राष्ट्रमंडल खेल 2022 भारत के लिए क्यों विशेष है ?

राष्ट्रमंडल खेलों का 22वां संस्करण 28 जुलाई से 8 अगस्त 2022 तक इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित किया गया। इन खेलों में भारत ने कुल 61 पदक जीत और चौथा स्थान प्राप्त किया। इसमें 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक शामिल हैं। इससे पहले 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 66 पदक जीते थे। इनमें से 16 पदक शूटिंग में आए थे। राष्ट्रमंडल खेल 2022 में शूटिंग को शामिल नहीं किया गया था।


पदक कम मिलने के बावजूद राष्ट्रमंडल खेल 2022 कई कारणों से विशेष है, कुछ प्रमुख कारण निम्न है :

  1. भारत ने लॉन बॉल में दो पदक जीते। इस खेल के इतिहास में पहली बार भारत को पदक मिले। इससे पहले भारत कभी भी लॉन बॉल में पदक नहीं जीत पाया था। भारतीय महिला टीम ने स्वर्ण पदक एवं पुरुष टीम ने रजत पदक जीता। 
  2. भारत को इस बार हॉकी में दो पदक मिले। पुरुष और महिला दोनों टीमों ने पदक जीते। महिला टीम ने 16 वर्षो बाद कांस्य पदक हासिल किया। 
  3. कॉमनवेल्थ खेलों में पहली बार महिला क्रिकेट को शामिल किया गया था और भारत ने रजत पदक जीता।
  4. वर्ष 1998 से लगातार केन्या के एथलीट स्टीपलचेज में पदक जीतते आ रहे थे। पिछले छह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण, रजत और कांस्य तीनों पदक केन्या के खिलाड़ियों ने ही जीते थे, लेकिन 2022 में अविनाश साबले ने यह सिलसिला रजत जीत के तोड़ दिया।
  5. भारत की अन्नू रानी ने कांस्य पदक जीत कर इतिहास रच दिया। कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए जैवलिन थ्रो में पदक हासिल करने वाली पहली महिला बनीं।

भारत का उपराष्ट्रपति और उनकी निर्वाचन प्रणाली vice president of india


भारतीय संविधान का अनुच्छेद 63 कहता है कि "भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा" और अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति "राज्यों की परिषद का पदेन अध्यक्ष होगा"। यदि राष्ट्रपति की मृत्यु हो जाती है, राष्ट्रपति इस्तीफा दे देता है या राष्ट्रपति को हटाया जाता है तो अनुच्छेद 65 के अनुसार उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जब तक कि नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जाती।

संवैधानिक व्यवस्था में उपराष्ट्रपति पद का धारक कार्यपालिका का भाग है परंतु अनुच्छेद 89 के अनुसार राज्य सभा के सभापति के रूप में वह संसद का भाग है। इस प्रकार उपराष्ट्रपति की दोहरी भूमिका होती है और वह दो अलग-अलग और पृथक पद धारण करता है। उपराष्ट्रपति पद का कोई वेतन नहीं होता है, उनका वेतन 'संसद अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम 1953' के तहत तय होता है। पक्ष और विपक्ष के मत बराबर होने पर निर्णायक वोट डाल सकते है।


उपराष्ट्रपति की योग्यता क्या होती है ?

उपराष्ट्रपति के योग्यता संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 66(3) है। इसके अनुसार :-

  1. उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए। 
  2. 35 वर्ष की आयु पूर्ण होनी चाहिए।
  3. राज्यसभा के सदस्य हेतु निर्वाचन की योग्यता होनी चाहिए।
  4. भारत सरकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय राजकीय पर प्राधिकरण के अंतर्गत लाभ के पद पर नहीं होने चाहिए।


चुनाव कब होता है ?

संविधान के अनुच्छेद 68 के अनुसार उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा हो जाने के 60 दिनों के भीतर नये उपराष्ट्रपति का निर्वाचन कराना ज़रूरी होता है। चुनाव के लिए चुनाव आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता। यह निर्वाचन अधिकारी किसी एक सदन का सेक्रेटरी जनरल होता है। निर्वाचन अधिकारी चुनाव को लेकर पब्लिक नोट जारी करता है और उम्मीदवारों से नामांकन के लिए मंगवाता है।


निर्वाचन कैसे होता है?

उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधित उपबंधों का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 66 में है। जिसके अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन राष्ट्रपति की तरह ही आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा गुप्त मतदान के द्वारा होता है। उपराष्ट्रपति चुनाव में सांसद एवं राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सदस्य भी वोट डाल सकते हैं।

उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भरने के लिए उम्मीदवार को कम-से-कम 20 सांसद बतौर प्रस्तावक और 20 सांसद बतौर समर्थक दिखाने की शर्त पूरी करनी होती है.

उम्मीदवार संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होना चाहिए। यदि वह सदस्य है तो पद ग्रहण की तारीख से उसका पद रिक्त समझा जाएगा।

नोट : यदि कोई सांसद चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा।





SSLV और PSLV में क्या अंतर है ?


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था (ISRO) के द्वारा छोटे उपग्रहों को लॉन्च करने के उद्देश्य से SSLV का विकास किया गया है। 7 अगस्त को सतीश धवन एरिया सेंटर, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से सुबह 09:18 बजे SSLV को EOS-02 के साथ लॉन्च किया जाएगा।

भविष्य में श्रीहरिकोटा में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SSLC) नाम से एक समर्पित लॉन्च पैड स्थापित किया जाएगा। तमिलनाडु में कुलशेखरपट्टनम के पास एक नया स्पेसपोर्ट SSLV लॉन्च को भविष्य में संभालेगा।


SSLV और PSLV में अंतर ?

SSLV के विकास का कार्य वर्ष 2016 में कीमत और प्रक्षेपण दर ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) की तुलना में कम करने के लिए किया गया था। SSLV की विकास लागत ₹169.07 करोड़ है और निर्माण लागत ₹30 करोड़  से ₹35 करोड़ होने की उम्मीद है।

PSLV की लंबाई 44 मीटर है, जबकी SSLV 34 मीटर है। SSLV को 10 किलोग्राम से 500 किलोग्राम तक की वस्तुओं को 500 किलोमीटर की प्लानर कक्षा में रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है, PSLV 600 किमी ऊंचाई के सौर-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षाओं में 1,750 किलोग्राम पेलोड को स्थापित कर सकता है। SSLV को तैयार करने और लॉन्च पैड पर स्थानांतरित करने में केवल 72 घंटो का समय लगेगा, PSLV को तैयार करने के लिए 2 महीनों का समय लगता है।






क्या था, आपराधिक जनजाति अधिनियम ? (Criminal Tribes Act, 1871)’



अंग्रेजों के द्वारा आदिवासियों और जनजातियों को ही अपराधी घोषित करने के लिए आपराधिक जनजाति अधिनियम, 1871 लाया गया था। इसे 12, अक्टूबर 1871 को अधिनियमित किया गया। इस अधिनियम के तहत, भारत की कई जनजातियों को "आदतन अपराधी" घोषित कर दिया गया।  

आपराधिक जनजाति अधिनियम 1871, इसे उत्तर भारत में लागू किया गया था। इस अधिनियम को 1876 में बंगाल प्रेसीडेंसी और अन्य क्षेत्रों में विस्तारित किया गया था। वर्ष 1911 में "आपराधिक जनजाति अधिनियम 1911" के साथ मद्रास प्रेसीडेंसी तक इसे लागू कर दिया गया। अधिनियम अगले दशक में कई संशोधनों के माध्यम से चला गया, और आखिरकार, आपराधिक जनजाति अधिनियम 1924 ने उन सभी को शामिल किया।


विमुक्ति दिवस :

31 अगस्त 1952 को  "आपराधिक जनजाति अधिनियम" को खत्म कर दिया गया। इसीलिए इन जनजाति के लोगों ने 31 अगस्त को 'विमुक्ति दिवस' के रूप में मनाना शुरू कर दिया।


ReadCriminal Tribes Act, 1871

 

राष्ट्रमंडल खेल 2022 संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य Commonwealth Games 2022

 


राष्ट्रमंडल खेलों को "Commonwealth Games" या "Friendly Games" भी कहा जाता है, जिसमें राष्ट्रमंडल देशों के एथलीट शामिल होते हैं। इसे वर्ष 1930 से आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 1930 से 1950 के बीच इसे "British Empire Games", 1954 से 1966 के बीच इसे "British Empire and Commonwealth Games" और वर्ष 1970 से 1974 के बीच "British Commonwealth Games" के रूप में जाना जाता था। प्रत्येक राष्ट्रमंडल खेल अपने आप में एक विशेषता रखता है। राष्ट्रमंडल खेल 2022 भी अपने आप में विशेष है, इससे संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्न है :

  1. राष्ट्रमंडल खेलों का यह 22वां संस्करण है। यह 28 जुलाई से 8 अगस्त 2022 तक इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित होने वाला है। और उद्घाटन अलेक्जेंडर स्टेडियम में।
  2. राष्ट्रमंडल खेल कुल 15 स्थान पर आयोजित किए जाएंगे, इनमें से 14 स्थान वेस्ट मिडलैंड्स में हैं।
  3. राष्ट्रमंडल खेल 2022 में 283 अलग-अलग मेडल इवेंट शामिल हैं। इस साल 72 टीमें शामिल है।
  4. पहली बार महिला टी-20 किक्रेट को राष्ट्रमंडल खेलो में शामिल किया गया है। 
  5. पुरुषों की प्रतियोगिता में रवांडा, दक्षिण अफ्रीका और मालदीव राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार खेलेंगे।
  6. सोलोमन आइसलैंड की महिला टीम पहली बार राष्ट्रमंडल खेल के बीच वॉलीबॉल प्रतियोगिता का हिस्सा बनेगी।
  7. पहली बार ऐसे किसी आयोजनों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक स्वर्ण पदक मिलेंगे। महिलाओं को 136 स्वर्ण पदक, जबकि पुरुषों को 134 स्वर्ण पदक मिलेंगे।
  8. राष्ट्रमंडल खेल 2022 का आधिकारिक शुभंकर 'पेरी द बुल' है, जिसे दस साल की लड़की ने डिजाइन किया है।
  9. भारत के 213 खिलाड़ीयो ने हिस्सा लिया है। बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु उद्घाटन समारोह के लिए ध्वजवाहक है।










 

छत्तीसगढ़ का हरेली त्योहार ( तिहार ) Hareli Festival in Chhattisgarh



छत्तीसगढ़ की भाषा छत्तीसगढ़ी में त्योहार को तिहार कहा जाता है। इस वजह से इस आर्टिकल में हम हरेली त्योहार ना बोल कर हम "हरेली तिहार" बोलेंगे। 

छत्तीसगढ़ में हरेली नव वर्ष का प्रथम लोक तिहार होता है। इसे लोग एक उत्सव के रूप में मनाते है। हरेली प्रति वर्ष सावन महीने के अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली का मतलब हरियाली होता है, यह तिहार प्रकृति को और खेती को समर्पित है। हरेली तिहार के पहले तक किसान अपनी फसलों की बोआई या रोपाई का काम पूरा कर लेते हैं और इस दिन नागर, कोपर, गैंती, कुदाली, रांपा समेत कृषि के काम आने वाले अन्य औजारों एवं यंत्रो की साफ-सफाई कर उसकी पूजा-अर्चना करते हैं, और किसान खेतों में भेलवा के पेड़ की डाली लगाते है। इसी के साथ घरों के प्रवेश द्वार पर नीम के पेड़ की शाखाएं भी लगाई जाती हैं। 


गेड़ी :

हरेली में गेड़ी का एक विशेष स्थान है। हरेली के दिन लोग बांस से गेड़ी बनाते है जिसमें पैर रखने के खांचे होते है जिसमे बांस से ही बने पैरदान लगाए जाते है पैर रखने के लिए। जिसे बॉस को फाड़ कर के बनाया जाता है। इस पैरदान को पउवा कहा जाता है। इसमें चढ़कर बच्चे खेत के चक्कर लगाते हैं। पहले कुछ लोग पउआ में मिट्टीतेल डाला करते थे जिससे चलाने पर आवाज आती थी। ध्वनि निकालने के लिए गेड़ी को मच कर चलाया जाता है।


नारियल प्रतियोगिता :

हरेली के दिन लोग नारियल से संबंधित खेल खेलते है जिसमे पुरस्कार के रूप में नारियल मिलता है। इसे नारियल फेक प्रतियोगिता या नरियर जितउल भी कहा जाता है।

सवनाही :
महिलायें हरेली के दिन घर के मुख्य द्वार पर गोबर से सवनाही का अंकन करती है।


अमुस त्योहार :
हरेली के ही दिन बस्तर क्षेत्र में अमूस मनाया जाता है। इस दिन गांव वाले खेतों में औषधीय जड़ी-बूटियों के साथ तेंदू पेड़ की पतली छड़ी गाड़ते है।


योजना :
वर्ष 2020 में हरेली पर्व के ही दिन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गोधन न्याय योजना की शुरूआत की थी। वर्ष 2022 में हरेली कर ही दिन इस योजना में और विस्तार हेतू गोबर के साथ-साथ गोमूत्र खरीदी करने की भी निर्णय लिया गया है।






कुयली (Kuyili) पहली महिला शहीद और पहली आत्मघाती हमलावर



कुयली (Kuyili) एक कमांडर थी, जिन्होंने 18वीं शताब्दी में रानी वेलु नचियार के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ अभियानों में भाग लिया था। वेलु नचियार भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ युद्ध छेड़ने वाली पहली भारतीय रानी थींकुयली को भारतीय इतिहास में "पहली आत्मघाती हमलावर" और "पहली महिला शहीद" के रूप में जाना जाता है।


जीवन:

कुयली (Kuyili) के जीवन के संबंध में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका जन्म शिवगंगा राज्य के एक सामान्य दलित किसान परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम राकू और पिता का नाम पेरियामुथन था। कुयली की माँ को भी उनकी बहादुरी के लिए भी जाना जाता था और ऐसा कहा जाता है कि वह अपने खेतों को नष्ट होने से बचाने के लिए एक जंगली बैल से लड़ते हुए मारी गई थी।

कुयली अपने पिता पेरियामुथन के साथ शिवगंगा राज्य ले पास चले गए थे जहां वे मोची का काम करते थे। पेरियामुथन शिवगंगा राज्य  की सेना में जासूस के रूप में कार्य सुरु किया। उनके कार्य की वजह से कुयली और वेलू नचियार में मित्रता हो गई।

कुयली ने अपनी निष्ठा और मेहनत से शिवगंगा राज्य में महिला सैन्य टुकड़ी की सेना प्रमुख का पद हासिल किया था।


युद्ध :

वर्ष 1772 में आर्कोट के नवाब और ईस्ट इंडिया कंपनी की संयुक्त सेना के हाथों मुथु वदुगनाथ थेवर की मृत्यु होने के बाद रानी वेलु नचियार अपनी बेटी के साथ डिंडीगुल भाग गई और मरुधु भाइयों से जुड़ गई। करीब 8 वर्षो तक तैयारी के बाद। वर्ष 1780 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शिवगंगा किले पर हमला करते हुए, उसने अपने शरीर पर घी लगाया, खुद को आग लगा ली और ईस्ट इंडिया कंपनी के शस्त्रागार में कूद गई, जिससे वेलु नचियार की जीत हुई और शिवगंगा राज्य पर रानी वेलु नचियार ने पुनः शासन किया।


Source :

feminisminindia




कुलाप जलप्रपात गरियाबंद - Kulap Waterfall Gariaband

कुलाप जलप्रपात छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में धवलपुर के पास जंगल में स्थित एक बरसाती झरना है। यहां तक पहुचना वर्तमान में थोड़ा कठिन है। 


जंगल से घिरे होने की वजह से यह काफी सुंदर जलप्रपात है। वर्तमान में इस जलप्रपात के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। परंतु इसकी ऊंचाई करीब 100 फिट है। 

न्यू डेवलपमेंट बैंक को समझिए – New Development Bank- NDB

न्यू डेवलपमेंट बैंक ( New Development Bank- NDB ) की स्थापना वर्ष 15 जुलाई, 2014 को ब्राज़ील के फोर्टालेजा में छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने एक समझौते पर हस्ताक्षर कर के किया था, इस वजह से इसे BRICS Development Bank भी कहा जाता था। NDB का मुख्यालय शंघाई (चीन) में है।

वर्ष 2019 में जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी लिमिटेड (Japan Credit Rating Agency Ltd- JCR) द्वारा NDB को AAA रेटिंग प्रदान की गई थी।


पृष्ठभूमि :

वर्ष 2012 में नई दिल्ली में आयोजित चौथे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचा एवं सतत् विकास परियोजनाओं के लिये "न्यू डेवलपमेंट बैंक" की स्थापना पर विचार किया गया था।


सदस्य :

ब्रिक्स देशों के अलावा, NDB ने 2 सितंबर, 2021 को बताया है कि उसने संयुक्त अरब अमीरात, उरुग्वे और बांग्लादेश को अपने पहले विस्तार अभियान में सदस्य देशों के रूप में स्वीकार किया है। दिसंबर, 2021 को इजिप्ट  NDB का हिस्सा बना।





 

कौन थे स्वामी श्रद्धानंद ? Who Was Swami Shraddhanand

स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्म 22 फरवरी 1856 को पंजाब के जालंधर जिले के तलवन में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और एक आर्य समाज संन्यासी थे जिन्होंने दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं का प्रचार किया। वर्ष 1920 के दशक में एक हिंदू सुधार आंदोलन संगठन और शुद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हें महात्मा मुंशी राम विज के नाम से भी जाना जाता है।


सामाजिक कार्य :

वर्ष 1892 में आर्य समाज के दो गुटों में विभाजित होने के बाद  उन्होंने संगठन छोड़ दिया और पंजाब आर्य समाज का गठन किया और उन्होंने गुरुकुलों को चुना। वर्ष 1897 में, जब लाला लेख राम की हत्या हुई, श्रद्धानन्द उनके उत्तराधिकारी बने। उन्होंने "पंजाब आर्य प्रतिनिधि सभा" का नेतृत्व किया और इसकी मासिक पत्रिका "आर्य मुसाफिर" की शुरुआत की। वर्ष 1902 में उन्होंने हरिद्वार के पास कांगड़ी में एक गुरुकुल की स्थापना की। इस स्कूल को अब गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाता है।


राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान :

वर्ष 1917 में, महात्मा मुंशी राम ने संन्यास को "स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती" के रूप में लिया। और इसी वर्ष इन्होंने गुरुकुल छोड़ कर राष्ट्रीय आंदोलन और हिन्दू सुधार आंदोलन का हिस्सा बन गए। वर्ष 1919 के कांग्रेस अमृतसर बैठक के हिस्सा बनें। इन्होंने रोलेट एक्ट का विरोध सहित अन्य आंदोलनों के हिस्सा रहे।

स्वामी श्रद्धानंद एकमात्र हिंदू संन्यासी थे जिन्होंने नई दिल्ली के जामा मस्जिद में विशाल सभा को संबोधित किया।

 1922 में, डॉ अम्बेडकर ने श्रद्धानंद को "अछूतों का सबसे बड़ा और सबसे ईमानदार चैंपियन" कहा। वर्ष 1923 तक उन्होंने शुद्धि आंदोलन की सुरुआत कर दी। जिया वजह से मुस्लिम समुदाय उनसे दुखी थे।


हत्या :

23 दिसंबर 1926 को अब्दुल रशीद ने उनकी हत्या कर दी थी।