एल नीनो (El Nino) एवं ला नीना (La Nina) प्रभाव

एल नीनो (El Nino) और ला नीना (La Nina) दोनों स्पेनिश नाम है। एल नीनो का शाब्दिक अर्थ है- "छोटा बच्चा" यह नाम पेरू के मछुआरों द्वारा बाल ईसा के नाम पर किया गया है क्योंकि इसका प्रभाव सामान्यतः क्रिसमस के आस-पास अनुभव किया जाता है। ला नीना स्पैनिश का शाब्दिक अर्थ है- "छोटी बच्ची" चूंकि इसका प्रभाव एल नीनो के विपरीत होता है इसलिए इसे "प्रति एल नीनो" नाम से भी जाना जाता है।
 ऊष्ण कटिबंधीय प्रशांत महासागर में पैदा होने वाले गरम और ठंडे मौसमी प्रभावों को इन्हीं नामों से पुकारा जाता है।

एल नीनो प्रभाव
एल निनो गर्म जलधारा है जिसके आगमन पर सागरीय जल का तापमान सामान्य से 3-4° बढ़ जाता है। पेरू के तट के पास जल ठंडा होता है एवं पोषक-तत्वों से समृद्ध होता है जो कि प्राथमिक उत्पादकों, विविध समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों एवं प्रमुख मछलियों को जीवन प्रदान करता है। एल नीनो के दौरान, व्यापारिक पवनें मध्य एवं पश्चिमी प्रशांत महासागर में शांत होती है। इससे गर्म जल को सतह पर जमा होने में मदद मिलती है जिसके कारण ठंडे जल के जमाव के कारण पैदा हुए पोषक तत्वों को नीचे खिसकना पड़ता है और प्लवक जीवों एवं अन्य जलीय जीवों जैसे मछलियों का नाश होता है तथा अनेक समुद्री पक्षियों को भोजन की कमी होती है। इसे एल नीनो प्रभाव कहा जाता है।
एल-नीनो अक्सर दस साल में दो बार आती है और कभी-कभी तीन बार भी। एल-नीनो हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में बढोत्तरी की विशेष भूमिका निभाती है। एल-नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है। कभी-कभी इसके विपरीत भी होता है।


ला नीना प्रभाव
ला नीना एल नीनो से ठीक विपरीत प्रभाव रखती है। पश्चिमी प्रशांत महासागर में एल नीनो द्वारा पैदा किए गये सूखे की स्थिति को ला नीना बदल देती है, तथा आर्द्र मौसम को जन्म देती है। ला नीना के आविर्भाव के साथ पश्चिमी प्रशांत महासागर के ऊष्ण कटिबंधीय भाग में तापमान में वृद्धि होने से वाष्पीकरण अधिक होने से इण्डोनेशिया एवं समीपवर्ती भागों में सामान्य से अधिक वर्षा होती है। ला नीना परिघटना कई बार दुनिया भर में बाढ़ की सामान्य वजह बन जाती है।