छत्तीसगढ़ के जलप्रपात

छत्तीसगढ़ के प्रमुख जलप्रपात :
तमरा घूमरा झरना (जगदलपुर), तीरथगढ़ जलप्रपात (जगदलपुर), चित्राशारा जलप्रपात (जगदलपुर), थमदा घूमर जलप्रपात (बस्तर), चित्रकोट (बस्‍तर), मेंद्री घूमर जलप्रपात (जगदलपुर), बोधघाट सात धारा (दंतेवाड़ा), मलांझ कुडुम (कांकेर), चर्रे-मर्रे जलप्रपात ( कांकेर ) अमृतधारा (कोरिया), रमदहा (कोरिया), गवरघाट (कोरिया), अकुरी नाला (कोरिया), स्वाई वाटरफॉल (सरगुजा), केंदई वाटरफॉल (सरगुजा), राजपुरी जलप्रपात (जशपुर), दनगिरी वाटरफॉल (जशपुर), रानीदाह वाटरफॉल (जशपुर), हरिमरका झरना (नारायणपुर - अबूझमाड़), दनगरी  जलप्रपात(जशपुर)हादावाड़ा जल प्रपात (नारायणपुर), सरभंजा (मैनपाट), देवधारा, घटारानी, जतमई (गरियाबंद), गुल्लू फॉल (जशपुर), झोझा जलप्रपात ( पेंड्रा - बिलासपुर ),

तीरथगढ़ जलप्रपात 

संछिप विवरण :
 
कांगेर धारा जलप्रपात : बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित इस जलप्रपात की ऊंचाई 20 फुट है। कांगेर घाटी से होकर गुजरने वाली कांगेर नदी पर स्थित है इस नदी के भैसादरहा नामक स्थान पर मगमच्छ प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं।

चित्रकोट जलप्रपात : जगदलपुर से 40 कि.मी. और रायपुर से 273 कि.मी. की दूरी पर इंद्रावती नदी पर स्थित जलप्रपात है। यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जलप्रपात है। यह 90 फुट ऊंचाई से नीचे गिरता है। पूर्ण पढ़ें

तीरथगढ़ जलप्रपात : यह जलप्रपात जगदलपुर से 29 किमी. दूरी पर  कांगेर घाटी में स्थित है । यह राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। यह जलप्रपात 300 फुट ऊपर से पानी नीचे गिरती है। यह छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा जलप्रपात है। तीरथगढ़ जलप्रपात को देखने का सबसे अच्छा समय बारिश के मौसम के साथ-साथ अक्टूबर से अपैल तक का है। पूर्ण पढ़ें

हाथीदरहा जलप्रपात : जगदलपुर से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है। गांव के निकट मटरानाला पर ऊंचाई से गहरी खाई में गिरने वाले इस जलप्रपात की खूबसूरती दूर-दूर तक फैली खाईयां और बढ़ा देती है । इस मेंदरी धूमर जलप्रपात भी कहा जाता है। पूर्ण पढ़ें

महादेव धूमर जलप्रपात : जगदलपुर से करीब 27 कि.मी. दूरी पर स्थित ग्राम मावलीभाठा में महादेव घूमर स्थित है । इसे पुजारी पारा जलप्रपात भी कहा जाता है । यह कई शिलाखंडों से होता हुआ 15-20 फुट ऊंचाई से गहरी खाई में चला जाता है।

गुप्तेश्वर जलप्रपात: बस्तर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 43 पर जगदलपुर से 22 किमी. दूरी पर सुुकमा जिले कोलाब(शबरी) नदी पर गुप्तेश्वर नामक स्थान पर यह सुन्दर जलप्रपात स्थित है।

चित्रधारा जलप्रपात : बस्तर जिले में जगदलपुर से 13 कि.मी. दूर करंजी गांव के समीप एक पहाड़ी से खंड-खंड में गिरते पानी वाला यह आकर्षक जलप्रपात है। 

सतधारा/सप्तधारा जलप्रपात : दन्तेवाड़ा में इंद्रावती नदी पर स्थित सप्तधारा जलप्रपात छत्तीसगढ़ का अत्यंत रमणीय पर्यटन स्थल है । यह जलप्रपात बोधघाट पहाड़ी से गिरते हुए क्रमश: बोध धारा, कपिलधारा पाण्डव धारा, कृष्णधारा शिव,धारा बाणधारा और शिवार्चन धारा नामक सात धाराओं का निर्माण करता है। सघन वन में होने के कारण सतधारा जलप्रपात की रमणीयता और भी बढ़ जाती है। 

तामड़ा जलप्रपात : यह जलप्रपात बस्तर जिले के चित्रकोट के तीन कि.मी. पहले दक्षिण-पश्चिम दिशा में तामड़ा बहार नदी पर स्थित है यहां का पानी करीब 125 फुट की ऊंचाई से नीचे गिरता है।

रानीदरहा जलप्रपात : यह जलप्रपात दंतेवाड़ा जिले की कोंटा तहसील में स्थित है। विकासखंड मुख्यालय छिंदगड़ से 30 कि.मी. दूरी पर शबरी पार गांव के समीप स्थित है। रानी दरहा के आसपास शबरी नदी का जल गहरा होने के कारण धसा हुआ नजर आता है। 

चर्रे-मर्रे जलप्रपात : कांकेर जिले में अंतागढ़-आमाबेड़ा वनमार्ग पर पिंजारिन घाटी में यह जलप्रपात स्थित है । उत्तर पश्चिम दिशा में जलप्रपात का गिरता हुआ पानी अलग-अलग कुंडों के रूप में एकत्रित होकर दक्षिण दिशा में लंबा फासला तय कर कोटरी नदी में मिलता है ।

मलजकुण्डलम जलप्रपात : यह जल प्रपात कांकेर जिला मुख्यालय से दक्षिण-पश्चिम में 17 कि.मी. की दूरी पर दूधनदी पर स्थित है। यहां पहाड़ी पर स्थित एक कुंड से नीचे गिरती जलधारा अलौकिक दृश्य पैदा करती है। साफ-सुथरा जल नीचे गिरते समय दूधिया धारा का अहसास कराता है। 

खुरसेल जलप्रपात : नारायणपुर जिले में स्थित खुरसेल घाटी अंग्रेजों के जमाने से अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्घ रहा है । यहां गुड़ाबेड़ा से करीब 9 कि.मी. की दूरी पर स्थित खुरसेल जलप्रपात में करीब 400 फुट की ऊंचाई से गिरते हुए कई खण्डों में कुण्डों का निर्माण करता हुआ। यहां एक ओर वृहत आकार के शिलाखण्डों की सुदरता है तो दूसरी ओर तेज चट्टानी ढाल से नीचे गिरता पानी । 

मल्गेर इंदुल जलप्रपात : यह जलप्रपात दंतेवाड़ा के कोंटा तहसिल में स्थित है । बैलाडीला पहाडिय़ों से निकलने वाली मल्गेर नदी पर स्थित इस पर्वतीय जलप्रपात का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है।

बोग्तुम जलप्रपात: दंतेवाड़ा जिले में भोपालपटनम् के निकट पोड़सपल्ली गांव की पहाडिय़ों मेंस्थित है।

झोझा जलप्रपात: यह जलप्रपात बिलासपुर जिले में पेंड्रा से 35 बस्तिबगरा मुख्य मार्ग पर झोझा ग्राम में स्थित है। इस जलप्रपात तक जाने के लिए कोई मार्ग नहीं है। यहां पहुचने के लिए करीब 1 किलोमीटर का रास्ता पैदल ही चलना पड़ता है।

पुलपाड़ इंदुल जलप्रपात : बैलाडीला से पहले दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से सुकमा मार्ग पर नकुलनार के निकट पुलपाड़ गांव में स्थित झरना को पुलपाड़ इंदुल के नाम से जाना जाता है । यहां पहाडिय़ों से गिरती कई धाराओं में बंटी जलराशि जलप्रपात के सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देती है ।

केंदई जलप्रपात: कोरबा जिले के साल के घने वन प्रदेश से घिरे केन्दई गांव में यह जल प्रपात स्थित है यहां एक पहाड़ी नदी करीब 200 फुट की ऊंचाई से नीचे गिरकर इस जलप्रपाच का निर्माण करती है। इस जलप्रपात को पास में स्थित विशाल शिलाखंड से इस जलप्रपात को देखना एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है । 

कोठली जलप्रपात : अंबिकापुर के विख्यात दर्शनीय स्थल डीपाडीह से 15 कि.मी. दूर उत्तरीदिशा में यह जलप्रपात स्थित है । कन्हार नदी में स्थित कोठली जलप्रपात अपने प्राकृतिक सौंदर्य के कारण बरबस ही अपनी ओर ध्यान खींच लेता है । 

अमृतधारा जलप्रपात: कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ तहसील में यह मनोहारी जलप्रपात स्थित है। यहां कोरिया की पहाडिय़ों से निकलने वाली हसदो नदी अमृतधारा जलप्रपात का निर्माण करती है। इसकी ऊंचाई 90 फिट है।इस जलप्रपात का पानी स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायी होने के कारण इस जलप्रपात का अपना महत्व है।

शिव मंदिर:
अमृतधारा जल प्रपात के पास स्थित शिव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। इस जगह के आस-पास महाशिवरात्रि के अवसर पर एक बहुत प्रसिद्ध मेला हर साल आयोजित किया जाता है। जिसका आयोजन कोरिया राज्य के राजा रामानुज प्रताप सिंह जूदेव ने वर्ष 1936 में किया गया था।

रक्सगण्डा जलप्रपात : यह प्रसिद्घ जलप्रपात सरगुजा जिले के नलंगी नामक स्थान पर रेहन्द नदी पर स्थित है। यहां नदी का पानी ऊंचाई से गिरकर एक संकरे कुण्ड में समाता है । इस कुण्ड की गहराई बहुत अधिक है। इस कुण्ड से 100 मीटर लंबी सुरंग निकलती है। यह सुरंग जहां समाप्त होती है वहां से रंग-बिरंगा पानी निकलता रहता है। अपनी इस विचित्रता के कारण यह जलप्रपात लोगों को एक अनोखे प्राकृतिक सौंदर्य का अहसास कराता है। 

रानीदाह जलप्रपात : यह जलप्रपात जशपुर जिला मुख्यालय से 15 कि.मी. की दूी पर स्थित है। इस जलप्रपात के समीप प्रसिद्घ महाकालेश्वर मंदिर और ऐतिहासिक स्थल पंचमैया होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी है । रानीदाह जलप्रपात जून से फरवरी तक चालू रहता है।

राजपुरी जलप्रपात : जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड मुख्यालय से 3 कि.मी. की दूरी पर यह जलप्रपात स्थित है । यह बारहमासी जलप्रपात है, इसलिए गरमी के दिनों में इसकी सुंदरता बरकरार रहती है। परंतु बारिश के मौसम में इसका प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर जाता है।

दमेरा जलप्रपात : जशपुर जिले से आठ किमी. की दूरी पर स्थित श्री नाला पर स्थित है दमेरा जलप्रपात । नैसर्गिक खूबसूरती वाले इस जलप्रपात को निहारने का सबसे अच्छा समय जुलाई से दिसंबर तक है। 

कुन्दरू घाघ: सरगुजा जिले की स्थानीय बोली में जलप्रपात को घाघी कहा जाता है। पिंगला नदी जो तामोर पिंगला अभयारण्य के हृदय स्थल से प्रवाहित होती है, इसमें कुदरू घाघ एक मध्य ऊँचाईका सुन्दर जल प्रपात रमकोला से 10 कि.मी.की दूरी पर घने वन के मध्य में स्थित है। यह जल प्रपात दोनों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है। यह स्थल पारिवारिक वन भोज के लिए मनमोहक, दर्शनीय एवं सुरक्षित सुगम पहुंच योग्य है। 

गोडेना जलप्रपात : बीजापुर जिले में पामेड़ अभयारण्य के अंतर्गत यह जलप्रपात कर्रलाझर से 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

नीलकंठ जलप्रपात बसेरा : यह जलप्रपात गुरूघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत सघन वन से घिरा हुआ है यहां लगभग 100 फुट की ऊँचाई से पानी नीचे गिरता है । यहां स्थित विशाल शिवलिंग भी आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है। 

पवई जलप्रपात : सरगुजा जिलें में सेमरसोत अभयारण्य में यह जलप्रपात चनान नदी पर स्थित है । यह जलप्रपात लगभग 100 फुट से भी ज्यादा ऊँचाई से गिरता है। बलरामपुर से जमुआटांड तक वाहन से जाया जा सकता है। 

बेनगंगा जलप्रपात : सुरगुजा जिले में  बेनगंगा नदी पर कुसमी के निकट स्थित है। 

भेड़िया पत्थर जलप्रपात : सुरगुजा जिले में कुसमी चान्दो मार्ग पर 30 कि.मी. की दूरी पर ईदरी ग्राम से 3 कि.मी. दूर जंगल के बीच भेडिय़ा नाला में यह जलप्रपात स्थित है। इसकी ऊंचाई करीब 200 फिट है। पूर्ण पढ़ें 

रानी दहरा : कबीरधाम जिला मुख्यालय से जबलपुर मार्ग पर करीब 35 कि.मी. दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र भोरमदेव के अंतर्गत आता है। रानीदहरा मैकल पर्वत के आगोस में स्थित है। तीनों ओर पहाड़ों से घिरे इस स्थान पर करीब 90 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। रियासतकाल में यह स्थल राजपरिवार के लोगों का प्रमुख मनोरंजन स्थल हुआ करता था।

सेदम जलप्रपात / राम झरना : यह झरना अंबिकापुर-रायगढ़ मार्ग पर अंबिकापुर से 45 कि.मी. की दूरी पर सेदम नामक गांव से 2 कि.मी. की दूरी पर पहाडिय़ों के बीच स्थित है इसे राम झरना के नाम से भी जाना जाता है। यहां स्थित शिव मंदिर में प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि पर मेला लगता है।

कच्चापाल जलप्रपात:
यह जलप्रपात नारायणपुर जिले में नारायणपुर से करीब 47 किमी दूर कच्चापाल गांव में यह जलप्रपात है। कच्चापाल गांव से करीब 4 किमी की दूरी पर स्थित एक पहाड़ी नाले का पानी करीब 70 फीट ऊंचे पहाड़ से जल कुंड में गिर कर इस जलप्रपात का निर्माण करता है।

Last Update : 13 जुलाई 2019