क्या है वन चाईना (One China) पॉलिसी ?




चीन की सरकार, सांस्कृतिक और भाषाई समानता वाले ताइवान को "वन चाइना पॉलिसी" के तहत अलग देश नहीं बल्कि अपना हिस्सा मनता है। वर्ष 1949 में बना पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) ताइवान को अपना प्रांत मानता है। इस पॉलिसी के तहत मेनलैंड चीन और हांगकांग-मकाऊ जैसे दो विशेष रूप से प्रशासित क्षेत्र आते हैं।
चीन से अलग होने के बावजूद, ताइवान खुद को आधिकारिक तौर पर रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC) कहता है। 
चीन की वन चाइना पॉलिसी के मुताबिक चीन से कूटनीतिक रिश्ता रखने वाले देशों को ताइवान से संबंध तोड़ने पड़ते है। वर्तमान में चीन के 170 से ज्यादा कूटनीतिक साझेदार जबकि ताइवान के केवल 22 साझेदार है।

चीन और ताइवान विवाद:
चीन और ताइवान के बीच विवाद, वर्ष 1927 में चीन के सिविल वॉर के समय से ही चल रहा है। सिविल वॉर की वजह से सेनाओं ने चीन की कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया और यह गठबंधन नेशनलिस्‍ट क्‍यूमिनटैंग आर्मी (KMT) के विरोध में हुआ था। 1949 में में जब चीन का सिविल वॉर खत्‍म हुआ तक वन चाइना पॉलिसी अस्तित्‍व में आई। हारे हुए देश के लोगों को क्‍यूओमिनटैंग कहा गया और ये ताइवान चले गए। यहां पर इन्‍होंने अपनी सरकार बना ली जबकि जीती हुई कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी चीन पर शासन कर रही थी। दोनों ही पक्षों का कहना था कि वे चीन का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। 

भारत FPI ( Foreign portfolio investment ) 2020 :
भारत सरकार चीनी कंपनीयों द्वारा FPI निवेश को लेकर बनाए जा रहे नए कानूनों के दायरे से ताइवान को बाहर रखने जा रही है। यानि भारत मेनलैंड चाइना के लोगों को भारत में निवेश करने से रोकेगी, लेकिन ताइवान के लोगों पर निवेश से संबन्धित कड़े कानून लागू नहीं होंगे। 



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