पोलंग मट्टा क्या है ? : Polangmatta


स्थानीय भाषा में पोलंग का अर्थ दखल रहित और मट्टा का अर्थ पहाड़ होता है। इस पहाड़ी का छोटा स्वरूप यहां तैयार किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य के नारायणपुर जिले में जिला मुख्यालय से करीब 2 किलोमीटर दूरी पर एक पहाड़ी है जिसका नाम है पोलंगमट्टा। स्थानीय मान्यतानुसार यहां किसी को जाने की इजाजत नहीं। यहां आदिवासियों जनजातियों के बीच मान्यता है कि यहां देवी-देवता आते हैं। आपस में मिलते हैं, बातें करते हैं। और उन्हें किसी का दखल पसंद नहीं। जिस वजह से इस पर जाना वर्जित है। और इस पहाड़ी को देवताओं का विश्राम स्थल माना जाता है।

देव:
मान्यतानुसार, इस पहाड़ी पर आराध्य देव एवं दुगाल परगना के मंडादेव ( जिन्हें बूढा देव भी कहते है) की पत्नी जैत मालो और जेटिन परगना के मंडादेव (वेसुर कौडो की पत्नी पुगांर मालो) विराजित हैं। इन देवताओं के अन्य परिवारजन इनसे मिलने आते हैं। वे आपस में सुख-दुख बांटते हैं। जिस वजह से यह स्थान आदिवासी समाज के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। और इस स्थान को एक वर्जित स्थल मानते है।

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