11/11/2022

BIOS क्या होता है। कंप्यूटर के लिए कितना जरूरी ?

BIOS फर्मवेयर है यह किसी कंप्यूटर में पहले से इंस्टॉल ( Pre-installed) होता है। इसका उपयोग किसी ऑपरेटिंग सिस्टम और प्रोग्राम के लिए रनटाइम सेवाएं प्रदान करने और बूटिंग प्रक्रिया के दौरान हार्डवेयर इनिशियलाइज़ेशन करने के लिए किया जाता है। कंप्यूटर को सुरु (Boot) करने पर सबसे पहले BIOS ही सुरु होता है। BIOS का पूरा नाम Basic Input/Output System है।

BIOS शब्द का प्रथम प्रयोग गैरी किल्डल के द्वारा किया गया था। BIOS प्रोग्राम का इस्तेमा पहली बार 1975 में CP/M ऑपरेटिंग सिस्टम में किया गया था। मूल रूप से BIOS आईबीएम का था। परंतु कुछ कंपनियों द्वारा इसे रिवर्स इंजीनियर किया गया है।

MS-DOS, PC DOS या DR-DOS के संस्करणों में "IO.SYS", "IBMBIO.COM", "IBMBIO.SYS", या "DRBIOS.SYS" नामक एक फ़ाइलो का प्रयोग किया जाता है, इन फ़ाइलो को "DOS BIOS" ("डॉस आई/ओ सिस्टम") नाम से जाना जाता है।


प्रोसेस :







10/31/2022

छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण सम्मान 2022 - Chhattisgarh State Alankaran Samman 2022



छत्तीसगढ़ राज्य अलंकार पुरस्कार 2022 को 33 क्षेत्रो में दिया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण सम्मान में तीन नए पुरस्कार जोड़े गए हैं। यह पुरस्कार लोक कलाकार स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया (लोकगीत) और स्व. खुमान साव (लोकगीत) तथा भगवान राम की माता कौशल्या (सर्वश्रेष्ठ रामायण मण्डली) को समर्पित होंगे। 


छत्तीसगढ राज्य अलंकरण सम्मान 2022 के प्राप्तकर्ताओं की सूची :

  1. गुंडाधुर सम्मान : अमितेश मिश्रा (स्केटिंग) , पहली बार स्केटिंग में यह सम्मान दिया गया है।
  2. शहीद वीरनारायण सिंह सम्मान : नारायण मरकाम को आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग का उत्थान के क्षेत्र के लिए।
  3. पं. लखनलाल मिश्र सम्मान : लक्ष्मी प्रसाद मिश्रा को अपराध अनुसंधान के क्षेत्र के लिए।
  4. यति यतनलाल सम्मान : मदन मोहन गौशाला खरसिया को अहिंसा एवं गौ रक्षा के लिए।
  5. मिनीमाता सम्मान : डॉ. श्रीमती मीरा शुक्ला को महिला उत्थान के लिए।
  6. गुरु घासीदास सम्मान : खेमचंद भारती को सामाजिक चेतना / दलित उत्थान के क्षेत्र के लिए।
  7. ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान : अशोक अग्रवाल को सहकारिता के क्षेत्र के लिए।
  8. हाजी हसन अली सम्मान : यूनुस खान को उर्दू भाषा की सेवा के लिए।
  9. पं. रविशंकर शुक्ल सम्मान : सीताराम अग्रवाल को सामाजिक आर्थिक, शैक्षणिक के क्षेत्र के लिए।
  10. चक्रधर सम्मान : वेदमणि सिंह ठाकुर को संगीत एवं कला के लिए।
  11. दाऊ मंदराजी सम्मान : जयंती यादव और पंडित राम को संयुक्त रूप से लोककला / शिल्प के लिए।
  12. पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान : रामेश्वर वैष्णव को साहित्य / आंचलिक साहित्य के लिए दिया गया है।
  13. खूबचंद बघेल सम्मान : खेदू राम बंजारे को कृषि क्षेत्र के लिए।
  14. महाराजा अग्रसेन सम्मान : ईश्वर प्रसाद अग्रवाल को सामाजिक समरसता के क्षेत्र के लिए।
  15. दानवीर भामाशाह सम्मान : गंगोत्री वर्मा को दानशीलता, सौहाद्र एवं अनुकरणीय सहायता के लिए।
  16. श्रीमती बिलासाबाई केवटिन सम्मान : रूपचंद धीवर को मत्स्य पालन के लिए।
  17. संस्कृत भाषा सम्मान : बालकृष्ण तिवारी को संस्कृत भाषा की सेवा के लिए।
  18. डॉ. भंवरसिंह पोर्ते सम्मान : टुकेश्वर कंवर को आदिवासी सेवा के लिए।
  19. महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव सम्मान :  एनटीपीसी सीपत एवं श्री पालूराम साहू को संयुक्त रूप से श्रम क्षेत्र के लिए।
  20. बिसाहू दास महंत पुरस्कार :  श्री आनदं देवांगन,  श्री पदमचरण देवांगन को संयुक्त रूप से 2020-21 और श्री राजन देवांगन,  श्री कृष्ण कुमार देवांगन को संयुक्त रूप से 2021-22 में बुनकर क्षेत्र के लिए।
  21. राजराजेश्वरी करुणामाता हाथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार : श्री नरसिंह देवांगन एवं  श्री श्रीपति मेहेर देवांगन को संयुक्त रूप से बुनकर के क्षेत्र के लिए।
  22. देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार : द्वारिका बर्मन को प्रदर्शनकारी लोक कला के लिए।
  23. देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार (पंथी नृत्य) : मिपला दास बंजारे को लोक शैली पंथी नृत्य के लिए।
  24. किशोर साहू सम्मान : मनू नायक को हिन्दी / छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा, निर्माण के लिए।
  25. किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकार : पलास वासवानी को हिन्दी / छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के लिए।
  26. धन्वंतरि सम्मान : डॉ. मनोज चौकसे को आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा तथा शोध एवं अनुसंधान के लिए।
  27. बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान :  डॉ. प्रिया राव एवं श्री विवेक सारस्वत को संयुक्त रूप से विधि क्षेत्र के लिए।
  28. छत्तीसगढ़ प्रवासी भारतीय सम्मान : गणेश कर को देश के बाहर सामाजिक कल्याण, मानव संसाधन विकास, कला, साहित्य अथवा आर्थिक योगदान के लिए।
  29. लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार : जीवन यदु को साहित्य/आंचलिक साहित्य के क्षेत्र के लिए।
  30. चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता सम्मान : श्री धनंजय वर्मा को प्रिंट मीडिया एवं श्री अमितेष पाण्डेय और डॉ. वैभव शिव पाण्डेर को संयुक्त रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए।
  31. मधुखेर स्मृति पत्रकारिता सम्मान : डॉ. के. एन. किशोर को अंग्रेजी पत्रकारिता के लिए।
  32. माधवराव सप्रे सम्मान : श्री सुदीप ठाकुर को रचनात्मकता लेखन और हिन्दी भाषा के लिए।




चिंगरा पगार - गरियाबंद : Chingra Pagar Gariyaband

प्रतीकात्मक तस्वीर

चिंगरा पगार जलप्रपात एक मौसमी जलप्रपात है जो छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित है। यह जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बारुका से करीब 3-4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वर्तमान में बारुका से जलप्रपात तक पैदल रास्ता है।

इस जलप्रपात की ऊंचाई करीब 110 फिट है। जलप्रपात के नीचे एक छोटा सा कुंड भी है। स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल पिकनिक मनाने के लिए करते है। जंगल से घिरा होने की वजह से यह स्थल अत्यंत खूबसूरत है।

10/29/2022

तृतीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव - छत्तीसगढ़ 3rd National Tribal Dance Festival - Chhattisgarh 2022

 


आयोजन तिथि : 1 नवंबर, 2022 - 3 नवंबर, 2022

आयोजन स्थल : रायपुर (साइंस कॉलेज मैदान)

प्रतिभागी : सभी भारतीय राज्य समेत 10 देशों के 1500 आदिवासी कलाकार

प्रतिभागी देशों के नाम : मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रूस, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड, रवांडा और इजिप्ट

थीम : "फसल कटाई पर होने वाले आदिवासी नृत्य" और दूसरी थीम है "आदिवासी परम्पराएं और रीति- रिवाज"

पुरस्कार : प्रथम स्थान - 05 लाख रुपए, द्वितीय स्थान - 03 लाख रुपए और तृतीय स्थान - 02 लाख रुपए 

फसल कटाई की श्रेणी में 

  • प्रथम : छत्तीसगढ़ का करमा नृत्य 
  • द्वितीय : ओडिशा का ढेंगसा नृत्य 
  • तृतीय : हिमाचल प्रदेश का गद्दी नृत्य
  • इस श्रेणी में सांत्वना पुरस्कार असम को दिया गया।

विवाह संस्कार एवं अन्य श्रेणी में
  • प्रथम : सिक्किम का तमांग सेलो या डम्पू नाच
  • द्वितीय : ओडिशा
  • तृतीय : झारखंड का दमकच नृत्य



झारखंड के आदिवासी (जनजाति) के द्वारा मनाये जाने वाले प्रमुख पर्व ( त्यौहार ) Major festivals celebrated by Adivasi (Tribes) of Jharkhand


झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है जहां की संस्कृति में जनजाति त्यौहारो का अपना एक अलग स्थान है। झारखंड में निवास करने वाले विभिन्न जनजाति के लोग अपने देवी-देवता व संस्कृति के लिए विभिन्न प्रकार के पर्व मानते है। ऐसे ही कुछ विशेष पर्व निम्न है जिंन्हे सिर्फ झारखंड ही नही, बल्कि छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मध्यप्रदेश एवं पश्चिम बंगाल के भी आदिवासी मानते है।


संथाल जनजाति के त्यौहार - 

  • बा-परब : चैत (चैत्र) महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसे संथालों का बसंतोत्सव भी कहते है।
  • एरोक पर्व : यह कृषि से संबंधित है। आषाढ़ महीने में बीज बोये जाने के समय मनाया जाता है।
  • हरियाड़ : यह भी कृषि संबंधीत है। सावन महीने में धान में हरियाली आने पर अच्छी फसल के लिए।
  • सोहराय : कार्तिक अमावस्या को पशुओं (गाय एवं बैल) के सम्मान में मनाया जाता है।
  • साकरात : पूस महीने में अपने घर-परिवार की कुशलता के लिए मनाया जाता है।
  • भागसिम : माघ महीने में गाँव के ओहदेदार को आगामी वर्ष के लिए ओहदे की स्वीकृति के लिये 
  • बाहा : फागुन महीने में शुद्ध जल से खेली जाने वाली होली है यह।

उरांव जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • खद्दी पर्व : चैत महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इसे उराँवों का बसंतोत्सव कहते है।
  • जतरा : जेठ, अगहन व कार्तिक महीने में भगवान धर्मेश के सम्मान में मनाया जाता है।
  • करमा : भादो महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह करमा गोसाईं को समर्पित है।
  • सोहराय : कार्तिक अमावस्या को पशुओं (गाय एवं बैल) के सम्मान में मनाया जाता है।
  • माघे पर्व : माघ महीने में 
  • फागु पर्व : फागुन महीने में मनाया जाता है। यह होली के समतुल्य पर्व है।
  • सरहुल : साल वृक्ष में फूल आने पर चैत्र माह में मनाया जाता है।
मुंडा जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सरहुल : साल वृक्ष में फूल आने पर चैत्र माह में मनाया जाता है।
  • करमा : भादो महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। करमा गोसाईं को समर्पित है।
  • सोहराय : कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। पशुओं के सम्मान में मनाया जाने वाला पर्व है।
  • बुरु पर्व : अगहन महीने में मनाया जाता है। यह पर्वत देवता को समर्पित है। 
  • माघे पर्व : माघ महीने में मनाया जाता है।
  • फागु पर्व : फागुन महीने में मनाया जाता है। यह होली के समतुल्य पर्व है।

हो जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • उमुरी, होरो, जोमनना, कोलोम, माघी एवं बाहा।
  • माघी में माघी राग गीत गाया जाता है। यह पूजा 5 दिनों तक चलती ही।

खरवार जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • करमा, नवाखानी, महावीरी झण्डा, दशहरा, दीवाली, छठ एवं होली।

खड़िया जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • जंकोर : खड़ियाओं का बसंतोत्सव कहा जाता है।
  • बन्दई : कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है।
  • करमा, बिइना (बाऊ बिड्बिड्), कदलेटा, जोओडेम (नवाखानी), रथ-यात्रा, दिमतङ पूजा (गोशाला पूजा), गिडिड पूजा/ बोडोलेरड पूजा, पोनोमोसोर पूजा, पितरु पूजा, भडन्दा पूजा / बड़ पहाड़ी पूजा एवं डुबोओ पूजा।

भूमिज जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • चैत पूजा, धुला पूजा, ग्राम ठाकुर पूजा, काली पूजा, गोराई ठाकुर पूजा एवं करम पूजा।

मछली जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सूरजी देवी पूजा, मनसा पूजा, छठ पूजा, दुर्गा पूजा, दीवाली, संक्रांति (टुसू) एवं होली।

माल पहाड़िया बीचो के त्यौहार -
  • गांगी आड़या : भादो महीने में, नई फसल कटने पर।
  • ओसरो आड़या/घंघरा पूजा : कार्तिक महीने में, घंघरा फसल कटने पर।
  • पुनु आड़या : पूस महीने में, बाजरा फसल कटने पर।
  • माघी पूजा एवं आड़या।

गोंड जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • फरसा पेन, मतिया, बूढ़देव पूजा आदि।

लोहार जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • विश्वकर्मा पूजा, सोहराय, दीपावली, छठ, फगुआ आदि ।

किसान जनजाति के प्रमुख त्यौहार - 
  • सरहुल, करमा, नवाखानी, सोहराय काली पूजा, माघे एवं फगुआ।

बंजारा जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • बंजारा देवी की पूजा आदि ।

बिंझिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सरहुल, करमा, सोहराय विंध्यवासिनी देवी, जगन्नाथ पूजा (रथ-यात्रा), चरदी देवी, ग्राम श्री, दशहरा, दीवाली, होली आदि ।

बेदिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सरहुल, करमा, सोहराय दशहरा, दीवाली, छठ एवं मकर स्नान।

कंवर जनजाति के प्रमुख त्योहार -
  • खूँट पूजा : आषाढ़ में मनाया जाता है।

कोल जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सिंगबोंगा पूजा, बजरंग बली पूजा, दुर्गा पूजा, काली पूजा आदि ।

चेरो जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • दुर्गा पूजा, काली पूजा, छठ, सोहराय, होली, कादोलेटा आदि ।

चीक बड़ाईक जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • बड़ पहाड़ी, सूर्याही पूजा, देवी माय, सरहुल, सोहराय जितिया, करमा आदि।

सौरिया जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • बीचे आड़या, पुनु आड़या, कर्रा पूजा एवं सलियानी पूजा।
  • गांगि आड़या : भादो माह में मनाया जाता है।
  • ओसरा आड़या : कार्तिक में मनाया जाता है, इसमें पूर्वजो को याद किया जाता है।

करमाली जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सरहुल, करमा, सोहराय, नवाखानी, दुर्गा पूजा, दीवाली, छठ, होली आदि ।
  • टुसु : इसे "मीठा परब" या "बड़का परब" कहते है।

कोरा जनजाति के प्रमुख त्यौहार -
  • सवा लाख की पूजा : एक लाख पच्चीस हजार देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। 
  • बागेश्वर, भगवती दाय, काली माय, नवाखानी, सोहराय आदि पर्व मनाये जाते है।


नोट :  देशाउली और जनी शिकार को 12 वर्ष में एक बार मनाया जाने वाला त्योहार है। 


10/27/2022

सोहराय पर्व ( तिहार ) - आदिवासियों का पाँच दिवसीय पर्व - Sohrai Festival



सोहराय पर्व भारत में जनजाति (आदिवासियों) के द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिसा ओड़िशा आदि के जनजातियों के द्वारा मनाया जाता है। 

यह मुख्य रूप से संथालों का प्रमुख पर्व है जो धान फसल के तैयार होने पर मनाया जाता है। सोहराय पर्व दीवाली के दूसरे दिन से पाँच दिनों तक मनाया जाता है। जो इस प्रकार है :

  • प्रथम दिन 'नायके' गोड़टाँडी ( बथान) में एकत्रित होते हैं। "जोहरा ऐरा" की पूजा कर मुर्गे की बलि दी जाती है। चावल - महुआ निर्मित 'हड़िया' चढ़ाया जाता है एवं माँझी के आदेश से उपस्थित जन समुदाय नाच-गान करते हैं। 
  • द्वितीय दिन 'गोहाल पूजा' होता है।
  • तीसरे दिन 'सुटाउ' होता है। जिसमें बैलों को सजाकर मध्य में बाँधकर उसके आस-पास मंदर के थाप पर नाच-गान किया जाता हैं। 
  • चौथे दिन 'जाले' में अपने-अपने घरों से खाद्यान्न लाकर एकत्रित करते हैं। सामूहिक भोज की तैयारी होती है। यह सब मोद - मंगल, नाच-गान माँझी की देखरेख में होता है। 
  • पांचवें दिन इस दिन 'हांकु काटकम' मनाया जाता है। लोग अपने खेतों की नई फसल ला कर, उसकी खिचड़ी बनाते हैं, जिसे गाय और बैलों को पहले खिलाया जाता है।


सोहराय के बाद 'साकरात' आता है जिसमें समूह में शिकारमाही होती है। शिकार में किये पशु-पक्षियों के माँस को 'मरांग बुरू' को समर्पित सहभोज होता है।


पर्व के पीछे की कहानी :

इस पर्व को मनाने के पीछे प्रचलित कथा के अनुसार, जब मंचपुरी (मृत्यु लोक) में मानवों की उत्पत्ति होने लगी, तो बच्चों के लिए दूध की जरूरत महसूस हुई। चूंकि उस काल खंड में पशुओं का सृजन स्वर्ग लोक में होता था। इस वजह से मानव जाति ने आदिवासियों के साबसे प्रभावशाली देवता मरांगबुरू से इसकी मांग की।

आदिवासियों के मांग पर मरांगबुरू स्वर्ग पहुंचे और अयनी, बयनी, सुगी, सावली, करी, कपिल आदि गाएं एवं सिरे रे वरदा बैल से मृत्यु लोक में चलने का आग्रह करते हैं। परंतु दिव्य जानवरो ने मंचपुरी आने से मना कर दिया, तब मरांगबुरू उन्हें कहते हैं कि मंचपुरी में मानव युगोंं-युगोंं तक तुम्हारी पूजा करेगा। तब स्वर्गलोक के वे दिव्य पशु मंचपुरी आने के लिए तैयार हुए हैं और उनके आगमन पर उनके प्रति आभार प्रकट करने के लिए इस त्यौहार का प्रचलन प्रारंभ होता है। 






राजस्थान के प्रमुख पर्वत चोंटयां, पठार एवं दर्रो के नाम - Rajsthan Ke Pramukh Parvat chotiyon ke naam

प्रतीकात्मक तस्वीर


राजस्थान के प्रमुख पर्वत चोटी एवं उनसे संबंधित प्रमुख तथ्य निम्नानुसार है।

  1. गुरु शिखर : राजस्थान में सिरोही जिले में स्थित अरबुडा पर्वत की चोटी है जो अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यह राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई लगभग 1,722 मीटर है। इस चोटी का नाम भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय के नाम पर रखा गया है।
  2. सेर : यह भी अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यह राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 1597 मीटर  है।
  3. दिलवाड़ा (सिरोही) 1442 मीटर 
  4. जरगा  (उदयपुर) 1431 मीटर 
  5. अचलगढ़ (सिरोही) 1380 मीटर 
  6. कुम्भलगढ़ (राजसमन्द) 1224 मीटर 
  7. धौलिया डूंगर (उदयपुर) 1183 मीटर 
  8. जेलिया दूगर (उदयपुर) 1166 मीटर
  9. रघुनाथगढ़ (सीकर) 1055 मीटर 
  10. जयराज पहाड़ी (सिरोही) 1090 मीटर
  11. समवारिया चोटी (सिरोही) 1034 मीटर
  12. ऋषिकेश (सिरोही) 1017 मीटर
  13. अवार चोटी (उदयपुर) 1001 मीटर
  14. कमलनाथ (सीकर) 1001 मीटर 
  15. सूंडा पर्वत (जालौर) 991 मीटर
  16. कामन मगरा (उदयपुर) 989 मीटर 
  17. हरवा चोटी (उदयपुर) 989 मीटर
  18. दुसानिया (उदयपुर) 957 मीटर
  19. सज्जनगढ़ (उदयपुर) 938 मीटर
  20. मानगाँव पहाड़ी (सिरोही) 923 मीटर
  21. सीरार पहाड़ी (उदयपुर) 920 मीटर
  22. खो (जयपुर) 920 मीटर 
  23. तारागढ़ (अजमेर) 873 मीटर 
  24. तारागढ़ (अजमेर) 870 मीटर
  25. नागफणी (उदयपुर) 867 मीटर
  26. बांकीका मगरा (उदयपुर) 849 मीटर
  27. बाबई (जयपुर) 792 मीटर 
  28. बैराठ (अलवर) 704 मीटर

अरावली पर्वतमाला राजस्थान की साबसे विस्तृत पर्वत श्रृंखला है। यह भारत की भौगोलिक संरचना में सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है जिसकी कुल लंबाई 692 किलोमीटर है। अरावली की राजस्थान में कुल लंबाई 550 किलोमीटर है, जो राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का 9% है। यह भारत में 3 राज्यो, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के साथ ही पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में स्थित है। इसे 3 भागो में बांटा गया है, दक्षिण, मध्य एवं उत्तर अरावली।


दक्षिण अरावली की प्रमुख पर्वत चोटियां निम्न है :
  • गुरु शिखर (सिरोही) 1722 मी. 
  • सेर (सिरोही) 1597 मी.
  • दिलवाड़ा (सिरोही) 1442 मी.
  • जरगा (उदयपुर) 1431 मी.
  • अचलगढ़ (सिरोही) 1380 मी.
  • कुम्भलगढ़ (राजसमंद) 1224 मी.
  • धौलिया डूंगर (उदयपुर) 1183 मी. 
  • जेलिया दूगर (उदयपुर) 1166 मी.
  • जयराज पहाड़ी (सिरोही) 1090 मी.
  • समवारिया चोटी (सिरोही) 1034 मी.
  • ऋषिकेश (सिरोही) 1017 मी.
  • अवार चोटी (उदयपुर) 1001 मी.
  • सूंडा पर्वत (जालौर) 991 मी.
  • कामन मगरा (उदयपुर) 989 मी.
  • हरवा चोटी (उदयपुर) 989 मी.
  • दुसानिया (उदयपुर) 957 मी.
  • सज्जनगढ़ (उदयपुर) 938 मी.
  • मानगाँव पहाड़ी (सिरोही) 923 मी.
  • सीरार पहाड़ी (उदयपुर) 920 मी.
  • नागफणी (उदयपुर) 867 मी.
  • बांकीका मगरा (उदयपुर) 849 मी.


उत्तरी अरावली की प्रमुख चोटियाँ :
  • रघुनाथगढ़ (सीकर) 1055 मी.
  • मालखेत पहाड़ी (सीकर) 1052 मी.
  • लोहार्गल (झुंझुनू ) 1051 मी
  • कमलनाथ (सीकर) 1001 मी.
  • भोजगढ़ (झुंझुनू ) 997 मी.
  • खो (जयपुर) 920 मी.
  • अधवाड़ा पर्वत (शंशन) 840 मी.
  • हर्षनाथ (सीकर) 820 मी.
  • भैराज (अलवर) 792 मी.
  • बरवाड़ा (जयपुर) 786 मी.
  • बाबाई (जयपुर) 780 मी.
  • मनोहरपुरा (जयपुर) 747 मी.
  • बैराठ (जयपुर) 677 मी.
  • काकवाड़ी सरिस्का (अलवर) 649 मी.
  • भानगढ़ (अलवर) 704 मी.
  • जयगढ़ (जयपुर) 648 मी.
  • नाहरगढ़ (जयपुर) 599 मी.
  • दमदम (भरतपुर) 370 मी.


मध्य अरावली की चोटियाँ:
  • मारायजी/गोरमजी (टॉडगढ़, अजमेर) 933 मी.
  • तारागढ़ (अजमेर) 870 मी.
  • नागपहाड़ (अजमेर) 795 मी.


राजस्थान के प्रमुख दर्रे

मध्य अरावली के दरें:
  • देबारी दर्रा : यह ब्यावर को भीलवाड़ा से जोड़ता है।
  • बरं दर्रा : इससे अजमेर मारवाड़ जंक्शन-आबू रोड रेलमार्ग गुजरता है।
  • परवेरिया दरीः ब्यावर को मसूदा से जोड़ता है 
  • शिवपुर घाट : ब्यावर से विजयनगर को जोड़ता है।
  • सूराघाट वरी: अजमेर जिले को भीलवाड़ा से जोड़ता है।

दक्षिणी अरावली के दर्रे
  • फुलवारी की नाल  (उदयपुर) : मानसी एवं वाकल नदियों का उद्गम
  • हाथी नाल : उदयपुर
  • केवड़ा नाल : उदयपुर
  • हाथीगुड़ा की नाल : कुम्भलगढ़
  • देसुरी की नाल (राजसमंद) : सुकड़ी नदी का उद्गम पाली से हुआ है।
  • जीलवाड़ा की नाल : मेवाड़ के दक्षिण में
  • सोमेश्वर वर्ग : देसूरी (पाली) 
  • गोरमघाट वर्ग : राजसमंद
  • कमलीघाट दर्रा : राजसमंद

राजस्थान के प्रमुख पठार 
  • उड़िया का पठार (सिरोही): यह राज्य का सबसे ऊँचा। इसकी कुल ऊंचाई लगभग 1360 मीटर है।
  • आबू का पठार (सिरोही) : यह राज्य का दूसरा सबसे ऊँचा। इसकी कुल ऊँचाई लगभग 1200 मीटर है।
  • भोराट का पठार (उदयपुर) :  यह राज्य का तीसरा सबसे ऊँचा पठार है, जो कुंभलगढ व गोगुंदा के मध्य है।
  • ऊपरमाल का पठार : भैंसरोड़गढ (चित्तौड़) व बिजौलिया (भीलवाड़ा) के मध्य मानदेसरा का पठारः चित्तौड़गढ़
  • देशहरो का पठारः जरगा व रागा पहाड़ियों के बीच
  • क्रास का पठारः दक्षिणी पश्चिमी मेवाड़ क्षेत्र में
  • कांकणबारी का पठार (अलवर) : सरिस्का अभयारण्य
  • लसाड़िया का पठार : उदयपुर
  • मेसा का पठार : चित्तौड़गढ़





10/22/2022

कुडुख भाषा की पहली फ़िल्म - First kurukh Film

 


छत्तीसगढ़ में जशपुर की महिला शिक्षिका के द्वारा कुडुख भाषा की पहली फ़िल्म का निर्देशन किया गया है। फ़िल्म का नाम कुडुख भाषा में 'जहन जिनगी गही' है। इसका हिंदी भाषा में 'जहर जिंदगी का' है। इस फ़िल्म को 21 अक्टूबर, 2022 को छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में रिलीज किया गया। फ़िल्म के जरिये समाज में महिलाओं की व्यथा को दिखाने का प्रयास किया गया है।


कुडुख भाषा के बारे में सामान्य जानकारी :
कुडुख द्रविड़ भाषा परिवार का हिस्सा है। इसका इस्तेमाल छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और त्रिपुरा के लाखो उरांव एवं किसान जनजाति के लोगो के द्वारा किया जाता है। इसका प्रभाव उत्तरी छत्तीसगढ़ी में है।

कुडुख को यूनेस्को की लुप्तप्राय भाषाओं की सूची में रखा गया है, जहां इसकी स्थिति 'कमजोर' है। 








10/14/2022

गूगल पर छत्तीसगढ़ के बारे पूछे जाने वाले प्रमुख सवाल और उनके जवाब



इस पोस्ट में उन प्रश्नों को जोड़ा गया है जिंन्हे गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाता है। इस पोस्ट में उन प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया गया है।


सवाल : छत्तीसगढ़ में कितने जिले है ?

जवाब : सितंबर 2022 तक छत्तीसगढ़ में 31 जिले है।


सवाल : छत्तीसगढ़ की स्थापना कब हुई थी?

जवाब : छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर, 2000 को हुआ।


सवाल : छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम क्या है ?

जवाब : दक्षिण कोशल, पौराणिक काल में "कोशल" प्रदेश था जो "उत्तर कोशल" और "दक्षिण कोशल" नाम से दो भागों में विभक्त हो गया था। वर्तमान का छत्तीसगढ़ "दक्षिण कोशल" था।


सवाल : छत्तीसगढ़ का राज्य गीत किसने लिखा है?

जवाब : छत्तीसगढ़ का राज्य गीत डॉ नरेंद्र देव वर्मा ने लिखा है।


सवाल : छत्तीसगढ़ का राज्य गीत कौन सा है?

जवाब : "अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार" यह राज्य का राज्य गीत है।


सवाल : छत्तीसगढ़ की राजकीय भाषा क्या है?

जवाब : छत्तीसगढ़ का राजकीय भाषा "छत्तीसगढ़ी" है।


सवाल : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले कितने है?

जवाब : 14 जिले नक्सल प्रभावित है।


सवाल : छत्तीसगढ़ की प्रमुख जनजातियां कौन कौन सी है ?

जवाब : गोंड़, उरांव, हल्बा प्रमुख जनजाति है।


सवाल : छत्तीसगढ़ के प्रमुख फसलों के नाम ?

जवाब : धान, मक्का, गेहूं और अरहर प्रमुख फसले है।


सवाल : छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा जलप्रपात कौन सा है ?

जवाब : सबसे ऊंचा जलप्रपात तीरथगढ़ को माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में नम्बि और मकरभंजा जैसे जलप्रपात भी सामने आए है।


10/12/2022

नोबेल पुरस्कार 2022 के विजेताओं की सूची - Nobel Prize List


प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय पुरस्कार नोबेल के विजेताओं की घोषणा 3 अक्टूबर, 2022 से 10 अक्टूबर 2011 के मध्य की गई। नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की वर्ष 1895 की वसीयत के अनुसार 5 अलग-अलग पुरस्कार हैं, परंतु वर्तमान में नोबेल पुरस्कार 6 क्षेत्रो  शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में प्रदान की जाती है। इसमें से साहित्य का नोबेल दी स्वीडिश एकेडमी के द्वारा प्रदान की जाती है। इसकी भी अपनी नोबेल कमिटी फॉर लिटरेचर है।


विजेजाओं की सूची

फिजियोलॉजी और मेडिसिन :

स्वीडिश आनुवंशिकीविद्प्रो फेसर स्वंते पाबो (Svante Pääbo) को प्रदान किया गया। इन्होने विलुप्त होमिनी और मानव विकास में जीनोम सम्बंधित खोज की है तथा निएंडरथल के जीनोम की सिक्वेंसिंग की है।


रसायन विज्ञान :

कैरोलिन बर्टोज़ी, मोर्टन मेल्डल और बैरी शार्पलेस को प्रदान किया गया। इन्हें क्लिक केमिस्ट्री और बायो-ऑर्थोगोनल केमिस्ट्री विकास के लिए पुरष्कृत किया गया।


भौतिक विज्ञान :

एलेन आसपेक्ट, जॉन क्लॉसर और एंटन जिलिंगर को प्रदान किया गया। इनके द्वारा प्रयोग किये गए क्वांटम यांत्रिकी के वजह से, कंप्यूटिंग और क्रिप्टोग्राफी में तेजी से विकसित नए एप्लिकेशन के लिए आधार तैयार किया है।


साहित्य :

फ्रांसीसी साहित्यकार एनी एरनॉक्स (Annie Ernaux) को प्रदान किया गया। इनके द्वारा लिखित प्रमुख लेख निम्न है जर्नल डू डेहोर्स (1993), एक्सटीरियर्स (1996), या ला वी एक्सटीरियर (1993-1999), थिंग्स सीन (2010) आदि।


शांति :

एलेस बियालियात्स्की, रूसी मानवाधिकार संगठन मेमोरियल (रूस) और मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज (यूक्रेन) को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।


अर्थशास्त्र :

बेन एस बर्नानके, डगलस डब्ल्यू डायमंड और फिलिप एच डायबविगो को प्रदान किया गया। उन्हें बैंक और फाइनेंशियल क्राइसिस पर रिसर्च के लिए पुरष्कृत किया गया।