1/29/2023

बिहार में लड़े गए प्रमुख युद्ध :Major battles fought in Bihar



भारत में बिहार राज्य शक्ति का केंद्र रहा है और यहां कुछ प्रमुख युद्ध हुए है जिन्होंने भारतीय इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन युद्धों के परिणामों ने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी है। 

बिहार में लड़े गए प्रमुख युद्ध (Major battles fought in Bihar):

  • ईसा पूर्व 487 में, जब अजातशत्रु के राज्य की राजधानी राजगीर थी, अजातशत्रु और लिच्छवीराज के बीच युद्ध हुआ था जिसमें अजातशत्रु विजय हुआ था। इस युद्ध का समर क्षेत्र पाटलिपुत्र का किला था।
  • ईसा पूर्व 323 में चंद्रगुप्त मौर्य और नंद वंश के आखिरी राजा घनानंद के मध्य पाटलिपुत्र में युद्ध हुआ था, जिसमें चंद्रगुप्त मौर्य विजय हुआ। और भारत में मौर्य वंश की सुरुआत हुई।
  • शुंग वंश का शासन समाप्त होने पर पहली शताब्दी में कनिष्क ने उस काल के प्रकांड विद्वान अशोक घोष को अपने साथ अपनी राजधानी पेशावर ले जाने के लिए पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। किसी विद्वान के लिए संभवत: संपूर्ण विश्व में अब तक यह एकमात्र युद्ध लड़ा गया था।
  • वर्ष 514 में प्रसिद्ध हूण शासक ने मिहरीकुल ने बालदित्य (नरसिंह गुप्त) के शासनकाल मगध पर आक्रमण किया था। वर्ष 514 में नरसिंह गुप्त के वंशज तथा गॉड (बंगाल) के राजा शशांक के मध्य मगध क्षेत्र में युद्ध हुआ था, जिसमें शशांक विजय हुआ था।
  • घाघरा की लड़ाई : वर्ष 1526 में पानीपत और वर्ष 1527 में खानवा के युद्ध के बाद 6 मई, 1529 को लड़ी गई घाघरा की लड़ाई (Battle of Ghaghra) मुगल साम्राज्य के लिए एक प्रमुख युद्ध था। यह युद्ध बाबर की सेना और सुल्तान महमूद लोदी के अधीन पूर्वी अफगान संघ एवं सुल्तान के अधीन बंगाल की सल्तनत के बीच हुआ था जिसमे बाबर की जीत हुई।
  • चौसा का युद्ध : वर्ष 1539 में शेरशाह का और हुमायूं के मध्य बक्सर के निकट चौसा में युद्ध हुआ था, जिसमें शेरशाह विजय हुआ था।
  • बक्सर का युद्ध : वर्ष 1764 बक्सर में बंगाल के नवाब मीर कासिम, दिल्ली के बादशाह शाह आलम द्वितीय तथा अवध के नवाब शुजाउदौला, कि संयुक्त सेना से अंग्रेजों का युद्ध हुआ था, जिसमें सर हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में अंग्रेज विजय हुए थे।

1/26/2023

क्या ChatGPT भरोसेमंद है ?



ChatGPT OpenAI द्वारा विकसित एक बड़ा भाषा मॉडल (Big Data Model) है। यह एक प्रकार का मशीन लर्निंग मॉडल है जिसे मानव जैसा पाठ उत्पन्न करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। यह GPT (Generative Pre-training Transformer) आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो किसी विशिष्ट कार्य पर इसे ठीक करने से पहले पाठ डेटा के एक बड़े कोष पर एक मॉडल को पूर्व-प्रशिक्षित करने के लिए अप्रशिक्षित शिक्षण का उपयोग करता है।
इसका उपयोग अधिक रचनात्मक कार्यों जैसे कविता लिखने या संगीत रचना के लिए भी किया जा सकता है। इसे इंटरनेट और अन्य स्रोतों से बड़ी मात्रा में पाठ डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे यह मानव-समान पाठ उत्पन्न करने की अनुमति देता है जो अक्सर मानव द्वारा लिखे गए पाठ से अलग करना कठिन होता है। जिस वजह से इस पर 100% भरोसा नहीं किया जा सकता।

5 कारण जिनके वजह से ChatGPT पर भरोसा नहीं किया जा सकता :

  1. सीमित ज्ञान: चूंकि ChatGPT एक भाषा मॉडल के रूप में, यह केवल उस डेटा के आधार पर जानकारी प्रदान करने में सक्षम है जिस पर उसे प्रशिक्षित किया गया है। इसका मतलब है कि इसके पास कुछ विषयों के ऊपर व्यापक जानकारी उपलब्ध नहीं है। क्यों कि ChatGPT का प्रदर्शन उस डेटा पर आधारित है जिस पर इसे प्रशिक्षित किया गया है, और हो सकता है कि यह कुछ प्रश्नों का सटीक उत्तर देने में सक्षम न हो या कुछ विषयों पर पाठ उत्पन्न न कर पाए जो प्रशिक्षण डेटा में प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
  2. संदर्भ का अभाव: किसी प्रश्न के उत्तर के लिए ChatGPT के पास संदर्भो की कमी हो सकती है, जिसके कारण गलत या अप्रासंगिक उत्तर मिल सकते हैं।
  3. तर्क करने की सीमित क्षमता: चैटजीपीटी में तर्क करने या तार्किक अनुमान लगाने की क्षमता नहीं है, जो जटिल सवालों के जवाब देने की क्षमता को सीमित कर सकता है।
  4. मुहावरेदार भाव या बोलचाल की भाषा को समझने में कठिनाई: ChatGPT को मुहावरेदार भाव या बोलचाल की भाषा को समझने में कठिनाई हो सकती है, जिससे प्रश्न में भ्रम या गलत व्याख्या कर सकता है।
  5. भावना समझने की क्षमता: चैटजीपीटी में भावनाओं या किसी प्रश्न के पीछे के इरादे को समझने की क्षमता नहीं है, यह केवल भाषा और शब्दों पर आधारित उत्तर देगा, जिससे सहानुभूति की कमी या उपयोगकर्ता की जरूरतों को समझने की कमी हो सकती है।

ChatGPT में लगातार सुधार किया जा रहा है, इसलिए समय के साथ इसकी क्षमताओं में सुधार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, इन सीमाओं को दूर करने में सहायता के लिए प्रश्न उत्तर प्रणाली जैसे अन्य AI उपकरण विकसित किए जा रहे हैं। जिससे भविष्य में इसकी क्षमताओं में वृद्धि होगी।

2023 में सरकारी नौकरी, IAS या CGPSC की तैयारी कैसे करें ?



यदि आप 2023 में सरकारी नौकरी, IAS या CGPSC की तैयारी करने के बारे में सोच रहे है तो ध्यान रखे कि परीक्षा की तैयारी के लिए एक समर्पित और व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। IAS, PSC या vyapam परीक्षा की तैयारी के लिए आप जो कुछ कदम उठा सकते हैं उनमें शामिल हैं:

  1. परीक्षा पैटर्न और सिलेबस से खुद को परिचित करें: यह सबसे महत्वपूर्ण भाग है। परीक्षा के प्रारूप और कवर किए जाने वाले विषयों को समझें। यूपीएससी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर आईएएस परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम जारी करता है।
  2. एक स्टडी शेड्यूल बनाएं: एक ऐसा शेड्यूल बनाएं जो आपको सभी महत्वपूर्ण विषयों और विषयों को कवर करने की अनुमति देता है। संशोधन और अभ्यास के लिए समय शामिल करना सुनिश्चित करें।
  3. समाचार पत्र और करेंट अफेयर्स पढ़ें: समसामयिक घटनाओं से अपडेट रहें, क्योंकि करेंट अफेयर्स पर प्रश्न आईएएस परीक्षा का एक सामान्य हिस्सा हैं।
  4. सही अध्ययन सामग्री प्राप्त करें: तैयार करने में आपकी मदद करने के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री जैसे किताबें, नोट्स और प्रश्न पत्र का उपयोग करें।
  5. एक कोचिंग संस्थान में शामिल हों: एक कोचिंग संस्थान में शामिल होने से आपको परीक्षा की तैयारी के लिए मार्गदर्शन और सहायता मिल सकती है।
  6. मजबूत समस्या समाधान कौशल विकसित करें: आईएएस परीक्षा के लिए मजबूत समस्या समाधान कौशल और महत्वपूर्ण सोच की आवश्यकता होती है।
  7. अपना समय प्रबंधित करें: किसी भी परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन आवश्यक है। समय प्रबंधन रणनीतियों का अभ्यास करें और परीक्षा के दौरान खुद को गति देना सुनिश्चित करें।
  8. मॉक टेस्ट लें: मॉक टेस्ट के साथ अभ्यास करें ताकि आपको परीक्षा के प्रारूप से परिचित होने और अपनी ताकत और कमजोरियों की पहचान करने में मदद मिल सके।
  9. स्वस्थ रहें: अच्छा खाना, व्यायाम और पर्याप्त नींद लेकर स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें।
  10. इंटरव्यू की तैयारी करें: इंटरव्यू IAS और CGPSC परीक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसकी तैयारी भी सुनिश्चित कर लें।


याद रखें, किसी भी परीक्षा की तैयारी में समय और मेहनत लगती है, लेकिन लगन और कड़ी मेहनत से आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

1/21/2023

BharOS - भारत का अपना ऑपरेटिंग सिस्टम


लंबे समय से चल रही देशी ऑपरेटिंग सिस्टम की मांग को देखते हुए 19 जनवरी, 2023 को IIT मद्रास ने मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्मट BharOS ( Bharat Operating System) इंट्रोड्यूस किया है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यरूप से प्राइवेसी पर फोकस करता है, जिस वजह से इस पर कोई डिफॉल्ट ऐप भी नहीं होगा. आइए जानते हैं।


BharOS क्या है ?

BharOS एक AOSP (एंड्रॉइड ओपन सोर्स प्रोजेक्ट) आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसमें कोई Google ऐप्स या सेवाएं नहीं हैं। यह JandK ऑपरेशंस प्राइवेट लिमिटेड (JandKops) द्वारा विकसित किया गया है, जो IIT मद्रास में स्थापित एक गैर-लाभकारी संगठन है।


BharOS और Android में क्या अंतर है ?

BharOS और Google के Android OS के बीच प्रमुख अंतर यह है कि BharOS Google सेवाओं के साथ नहीं आएगा। यह एक बेअरबोन ऑपरेटिंग सिस्टम होगा, जिसमे उपयोगकर्ता अपनी मर्जी से ऐप इंस्टॉल कर सकता है। इसमें Google की किसी सेवा को उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।


BharOS में क्या खास है ?

इसमें यूजर्स को Native Over the Air (NOTA) अपडेट मिलेगा। BharOS केवल संगठन-विशिष्ट Private App Store Services (PASS) के माध्यम से ऐप्स डाऊनलोड करने की सुविधा भी देगा।

JandKops के निदेशक कार्तिक अय्यर ने कहा कि "NDA(No default Apps), PAS और NOTA के साथ, BharOS सुनिश्चित करता है कि भारतीय मोबाइल फोन भरोसेमंद हैं।"





1/08/2023

भारत में कितने टाईगर रिज़र्व है?Tiger reserve of India



भारत सरकार के द्वारा 19 अक्टूबर 2022 को की गई घोषणा के अनुसार भारत में कुल 54 टाइगर रिजर्व हैं। भारत का नवीनतम 54 वां टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य है। यह उत्तरप्रदेश का चौथा टाईगर रिज़र्व है। परंतु भारत में सबसे अधिक टाईगर रिज़र्व मध्यप्रदेश में है। मध्य प्रदेश में कुल मिलाकर 6 टाईगर रिज़र्व है। 

Tiger reserve of India :
  1. कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व (1973-74) उत्तराखंड
  2. बान्दीपुर टाइगर रिज़र्व(1973-74) कर्नाटक
  3. कान्हा टाइगर रिजर्व(1973-74) मध्यप्रदेश
  4. मानस टाइगर रिजर्व(1973-74) असम
  5. मेलघाट टाइगर रिजर्व(1973-74) महाराष्ट्र
  6. पलामू टाइगर रिजर्व(1973-74) झारखंड
  7. रणथंबोर टाइगर रिजर्व(1973-74) राजस्थान
  8. सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व(1973-74) उड़ीसा
  9. सुंदरबन टाइगर रिजर्व(1973-74) पश्चिम बंगाल
  10. पेरियार टाइगर रिजर्व(1978-79) केरल
  11. सरिस्का टाइगर रिजर्व(1978-79) राजस्थान
  12. बक्सा टाइगर रिजर्व(1982-83) पश्चिम बंगाल
  13. इन्द्रावती टाइगर रिजर्व(1982-83) छत्तीसगढ़
  14. नामदफा टाइगर रिजर्व(1982-83) अरूणाचल प्रदेश
  15. नागर्जुनासागर – श्रीशैलम टाइगर रिजर्व(1982-83) आंध्रप्रदेश
  16. दुधवा टाइगर रिजर्व(1987-88) उत्तर प्रदेश
  17. कलाकड मुंदनथरई टाइगर रिजर्व(1988-89) तमिलनाडु
  18. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व(1989-90) बिहार
  19. इंद्रा प्रियदर्शनी पेंच टाइगर रिजर्व(1992-93) मध्यप्रदेश
  20. टडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व(1993-94) महाराष्ट्र
  21. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व(1993-94) मध्यप्रदेश
  22. पन्ना टाइगर रिजर्व(1994-95) मध्यप्रदेश
  23. डम्पा टाइगर रिजर्व(1994-95) मिजोरम
  24. भद्रा टाइगर रिजर्व(1998-99) कर्नाटक
  25. पेंच टाइगर रिजर्व(1998-99) महाराष्ट्र
  26. पक्के टाइगर रिजर्व(1999-2000) अरूणाचल प्रदेश
  27. नामेरी टाइगर रिजर्व(1999-2000) असम
  28. सतपुरा टाइगर रिजर्व(1999-2000) मध्यप्रदेश
  29. अनामलाई टाइगर रिजर्व(2008-09) तमिलनाडु
  30. उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व(2008-09) छत्तीसगढ़
  31. सत्कोसिया टाइगर रिजर्व(2008-09) उड़ीसा
  32. काजीरंगा टाइगर रिजर्व(2008-09) असम
  33. अचानकमार टाइगर रिजर्व(2008-09) छत्तीसगढ़
  34. डांडेली या काली टाइगर रिजर्व(2008-09) कर्नाटक
  35. संजय दुबरी टाइगर रिजर्व(2008-09) मध्यप्रदेश
  36. मुदुमलाई टाइगर रिजर्व(2008-09) तमिलनाडु
  37. नागरहोल टाइगर रिजर्व(2008-09) कर्नाटक
  38. पेरम्बीकुलम टाइगर रिजर्व(2008-09) केरल
  39. सह्याद्री टाइगर रिजर्व(2009-10) महाराष्ट्र
  40. बिलिगिरि रंगनाथ टाइगर रिजर्व(2010-11) कर्नाटक
  41. कावल टाइगर रिजर्व(2012-13) तेलंगाना
  42. सत्मंगलम टाइगर रिजर्व(2013-14) तमिलनाडु
  43. मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व(2013-14) राजस्थान
  44. नावेगॉंव नगजीरा टाइगर रिजर्व(2013-14) महाराष्ट्र
  45. अमराबाद टाइगर रिजर्व(2014) तेलंगाना
  46. पीलीभीत टाइगर रिजर्व(2014) उत्तर प्रदेश
  47. बोर टाइगर रिजर्व(2014) महाराष्ट्र
  48. राजाजी टाइगर रिजर्व(2015) उत्तराखंड
  49. ओरांग टाइगर रिजर्व(2016) असम
  50. कमलांग टाइगर रिजर्व(2016) अरूणाचल प्रदेश
  51. श्री विल्लिपुथुर मेघामलाई टाइगर रिजर्व (2021) 
  52. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व (2021) राजस्थान
  53. गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व (2021) छत्तीसगढ़
  54. रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य(2022) उत्तरप्रदेश


1/05/2023

राजा शिव प्रसाद 'सितार-ए-हिन्द' Raja Śivaprasāda or Shivaprasad



राजा शिव प्रसाद का जन्म 3 फरवरी, 1823 में वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। ग्यारह वर्ष की आयु में उनके पिता गोपीचंद की मृत्यु हो गई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनकी दादी बीबी रतन कौर से हुई। शिवप्रसाद का जन्म एक परमार क्षत्रिय परिवार में हुआ था उन्होंने बाद में जैन धर्म अपना लिया था।

वे प्रारंभिक हिन्दी गद्य साहित्य के निर्माता थे। 19वीं शताब्दी में भारत के कोर्ट कचहरी (प्रशासन) में उर्दू बोली और फ़ारसी लिपि का बोलबाला था और दूसरी तरफ अंग्रेज शासन अपनी अंग्रेजी भाषा को सुव्यवस्थित उसे प्रशासनिक भाषा के रूप में लागू कराने में लगी थी, ऐसे समय में राजा शिव प्रसाद ने आप बोलचाल की भाषा को लिपिबद्ध करने का प्रयास किया। उन्होंने खड़ी बोली और नागरी लिपि का समर्थन किया।


राजा और सितार-ए-हिन्द की उपाधि :

मई 1870 में ब्रिटिश सरकार ने भारत के सबसे ऊंचे सितारे या "सितार-ए-हिंद" और उन्हें मार्च 1874 में  "राजा" की वंशानुगत उपाधि से सम्मानित किया था। यह वंशानुगत उपाधि उनके परिवार को शाहजहां से मिली थी।


पत्रकारिता :

गोविन्द रघुनाथ धत्ते ने वर्ष 1845 में राजा शिव प्रसाद की मदद से ‘बनारस अख़बार’ निकाला था। इसे हिन्दी भाषी क्षेत्र का प्रथम समाचार पत्र माना जा सकता है। देवनागरी लिपि के प्रयोग के बावजूद इस अख़बार में बहुत ज्यादा अरबी और फ़ारसी भाषा के शब्दो का प्रयोग किया गया था। परंतु बनारस से ही वर्ष 1850 में तारा मोहन मैत्रेय के संपादन में ‘सुधाकर’ नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। यह बंगला एवं हिन्दी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होता था। भाषा की दृष्टि से समाचार पत्र 'सुधाकर' को हिन्दी प्रदेश का पहला पत्र कहा जा सकता है।


राजा शिव प्रसाद की रचनाएँ :

  1. वामा मनरंजन
  2. आतसियों का कोड़ा
  3. विद्यांकर
  4. राजा भोज का सपना
  5. आलसियों का कोड़ा
  6. वर्णमाला
  7. स्वयंबोध उर्दू
  8. वामा मनरंजन (1886 ई.)
  9. विद्यांकुर
  10. राजा भोज का सपना (1887 ई.)
  11. भूगोलहस्तामलक
  12. इतिहास तिमिर नाशक
  13. गुटका
  14. हिंदी व्याकरण
  15. हिन्दुस्तान के पुराने राजाओं का हाल
  16. मानवधर्मसार
  17. सिक्खों का उदय और अस्त
  18. योगवासिष्ठ के कुछ चुने ङुए शलोक
  19. उपनिषद्सार
  20. बैताल पच्चीसी
  21. सवानेह-उमरी (आत्मकथा)
  22. लिपि सम्बन्धी प्रतिवेदन (1868 ई.)
  23. कबीर टीका
  24. गीतगोविन्दादर्श
  25. बच्चों का इनाम
  26. लड़कों की कहानी


फ़ारसी लिपि के स्थान पर नागरी लिपि का प्रचार : 

फ़ारसी लिपि के स्थान पर नागरी लिपि और हिन्दी भाषा के लिए पहला प्रयास राजा शिव प्रसाद का 1868 ई. में उनके लिपि सम्बन्धी प्रतिवेदन 'मेमोरण्डम कोर्ट कैरेक्टर इन द अपर प्रोविन्स ऑफ़ इंडिया' से आरम्भ हुआ था।

राजा शिवप्रसाद ने कोशिश की कि ज़बान उर्दू ही रहे और वो नागरी लिपि में लिखी जाए। उन्होंने कहा फ़ारसी की सभी ध्वनियाँ देवनागरी में व्यक्त होनी चाहिए। जब उन्हें पता चला कि फ़ारसी की पाँच ध्वनियाँ (क़, ख़, ग़, ज़, फ़) नागरी में नहीं हैं तो उन्होंने अक्षर के नीचे नुक़्ता लगाने का सुझाव दिया जिसके मा’नी हैं ‘बिंदु’, यदि आप अपना पेंसिल बॉल-पेन या स्याही की पेन आदि उठाते हैं, और उसे काग़ज़ के टुकड़े से स्पर्श करते हैं, तो काग़ज़ पर एक निशान बन जाता है जो आपके लिए एक नुक़्ते का तसव्वुर पेश करेगा। और इस प्रकार राजा शिवप्रसाद ने क ख ग ज फ पाँच अरबी-फारसी ध्वनियों के लिए चिह्नों के नीचे नुक्ता लगाने का रिवाज आरंभ किया।

  • क़ (ق) ~ हलक़ + जिह्वामूल
  • ख़ (خ) ~ हलक़ + जिह्वामूल
  • ग़ (غ) ~ हलक़ + जिह्वामूल
  • फ़ (ف) ~ दंतोष्ठ्य से

मृत्यु :
23 मई, 1895

12/31/2022

कंप्यूटर वायरस/मैलवेयर प्रश्नोत्तरी - Computer Malware Quiz



VYAPAM एवं PSC के लिए कंप्यूटर वायरस संबंधित प्रश्नोत्तरी:


1. निम्नलिखित में से कौन आपके कंप्यूटर को काम करना बंद करने की सबसे अधिक संभावना है?

A. ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


2. निम्नलिखित में से कौन एक स्टैंडअलोन प्रोग्राम नहीं है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर



3. निम्नलिखित में से कौन आपके कंप्यूटर से स्पैम ईमेल भेजने की सबसे अधिक संभावना है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


4. मानक एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर के साथ निम्न में से किसका पता लगने की संभावना कम है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


5. निम्नलिखित में से कौन अन्य मैलवेयर के साथ आने की सबसे अधिक संभावना है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


6. निम्नलिखित में से कौन पीयर-टू-पीयर फ़ाइल-शेयरिंग सॉफ़्टवेयर, काज़ा के साथ बंडल किया गया है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


7. निम्नलिखित में से किसके द्वारा "बैकडोर" इंटरनेट कनेक्शन स्थापित करने की सबसे अधिक संभावना है?

ए। ट्रोजन

बी। वॉर्म

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


8. निम्नलिखित में से कौन सेवा से इनकार करने वाले हमले में शामिल होने की सबसे अधिक संभावना है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


9. निम्नलिखित में से कौन सा एकमात्र मैलवेयर सार्वजनिक रूप से दस्तावेज किया गया है जिसे एफबीआई द्वारा एक संदिग्ध को मुकदमे में लाने के लिए नियोजित किया गया है?

ए। ट्रोजन

बी। बग

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर


10. निम्नलिखित में से कौन आपकी पहचान चुरा सकता है?

ए। ट्रोजन

बी। कीड़ा

सी। वाइरस

डी। स्पाइवेयर

इ। एडवेयर

12/28/2022

साहित्य अकादमी पुरस्कार 2022 प्राप्तकर्ताओं की सूची. : Sahitya Akademi Award 2022



भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल 22 भारतीय भाषाओं के अलावा ये राजस्थानी और अंग्रेज़ी भाषा सहित कुल 24 भाषाओं के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जाता है। इसे पहली बार वर्ष 1955 में दिए गया था। वर्ष 2009 से पुरस्कार की राशि के रूप में 1 लाख रुपये दिए जाते है।

हिंदी के लिए बद्रीनारायण (तुमड़ी के शब्द, कविता-संग्रह), अंग्रेजी के लिए अनुराधा रॉय (ऑल द लाइब्स वी नेवर लिव्ड,उपन्यास) को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया है।


वर्ष 2022 के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेताओं की सूची 

  1. असमिया - भूल सत्य (लघु कथाएँ) -   मनोज कुमार गोस्वामी
  2. बोडो - संश्रिनी मोदिरा (कविता) -  रश्मि चौधरी
  3. डोगरी - छे रूपक (नाटक) -  वीना गुप्ता
  4. अंग्रेज़ी - ऑल द लाइव्स वी नेवर लिव्ड (उपन्यास)अनुराधा राय
  5. गुजराती - घेर जतन (आत्मकथात्मक निबंध) - गुलाम मोहम्मद शेख
  6. हिंदी - तुमड़ी के शब्द, कविता-संग्रह - बद्री नारायण
  7. कन्नडा - बहुतवाद भारत मट्टु बुद्ध तात्विकते -  मुदनाकुडु चिन्नास्वामी
  8. कश्मीरी - जायल डाब (साहित्यिक आलोचना) - फारूक फैयाज
  9. कोंकणी - अमृतवेल (उपन्यास) - -  माया अनिल खरांगटे
  10. मैथिली - पेन-ड्राइव मी पृथ्वी (कविता) - अजीत आजाद
  11. मलयालम - आशांटे सीतायनम (साहित्यिक आलोचना)एम थॉमस मैथ्यू
  12. मणिपुरी - लेइरोननुंग (कविता) -  कोइजाम शांतिबाला
  13. मराठी - उजव्या सोंदेच्य बाहुल्य (उपन्यास) - प्रवीण दशरथ बांदेकर
  14. नेपाली - साइनो (नाटक) -  के.बी. नेपाली
  15. ओडिया - दयानदी (कविता) -गायत्रीबाला पांडा
  16. पंजाबी - मैं आयनघोष नहीं (लघु कथाएँ) - सुरजीत
  17. राजस्थानी - आलेखुन अम्बा (प्ले) -  कमल रंगा
  18. संस्कृत - दीपमाणिक्यम (कविता) -  जनार्दन प्रसाद पाण्डेय ‘मणि’
  19. संताली - सबर्णका बलिरे सनन’ पंजय (कविता) - काजली सोरेन (जगन्नाथ सोरेन)
  20. सिन्धी - सिंधी साहित्य जो मुख्तसर इतिहास -  कन्हैयालाल लेखवानी
  21. तमिल - काला पानी (उपन्यास) -  एम. राजेंद्रन
  22. तेलुगु - मनोधर्मपरागम (उपन्यास) - मधुरंथकम नरेंद्र
  23. उर्दू - ख्वाब साराब (उपन्यास) -  अनीस अशफाक

12/25/2022

छत्तीसगढ़ एवं भारत के राज्यो में नक्सल प्रभावित क्षेत्र : Naxal affected districts


केंद्र सरकार के द्वारा 20 जुलाई, 2022 को बताया गया कि वर्तमान में भारत के 70 जिले नक्सल प्रभावित है। जिसके अनुसार भारत में साबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले झारखंड में है। 

Naxal affected districts in chhattisgarh and other indian states : 

झारखंड के नक्सल प्रभावित 16 जिले :

बोकारो, चतरा, धनबाद, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, रांची, सरायकेला-खरसवां, पश्चिमी सिंहभूम।


छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित 14 जिले :

बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, बालोद, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कवर्धा और बलरामपुर जिले शामिल हैं। 


बिहार के नक्सल प्रभावित 10 जिले :

औरंगाबाद, बांका, गया, जमुई, कैमूर, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, रोहतास, पश्चिमी चंपारण।


ओडिसा के नक्सल प्रभावित 10 जिले :

बरगढ़, बोलांगीर, कालाहांडी, कंधमाल, कोरापुट, मल्कानगिरी, नबरंगपुर, नुआपाड़ा, रायगड़ा, सुंदरगढ़।


तेलंगना के नक्सल प्रभावित 6 जिले :

आदिलाबाद, भद्राद्री-कोठागुडेम, जयशंकर- भूपालपल्ली, कोमाराम-भीम, मनचेरियल, मुलुगु।


आंध्रप्रदेश के नक्सल प्रभावित 5 जिले :

पूर्वी गोदावरी, श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, पश्चिम गोदावरी।


मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित 3 जिले :

बालाघाट, मंडला, डिंडोरी।


केरल के नक्सल प्रभावित 3 जिले :

मलप्पुरम, पलक्कड़, वायनाड।


महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित 2 जिले :

गढ़चिरौली, गोंदिया


पश्चिम बंगाल में नक्सल प्रभावित 1 जिला :

झारग्राम












12/22/2022

Omicron COVID BF.7 से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य - भारत की स्थिति


Omicron COVID BF.7 ने पूरी दुनिया की बेचैनी बढ़ा दी है। इसके संक्रमण से चीन में बढ़ते आंकड़ो ने पूरी दुनिया को परेशानी में डाल दिया है। तो आइए जानते है भारत में क्या स्थिति है और भारत इस नए वैरिएंट (BF.7) के लिए कितना तैयार है।


क्या BF.7 एक नया संस्करण ( Variant ) है?

इसका जवाब है, नहीं। BF.7 Omicron COVID वैरिएंट के एक सबवेरिएंट का सबवेरिएंट है, जिसे पहली बार अप्रैल 2021 में खोजा गया था। यह BA.5.2.1.7 का संक्षिप्त रूप है। यह BA.5 ओमिक्रॉन संस्करण का एक सबवेरिएंट है।


Omicron BF.7 वैरिएंट से कैसे भिन्न है? और खबरों में क्यों है?

BA.5 की एक उप-वंशावली होने की वजह से Omicron BF.7 वैरिएंट में सबसे मजबूत संक्रमण क्षमता है, इसकी ऊष्मायन अवधि कम है, और पुन: संक्रमण या यहां तक कि टीकाकृत (Vaccinated) लोगों को संक्रमित करने की उच्च क्षमता है। रिपोर्ट के अनुसार, BF.7 की आर-वैल्यू (R-Value) 10 से 18.6 तक है। इसका मतलब है कि यह वैरिएंट से संक्रमित मरीज 10 से 18-19 स्वस्थ लोगों को संक्रमित कर सकता है।

खबरों में होने की वजह यह है कि, वर्तमान में चीन में संक्रमण दर बढ़ने के पीछे Omicron BF.7 वैरिएंट ही है।


क्या Omicron BF.7 वैरिएंट का मामला भारत में सामने आया है ?

इसका जवाब है, हाँ। भारत में जुलाई, 2022 में BF.7 का पहला मामला सामने आया था। इसके अलावा, BA.5 का पहला मामला  मई 2022 में सामने आया था, और तब से देश में इस सबवैरिएंट की विभिन्न उपवंशों की पहचान की गई है।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि अब तक भारत में BF.7 के चार मामलों पता चला था। लेकिन सभी लोग ठीक हो चुके है। वर्तमान में कोई ज्ञात सक्रिय मामले नहीं हैं।


क्या वैक्सीनेटेड (vaccinated) व्यक्ति सुरक्षित है ?

रिपोर्टों के अनुसार, BF.7 ओमिक्रॉन वैरिएंट ट्रांसमिट करने में की क्षमता अधिक होने की वजह यह लोगों को आसानी से संक्रमित करता है, यहां तक कि उन लोगों को भी जिन्हें पहले COVID हो चुका है या जिन्होंने वैक्सीन लिया है।

पहले मामले का पता लगाने वाले गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. माधवी जोशी ने कहा, "बीएफ.7 भारत में पाया गया है, लेकिन घबराना नहीं चाहिए क्योंकि यह ओमिक्रॉन के परिवार से है।" (source)

उन्होंने आगे कहा कि अन्य देशों के विपरीत, BF.7 संस्करण का भारत में विनाशकारी प्रभाव नहीं था। हालांकि, विशेषज्ञ ने लोगों से "मास्क पहनने, भीड़-भाड़ से बचने और हाथ की स्वच्छता का पालन करने" की अपील की थी।


Omicron BF.7 (ओमिक्रॉन बी.एफ.7) के लक्षण हैं?

नहीं, अभी तक, विशेष रूप से BF.7 से कोई नया लक्षण नहीं जोड़ा गया है। यह संस्करण ऊपरी श्वसन संक्रमण के समान लक्षण प्रस्तुत करता है जिसमें बुखार, गले में खराश, नाक बहना और खांसी शामिल है।

कुछ और लक्षण निम्न है :

  • बुखार
  • थकान
  • सिर दर्द
  • शरीर दर्द
  • दस्त और उल्टी


Omicron BF.7 के संक्रमण से कैसे बचें ?

Omicron BF.7 के संक्रमण से खुद को बचाने के उपाय अन्य संस्करणों की तरह वही हैं।
  • अपने हाथों को नियमित रूप से धोएं एवं सेनेटाइजर का प्रयोग करें।
  • मास्क का प्रयोग करें।
  • टीकाकरण करवाएं और बूस्टर डोज जरूर लें।
  • यदि आप में COVID जैसे लक्षण देखते हैं तो परीक्षण करवाएं और यदि आप सकारात्मक परीक्षण करते हैं तो स्वयं को अलग कर लें।