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भारत में परमाणु ऊर्जा का इतिहास

प्रतीकात्मक फोटो


भारत में डा. होमी जहांगीर भाभा को भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का जनक माना जाता है। इनकी के प्रयासों की वजह से ही वर्ष 1948 में भारत में परमाणु ऊर्जा अनुसंधान केन्द्र की स्थापना की गयी थी। भारत में परमाणु विद्युत उत्पादन हेतु नीति निर्माण के कार्यों के लिए "परमाणु ऊर्जा आयोग" की स्थापना वर्ष 1948 में की गयी।

परमाणु ऊर्जा से विद्युत उत्पादन प्रारम्भ करने हेतु "परमाणु ऊर्जा विभाग" की स्थापना वर्ष 1954 में की गयी थी। वर्ष 1954 में परमाणु ऊर्जा पर अनुसंधान हेतु भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर(BARC) की स्थापना मुम्बई के ट्राम्बे में की गयी। इसके बाद भारत का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर "अपसरा" स्थापित किया गया।


परमाणु ऊर्जा आयोग :

भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग पहली बार "वैज्ञानिक अनुसंधान" विभाग में अगस्त 1948 में स्थापित किया गया था, जिसे कुछ महीने पहले जून 1948 में बनाया गया था। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्थापना 3 अगस्त, 1954 को राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से थी। इसके बाद, 1 मार्च, 1958 के एक सरकारी संकल्प के अनुसार, परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) परमाणु ऊर्जा विभाग में स्थापित किया गया था। प्रधानमंत्री (दिवंगत पंडित जवाहरलाल नेहरू) ने भी 24 मार्च, 1958 को लोकसभा के पटल पर इस प्रस्ताव की एक प्रति रखी थी।


संयंत्र :

भारत में प्रथम परमाणु विद्युत संयंत्र की स्थापना USA की सहायता से वर्ष 1969 में महाराष्ट्र के तारापुर में की गयी थी। 

परमाणु विद्युत गृहों के सुरक्षित संचालन एवं भारत सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के अनुसरण में बिजली उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लागू करना हेतु वर्ष 1987 में "न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया(NPCIL) की स्थापना की गयी।

भारत में वर्तमान में कुल 8 परमाणु विद्युत गृह है। इन 8 विद्युत गृहों में 22 परमाणु रिएक्टर सक्रीय है।

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