास करना।

अनुच्‍छेद 49: राष्‍ट्रीय महत्‍व के स्‍मारकों, स्‍थानों और वस्‍तुओं का संरक्षण करना।

अनुच्‍छेद 50: कार्यपालिका से न्‍यायपालिका का पृथक्करण

अनुच्‍छेद 51: अन्‍तर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की अभिवृद्धि।