बस्तर जिला Bastar Jila

बस्तर छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला और यह राज्य के पांच संभागो में से एक है। यह प्रदेश‌ की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है। बस्तर का ज़िला का मुख्यालय इंद्रावती नदी के मुहाने पर बसा जगदलपुर है। जगदलपुर एक प्रमुख सांस्कृतिक एवं हस्तशिल्प केन्द्र है। बस्तर अंचल में आयोजित होने वाला दशहरा छत्तीसगढ़ राज्य में आयोजित होने वाले पारंपरिक पर्वों में से सर्वश्रेष्ठ पर्व है।

1948  ई. में बस्तर राज्य का भारत संघ में विलय हुआ। इस समय प्रवीरचंद्र भंजदेव काकतीय शासक थे। 1981 ई. में बस्तर को संभाग का दर्जा मिला। इस संभाग के अंदर 7 जिले आते है। बस्तर जिले का संचालन व्यवस्थित रूप से हो सके इसके लिए 1997 ई. में इसमें से दो अलग ज़िले कांकेर और दंतेवाड़ा बनाए गए थे।

जनजसंख्या ( 2011 ई. ):
बस्तर ज़िले जनजसंख्या 834375  है। यह जिला 1023 लिंगानुपात के साथ छत्तीसगढ़ राज्य में पहले स्थान पर है। ज़िले की करीब 65 प्रतिषत ( स्थान 2 ) आबादी गौंड, मारिया-मुरिया, ध्रुव और हलबा जाति की है।

बस्तर का इतिहास:
यह पहले के दक्षिण कोसल नाम से जाना जाता था। परंपरागत रूप से यह क्षेत्र महाकाव्य रामायण में दंडकारण्य और महाभारत में कोशल राज्य के रूप में उल्लेखित है।

बस्तर के प्राचीन नाम के सम्बन्ध में अलग-अलग मत हैं। कई "चक्रकूट" तो कई उसेे "भ्रमरकूट" कहते हैं। नागवंशी राजा इसी "चक्रकूट" या "भ्रमरकूट" में राज्य करते थे। इस क्षेत्र पर नल, वाकाटक, नाग, छिन्दक-नाग, काकतीय वंशो ने शासन किया।

1948  ई. में बस्तर राज्य का भारत संघ में विलय हुआ। इस समय प्रवीरचंद्र भंजदेव काकतीय शासक थे।

पर्यटन
ख़ूबसूरत जंगलों और आदिवासी संस्कृति के रंगों से परिपूर्ण बस्तर जिला, प्रदेश‌ की सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर जाना जाता है।
पर्यटन स्थल - बस्तर महल, दलपत सागर, चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर और कैलाश‌ गुफ़ा।
तितली पार्क:- जगदलपुर से 6 किलोमीटर दूर स्थित आसना पार्क की 15 एकड़ वनभूूमि में तितली पार्क विकसित किये जाने की योजना 2016 से है।

नारायणपाल मंदिर 
पूरे बस्तर जिले का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान विष्णु की मूर्ति शामिल है। चिंदक राजवंश की रानी मुमुंददेवी द्वारा निर्मित, नारायणपाल मंदिर का वास्तुकला की चालुक्य शैली का प्रभाव है।
जगदलपुर के उत्तर-पश्चिमी तरफ, चित्रकोट झरने से जुड़ा हुआ, नारायणपाल नाम का एक गांव, इंद्रवती नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है। इस गांव में एक प्राचीन शानदार विष्णु मंदिर है जो 1000 साल पहले बनाया गया था और वास्तुकला का एक सुंदर आकृति है। विष्णु मंदिर इंद्रवती और नारंगी नदियों के संगम के निकट स्थापित किया गया है और यह 11 वीं शताब्दी तक है। आसपास के विष्णु मंदिर, मंदिर की स्थापना के बाद एक छोटे से गांव को नारायणपुर के रूप में नामित किया गया, इस बीच, इसे नारायणपाल के नाम से जाना जाने लगा।

जलप्रपात:
तामड़ा घुमर 
बस्तर प्रकृति की विशाल सुंदरता के लिए जाना जाता है। मारडूम के पास चित्रकोट के रास्ते पर, एक बारहमासी झरना है।

मेन्द्री घुमर जलप्रपात
मेन्द्री घुमर जलप्रपात विशाल चित्रकोट झरने के रास्ते पर एक सुंदर मौसमी झरना है।

चित्रधारा जलप्रपात
यह मौसमी झरना है। गर्मी के दिनों में इसकी सुंदरता काम हो जाती है।

चित्रकोट जलप्रपात 
भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर ज़िले में इन्द्रावती नदी पर स्थित एक सुंदर जलप्रपात है।