हरिहर वैष्णव – Harihar Vaishnav



हरिहर वैष्णव का जन्म 19 जनवरी 1955 को श्यामदास वैष्णव और जयमणि वैष्णव के घर हुआ। वे एक साहित्यकार थे। उन्होंने बस्तर की लोक कथाओं को बरसों की मेहनत से संग्रहित किया। 


साहित्य एवं कार्य :

हरिहर वैष्णव जनजातियों में प्रचलित कहानियों, गीतों को लिपिबद्ध किया है। हिंदी के साथ ही बस्तर की स्थानीय बोलियों, हल्बी, भतरी में भी उन्होंने साहित्य लिखने की शुरुआत की थी। श्री वैष्णव की 24 किताबें  से ज्यादा प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने स्कॉटलैंड की एनीमेशन संस्था वेस्ट हाईलैंड एनीमेशन के साथ हल्बी के पहले एनीमेशन फिल्मों का निर्माण भी किया था।


हरिहर वैष्णव की प्रमुख कृतियां :

मोहभंग (कहानी-संग्रह), लछमी जगार (बस्तर का लोक महाकाव्य), बस्तर का लोक साहित्य (लोक साहित्य), चलो, चलें बस्तर (बाल साहित्य), बस्तर के तीज-त्यौहार (बाल साहित्य), राजा और बेल कन्या (लोक साहित्य), बस्तर की गीति कथाएँ (लोक साहित्य), धनकुल (बस्तर का लोक महाकाव्य), बस्तर के धनकुल गीत (शोध विनिबन्ध), बाली जगार, आठे जगार, तीजा जगार, बस्तर की लोक कथाएँ, बस्तर की आदिवासी एवं लोक कलाएँ (भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली से), सुमिन बाई बिसेन द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोक-गाथा धनकुल (छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी, रायपुर से)। हरिहर जी ने बस्तर केंद्रित विभिन्न पत्रिकाओं का संपादन भी भी किया है जिनमें प्रमुख हैं – बस्तर की मौखिक कथाएँ (लाला जगदलपुरी के साथ), घूमर (हल्बी साहित्य पत्रिका), प्रस्तुति और ककसाड़ (लघु पत्रिका)।


पुरस्कार एवं सम्मान :

  • वर्ष 2009 में छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य परिषद का उमेश शर्मा सम्मान 
  • वर्ष 2009 में दुष्यंत कुमार स्मारक संग्रहालय का आंचलिक साहित्यकार सम्मान 
  • वर्ष 2015 में छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण पंडित सुंदरलाल शर्मा साहित्य सम्मान 
  • वर्ष 2015 में वेरियर एल्विन प्रतिष्ठा अलंकरण और साहित्य अकादमी के भाषा सम्मान 

मृत्यु :
23 सितंबर, 2021 को 66 वर्ष की आयु में हरिहर वैष्णव की मृत्यु हो गई। 

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