भारतीय दंड संहिता 1860


भारतीय दंड संहिता 1860 को 6 अक्टूबर  1860 को (1860 का अधिनियम सं. 45) अधिनियमित किया गया था। यह 1 जनवरी 1862 से प्रवृत्त हुआ। भारतीय दंड संहिता या Indian Panel Code में कुल इसमें कुल 511 धाराएँ (sections) तथा कुल 23 अध्याय है।
भारतीय दंड संहिता जम्मू और कश्मीर राज्य तथा भारतीय सेना पर लागू नहीं होती हैं, इनको छोडकर सम्पूर्ण भारत देश में ये प्रभावी हैं। जम्मू एवं कश्मीर में 'रणबीर दण्ड संहिता' (RPC) लागू होती है।

अध्याय एवं धाराएं
अध्याय-1 धारा 1 से धारा 5-प्रारंभिक
अध्याय-2 धारा 6 से धारा 52- साधारण स्पष्टीकरण
अध्याय-3 धारा 53 से धारा 75-दण्डों के विषय में
अध्याय-4 धारा 76  से धारा 106-साधारण अपवाद
अध्याय-5 धारा 107 से धारा 120-दुष्प्रेरण व आपराधिक षड्यंत्र के विषय में
अध्याय-6 धारा 121 से धारा 130-राज्य के विरुद्ध अपराधों के विषय में
अध्याय-7 धारा 131 से धारा 140-सेना, नौसेना और वायु सेना से संबंधित अपराधों के विषय में
अध्याय-8 धारा 141 से धारा 160-लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराधों के विषय में
अध्याय-9 धारा 161 से धारा 171-लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों तथा  निर्वाचन संबंधी अपराधों के विषय में 
अध्याय-10  धारा 172 से धारा 190- लोकसेवको के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में .
अध्याय-11 धारा 191 से धारा 229-मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के विषय में
अध्याय-12 धारा 230 से धारा 263-सिक्कों और सरकारी स्टाम्पों से संबंधित अपराधों के विषय में
अध्याय-13 धारा 264 से धारा 267-बाटों और मापों से संबंधित अपराधों के विषय में
अध्याय-14 धारा 268 से धारा 294- लोक स्वास्थ्य ,क्षेम ,सुविधा ,शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में
अध्याय-15 धारा 295 से धारा 298- धर्म से संबंधित अपराधों के विषय में
अध्याय-16 धारा 299 से धारा 377-मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले और जीवन के लिए संकटकारी अपराधों के विषय में ,
अध्याय-17 धारा 378 से धारा 462- संपति के विरुद्ध और चोरी के अपराधों विषय में 
अध्याय-18 धारा 463 से धारा 489-दस्तावेजो और संपति चिन्हों  संबंधी अपराधों के विषय में
अध्याय-19 धारा 490 से धारा 492- सेवा संविदाओं के आपराधिक भंग के विषय में
अध्याय-20 धारा 493 से धारा 498-  विवाह संबधी अपराधों के विषय में
सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार-रोधी कानून IPC 497 को सितंबर 2018 को रद्द कर दिया है।
अध्याय-21  धारा 499 से 502-मानहानि के विषय में
अध्याय-22  धारा 503 से 510-आपराधिक अभित्रास , अपमान और क्षोभ के विषय में
अध्याय-23 ,धारा 511-अपराधों को करने के प्रयत्नों के विषय में

गैर जमानती धाराएं
107 - किसी बात का दुष्प्रेरण। इसमे सजाअपराध पर निर्भर करता है।
120B - आपराधिक षड्यंत्र का दंडअपराध पर निर्भर जैसे कि हत्या का अपराध। इसमे सजाअपराध पर निर्भर करता है।
121 - भारत सरकार के खिलाफ युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयास करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना। इसमे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक के लिए कारावास एवं जुर्माना।
124A - राज्यद्रोह। इसमे आजीवन कारावास और जुर्माना अथवा 3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना अथवा जुर्माना।
131 - विद्रोह का दुष्प्रेरण या किसी सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना। इसमे आजीवन कारावास अथवा 10 वर्ष का कारावास जुर्माने के साथ।
172 - समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना। इसमे1 माह का कारावास एवं 1000 रूपय का जुर्माना।
232 - भारतीय सिक्के का कूटकरण। इसमेआजीवन कारावास या 10 साल का कारावास जुर्माने के साथ।
238 - भारतीय सिक्के की कूटकृतियों का आयात या निर्यात। इसमे आजीवन कारावास या 10 साल का कारावास जुर्माने के साथ।
246 - कपटपूर्वक या बेईमानी से सिक्के का वज़न कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना। इसमे 3 साल का कारावास जुर्माने के साथ।
255 - सरकारी स्टाम्प का कूटकरण। इसमे 3 साल का कारावास जुर्माने के साथ।
272 - विक्रय के आशयित खाद्य या पेय का अपमिश्रण। इसमें6 माह का कारावास एवं 1000 रुपय का जुर्माना।
295 - किसी वर्ग के धर्म का अपमान  करने के  आशय से उपासना स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना। इसमें 2 वर्ष का कारावास और जुर्माना
295A - विमशिर्त या विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी ब=वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आर आशय से किए गए हों। इसमे3 वर्ष का कारावास और जुर्माना।
302 - हत्या के लिए दंड। इसमे आजीवन कारावास या मृत्यु की सज़ा।
304B - दहेज मृत्यु। इसमें 7 वर्ष या आजीवन कारावास।
306 - आत्महत्या का दुष्प्रेरण। इसमे10 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
307 - हत्या करने का प्रयास। इश्मे 10 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
308 - आपराधिक मानव वध करने का प्रयत्न। इसमे3-7 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
369 - दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण। इसमे 7 माह का कारावास अथवा जुर्माना सहित।
370 - दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या व्ययन करना। इसमे 7-10 वर्ष का कारावास अथवा जुर्माना सहित।
376 - ब्लात्संग के लिए दण्ड। इसमें आजीवन कारावास या न्यूनीतम 7 वर्ष का कारावास।
377 - प्रकृति विरुद्ध अपराधगैर-ज़मानती10 वर्ष का कारावास जो आजीवन कारावास भी किया जा सकता है।
नोट: समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाली धारा 377 से बाहर कर दिया है। (September 06, 2018)
379 - चोरी के लिए दण्ड3 वर्ष का कारवास एवं जुर्माना।
384 - उद्यापन के लिए दण्ड3 वर्ष का कारावास।
392 - लूट के लिए दण्ड 3 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
395 - डकैती के लिए दण्ड10 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
406 - आपराधिक न्यायसभंग के लिए दण्ड। इसमें 3 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
411 - चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना। इसमें 3 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
420 - छल मारना और संपत्ति परिदत्त करने केआर लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना। इसमें7 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
489A - करेंसी नोटों या बैंक नोटों का कूटिकरण। इसमें आजीवन कारावास एवं जुर्माना।
498A- किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना। इसमे 3 वर्ष का कारावास एवं जुर्माना।
नोट : 498 A दहेज प्रताड़ना मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में गिरफ्तारी हो या नहीं ये तय करने का अधिकार पुलिस को दे दिया है। (September 14, 2018)

महिलाओ के लिए
धारा 294 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थान पर बुरी गालियां देना, अश्लील गाने गाना जो कि सुनने पर बुरे लगें का दंडनीय प्रावधान हैं।
धारा 354 के अंतर्गत महिला की लज्जाशीलता भंग करने के लिए उसके साथ बल का प्रयोग करना।
धारा 363 के अंतर्गत विधिपूर्ण संरक्षण से महिला का अपहरण करना।
धारा 364 के अंतर्गत हत्या करने के उद्देश्य से महिला का अपहरण करना।
धारा 366 के अंतर्गत किसी महिला को विवाह करने के लिए विवश करना या उसे भ्रष्ट करने के लिए अपहरण करना,
धारा 371 के अंतर्गत किसी महिला के साथ दास के समान व्यवहार।
धारा 372 के अंतर्गत वैश्यावृत्ति के लिए 18 वर्ष से कम आयु की बालिका को बेचना या भाड़े पर देना। ऐसे प्रकरणों पर विचार न्यायालय द्वारा बंद कमरे में धारा 372 (2) द.प्र.सं. के अंतर्गत किया जाए।
नोट: 'बलात्कार करने के आशय से किए गए हमले से बचाव हेतु हमलावर की मृत्यु तक कर देने का अधिकार महिला को है' (धारा 100 भा.द.वि. के अनुसार)।
धारा 114 (ए) के अनुसार बलात्कार के प्रकरण में न्यायालय के समक्ष पीड़ित महिला यदि यह कथन देती है कि संभोग के लिए उसने सहमति नहीं दी थी, तब न्यायालय यह मानेगा कि उसने सहमति नहीं दी थी। इस तथ्य को नकारने का भार आरोपी पर होगा।
धारा 376 क में पुरुष द्वारा अपनी पत्नी से अलग रहने के दौरान संभोग करने पर 2 वर्ष का कारावास अथवा सजा या दोनों का प्रावधान रखा गया है।
धारा 376 (ख) में लोक सेवक द्वारा उसकी अभिरक्षा में स्थित स्त्री से संभोग करने पर 5 वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों।
धारा 376 (ग) में कारागार या सुधार गृह के अधीक्षक द्वारा संभोग करने पर 5 वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान।
धारा 32 (1) में मरे हुए व्यक्ति (स्त्री) के मरणासन्न कथनों को न्यायालय सुसंगत रूप से स्वीकार करता है बशर्ते ऐसे कथन मृत व्यक्ति (स्त्री) द्वारा अपनी मृत्यु के बारे में या उस संव्यवहार अथवा उसकी किसी परिस्थिति के बारे में किए गए हों, जिसके कारण उसकी मृत्यु हुई हो।


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