भारतीय संसद ( संविधान ) – Indian parliament

संसद भारत का सर्वोच्‍च विधायी निकाय है। भारतीय संसद के तीन अंग है, राष्‍ट्रपति तथा दो सदन - राज्‍य सभा (राज्‍यों की परिषद) एवं लोकसभा (लोगों का सदन) होते हैं। राष्‍ट्रपति के पास संसद के दोनों में से किसी भी सदन को बुलाने या स्‍थगित करने अथवा लोकसभा को भंग करने की शक्ति है। भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू होने के बाद प्रथम आम चुनाव वर्ष 1951-52 में आयोजित किए गए थे तथा प्रथम निर्वाचित संसद अप्रैल, 1952 में अस्तित्‍व में आई थी।


राष्ट्रपति :

भारत के संविधान के तहत, भारत का एक राष्ट्रपति (संविधान का अनुच्छेद 52 देखें) सदैव होगा। राष्ट्रपति देश में सर्वोच्च निर्वाचित पद धारण करता है एवं संविधान के उपबंधों और राष्ट्रपतीय और उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन अधिनियम, 1952 के अनुसार निर्वाचित किया जाता है। उक्त अधिनियम को राष्ट्रपतीय और उपराष्ट्रपतीय निर्वाचन नियम, 1974 के उपबंधों द्वारा संपूरित किया गया है, एवं और नियमों के अधीन उक्त अधिनियम राष्ट्रपति के पद के निर्वाचन के आयोजन के सभी पहलुओं को विनियमित करने वाला एक संपूर्ण नियमसंग्रह का निर्माण करता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल, पद ग्रहण करने की तिथि से 5 वर्ष का होता है।

लोकसभा :

लोक सभा का गठन मतदान के आधार पर प्रत्‍यक्ष चुनाव द्वारा चुने गए जनता के प्रतिनिधियों से होता है। सभा के सदस्‍यों की अधिकतम संख्‍या 552 है जैसा कि संविधान में उल्‍लेख किया गया है जिसमें 530 सदस्‍य राज्‍यों का, 20 सदस्‍य संघ राज्‍य क्षेत्रों का प्रतिनिधित्‍व करते हैं और महामहिम राष्‍ट्रपति महोदय, यदि ऐसा मानते हैं कि आंग्‍ल भारतीय समुदाय को सभा में उचित प्रतिनिधित्‍व नहीं मिला है तो उस समुदाय से अधिकतम दो सदस्‍यों को नामित करते हैं। 


राज्‍य सभा :

राज्‍य सभा में सदस्‍यों की अधिकतम संख्‍या 250 है, इसमें से 238 सदस्‍य राज्‍यों तथा संघ राज्‍य क्षेत्रों के प्रतिनिधि होंगे तथा 12 सदस्‍यों को राष्‍ट्रपति द्वारा नामांकित किया जाएगा। राज्‍य सभा एक स्‍थायी निकाय है तथा इसे भंग नहीं किया जा सकता। राज्‍य सभा में 1/3 सदस्‍य प्रत्‍येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्‍त होते हैं तथा उन्‍हें नए निर्वाचित सदस्‍यों द्वारा प्रतिस्‍थापित किया जाता है। प्रत्‍येक सदस्‍य को 6 वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचित किया जाता है। 

भारत का उपराष्‍ट्रपति राज्‍य सभा का पदेन सभापति है। यह सदन अपने सदस्‍यों में से एक उप सभापति का चुनाव भी करता है। इसके अतिरिक्‍त, राज्‍य सभा में उप-सभापतियों का एक पैनल होता है। वरिष्‍ठतम मंत्री, जो राज्‍य सभा का सदस्‍य होता है, को प्रधानमंत्री द्वारा सदन के नेता के रूप में नियुक्‍त किया जाता है।


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