वेल्लोर विद्रोह - Vellore mutiny

वेल्लोर विद्रोह 10 जुलाई 1806 को मद्रास राज्य (अब तमिलनाडु) राज्य के शहर वेल्लोर में हुआ था। यह ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ भारतीय सिपाहियों द्वारा बड़े पैमाने पर और हिंसक विद्रोह का पहला उदाहरण था, जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से भी आधी सदी पहले घटित हुआ था। 




कारण :
अंग्रेज़ी हुकूमत सिपाहियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किया। इसके तहत हिंदू सैनिकों को तिलक लगाने की मनाही कर दी गई और मुसलमान सैनिकों को दाढ़ी कटवाने का हुक्म दिया गया। सैनिकों को एक गोल हैट पहनना अनिवार्य कर दिया गया। ये हैट, उस हैट जैसा लगता था जिसे यूरोपियन लोग और कन्वर्ट कर गए हिंदुस्तानी ईसाई लोग पहनते थे।

विद्रोह और परिणाम:
टीपू सुलतान की बेटियों में से एक की शादी 9 जुलाई 1806 को शादी में शिरकत के बहाने विद्रोही सैनिक इकट्ठा हुए। किले पर कब्ज़ा करने का फैसला हुआ। यह विद्रोह एक पूर्ण दिन चला, जिसके दौरान विद्रोहियों ने वेल्लोर किले पर क़ब्ज़ा कर लिया और 200 ब्रिटिश सैनिकों को मार डाला या घायल कर दिया। विद्रोह को 
रॉबर्ट रोल्लो गिल्लेस्पी ( Robert Rollo Gillespie ) के नेतृत्व में आरकाट (Arcot) राज्य के घुड़सवारों और तोपखाने की बदौलत दबाया जा सका। दमन के दौरान लगभग 600 लोग मारे गए, और इसके बाद 100 विद्रोहियों को सज़ा-ए-मौत सुनाई गई। इसके अलावा कई विद्रोही सैनिकों का औपचारिक रूप से कोर्ट-मार्शल भी किया गया। तकरीबन 350 विद्रोही सिपाहियों को किले में ही मार डाला गया।


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