पानीपथ की लड़ाई

पानीपत की पहली लड़ाई (1526);
पानीपत का पहला युद्ध 21, अप्रैल 1526 को काबुल के तैमूरी शासक ज़हीर उद्दीन मोहम्मद बाबर, की सेना ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोधी के मध्य लड़ा गया था और इसने इस इलाके में मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी।
यह उन पहली लड़ाइयों मे से एक थी जिसमें बारूद, आग्नेयास्त्रों और मैदानी तोपखाने को लड़ाई में शामिल किया गया था।
इस युद्ध में बाबर की सेना ने दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान इब्राहिम लोधी को युद्ध में परास्त किया। युद्ध 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के निकट लड़ा गया था। पानीपत वो स्थान है जहाँ बारहवीं शताब्दी के बाद से उत्तर भारत के नियंत्रण को लेकर कई निर्णायक लड़ाइयां लड़ी गयीं।

पानीपत की दूसरी लड़ाई (1556):
पानीपत का दूसरा युद्ध 5 नवम्बर 1556 को उत्तर भारत के हिंदू शासक सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य ( हेमू ) और अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था। अकबर के सेनापति खान जमान और बैरम खान के लिए यह एक निर्णायक जीत थी।
इस युद्ध के फलस्वरूप दिल्ली पर वर्चस्व के लिए मुगलों और अफगानों के बीच चलने वाला संघर्ष अन्तिम रूप से मुगलों के पक्ष में निर्णीत हो गया और अगले तीन सौ वर्षों तक मुगलों के पास ही रहा।

पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) :
पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी 1761 को अहमद शाह अब्दाली और मराठों के बीच लड़ा गया। यह युद्ध 18वी सदी का सबसे बड़ा युद्ध माना गया है। इसमे मराठो की हार हुई।


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