भारत में राष्ट्रीय एवं राजनीतिक दल


भारत में बहुदलीय लोकतंत्र व्यवस्था है। और यह एक अभिन्न अंग है। भारत के मूल संविधान में राजनीतिक दलों का कोई उल्लेख नहीं था। 52 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1985 द्वारा संविधान की 10 वीं अनुसूची जोड़ कर राजनीतिक दलों को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1988 के अनुसार, प्रत्येक राजनीतिक दल के उसके गठन की तिथि से 30 दिनों के अंदर पंजीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है।
राजनीतिक दलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
1.राष्ट्रीय दल
2.राज्य स्तरीय या क्षेत्रीय दल
3.गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल

1.राष्ट्रीय दल
भारत में एक मान्यता प्राप्त दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तभी प्रदान किया जा सकता है। राष्ट्रीय दल का दर्जा प्राप्त करने वाले दल को विगत 5 वर्षों से राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न होने के अलावा निम्नलिखित तीन में से किसी एक शर्त को पूरा करती है:-

1. यदि कोई पार्टी कम से कम 3 विभिन्न राज्यों को मिलाकर लोकसभा की 2% सीटें (2014 के चुनाव के अनुसार 11 सीटें) जीतती है।
2. यदि कोई पार्टी 4 लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा या विधान सभा चुनाव में चार राज्यों में 6% वोट प्राप्त करती है।
3. यदि कोई दल चार या चार से अधिक राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता रखती है।

2. राज्य स्तरीय दल या क्षेत्रीय दल
एक मान्यता प्राप्त पार्टी को क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा तभी प्रदान किया जा सकता है यदि वह निम्नलिखित शर्तों में किसी एक शर्त को पूरा करती है:-

1. यदि कोई पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में से कम-से-कम 3% सीट या कम-से-कम 3 सीटें, जो भी ज्यादा हो प्राप्त करती है।
2. यदि कोई पार्टी लोकसभा के लिए उस राज्य के लिए आवंटित प्रत्येक 25 सीटों या उस संख्या की किसी भिन्न के पीछे कम से कम 1 सीट प्राप्त करती है।
3. यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव में कुल वैध मतों में से कम से कम 6% मत प्राप्त करती है और साथ ही कम से कम 1 लोकसभा सीट या 2 विधानसभा सीट जीतती है।
4. एक अन्य मापदंड के अनुसार यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के आम चुनाव में किसी राज्य में एक भी सीट जीतने में विफल रहती है लेकिन वह उस राज्य में डाले गए कुल वैध मतों में से 8% मत प्राप्त करती है, तो उस राज्य में उस पार्टी को क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दिया जा सकता है।

आम चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर मान्यता प्राप्त दलों की संख्या बदलती रहती है। 13 अप्रैल 2018 की तारीख में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राष्ट्रीय दलों की संख्या 7, राज्य स्तरीय दलों की संख्या 24 और गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों की संख्या 2044 थी।

3. गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल
राष्ट्रीय और क्षेत्रय दलों के अलावा सभी दाल इस श्रेणी में आते है। यदि कोई दल अपनी राष्ट्रीय अथवा क्षेत्रय दल की मान्यता खो देता है, तो उस दल को 6 वर्षो तक चुनाव चिह्न रखने की अनुमति होती है, परंतु मान्यता प्राप्त दलों को मिलने वाली सुविधाएं खो देता है।

भारत में किसी राजनीतिक पार्टी का पंजीकृत किस तरह कराया जाता है ?
भारत में किसी भी संस्था या संघ को भारतीय निर्वाचन आयोग के पास औपचारिक रूप से पंजीकृत करवाने की कोई जरुरत नही होती है। लेकिन यदि कोई संस्था या संघ जो कि स्वयं को राजनैतिक दल कहता है और लोक प्रतिनधित्वय अधिनियम, 1951 (राजनैतिक दलों के पंजीकरण के संबंध में) के भाग IV-क के उपबंधों का लाभ उठाने का इच्छुक है, से अपेक्षा की जाती है कि वह स्वयं को भारत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत कराए।

चुनाव चिह्न
चुनाव चिह्न का आरक्षण तथा आवंटन आदेश 1968 के अनुसार किया जाता है। राजनीतिक दल को मान्यता और चुनाव चिह्न का वितरण चुनाव आयोग द्वारा किया जाता है।


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