छत्तीसगढ़ में व्यक्तिगत सत्याग्रह : Individual Satyagraha in Chhattisgarh


बम्बई अधिवेशन 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह को स्वीकृति मिलने के बाद अक्टूबर 1940 में महात्मा गांधी जी के द्वारा व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत हुई। विनोबा भावे भारत के प्रथम सत्याग्रही बने।

छत्तीसगढ़ में 27 नवंबर 1940 ई. को पण्डित रविशंकर शुक्ल के द्वारा रायपुर में व्यक्तिगत सत्याग्रह की सुरुवात की गई। महाकौशल क्षेत्र में करीब 500 सत्याग्रही थे।
गिरफ्तार सभी सत्याग्रहियों को 3 दिसंबर 1941 को रिहा कर दिया गया।

>>भारत में व्यक्तिगत सत्याग्रह

रायपुर:
पं. रविशंकर शुक्ल जी छत्तीसगढ़ के प्रथम सत्याग्रही थे। शुक्ल जी की गिरफ्तार कर एक वर्ष की सजा सुनाई गई। उनके गिरफ्तारी के बाद करीब 74 लोगो ने सत्याग्रह किया।
इस समय काल में ही 1940 ई. में रायपुर कांग्रेस भवन का निर्माण किया गया जिसका उद्दघाटन सरदार वल्लभ भाई पटेल के द्वारा किया गया।

बिलासपुर:
बिलासपुर के प्रमुख सत्याग्रही थे, यदुनंदन प्रसाद श्रीवास्तव, ज्वाला प्रसाद मिश्र, बैरिस्टर छेदिलाल, किशनचंद कायस्थ, आर. पी. रॉय तथा रामगोपाल तिवारी।

दुर्ग:
दुर्ग के प्रमुख सत्याग्रही, रत्नाकर झा, घनश्याम सिंह गुप्त, रामकुमार सिंगरौल, वाई. व्ही. तामस्कर, मोहनलाल बाकलीवाल।


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