RTE ( आर. टी. ई.) या शिक्षा का अधिकार क्या होता है ?

RTE 12 (1)(c) योजना भारतीय संसद द्वारा 4 अगस्त 2009 को पारित किया गया था तथा 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ। छत्तीसगढ़ मे RTE 12 (1)(c) योजना का लाभ सत्र 2010-11 से दिया जा रहा है। पूर्व मे अधिनियम का लाभ कक्षा – आठवीं तक ही दिया जाता था, परन्तु अब इसमे (छ. ग. राज्य स्तर पर) संसोधन कर सत्र 2019 मे इसकी मान्यता बढ़ाकर क्लास – बारहवीं तक कर दी गयी है। आरटीई 12(1)(सी) के अंतर्गत सभी गैर – अनुदान प्राप्त और गैर – अल्पसंख्यक प्राइवेट स्कूलों के प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीट दुर्बल और असुविधाग्रस्त परिवार के बच्चों के लिए आरक्षित होता है। इस अधिनियम के तहत 3 से 6½ वर्ष तक के बच्चे किसी भी प्राइवेट स्कूल के प्रारंभिक कक्षा मे प्रवेश ले सकते है। इस योजना से प्रवेशित छात्र कक्षा 12वी तक नि:शुल्क चयनित स्कूल मे अध्ययन कर सकते है। 


शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 :

भारतीय संविधान में शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21A के अंतर्गत मूल अधिकार के रूप में उल्लिखित है। 2 दिसंबर, 2002 को संविधान में 86वाँ संशोधन किया गया था और इसके अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया।

इस मूल अधिकार के क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2009 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right of Children to Free and Compulsory Education-RTE Act) बनाया गया।


संविधान एवं समितियां:

मूल भारतीय संविधान के भाग- IV के अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 39 (f) में राज्य द्वारा वित्तपोषित समान और सुलभ शिक्षा का प्रावधान किया गया।

शिक्षा के अधिकार पर पहला आधिकारिक दस्तावेज़ वर्ष 1990 में राममूर्ति समिति की रिपोर्ट थी। इसके बाद वर्ष 1993 में उन्नीकृष्णन जेपी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा कि शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।

तपस मजूमदार समिति (1999) ने अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की अनुशंसा की थी।

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