भारत की जनजातियां – Tribes of India

 


वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या 10,42,81,034 है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत है। प्रारूप राष्ट्रीय जनजातीय नीति, 2006 के अनुसार भारत में कुल अनुसूचित जनजातियों की संख्या 698 है।

भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत की जनजातियों को पांच भागों में विभाजित किया जा सकता है।

  1. पूर्वोत्तर क्षेत्र
  2. मध्य क्षेत्र
  3. दक्षिण क्षेत्र
  4. पश्चिम क्षेत्र
  5. द्वीप – समूह क्षेत्र


1. पूर्वोत्तर क्षेत्र : पूर्वोत्तर क्षेत्र में कश्मीर, शिमला, लेह, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, लूसाई की पहाड़ियां, मिसमी असाम, नेचा तथा सिक्किम का इलाका आता है। इस क्षेत्र में लिम्बू लेपचा, कुकी, चकमा, लूसाई, गुरड, आका, दपला, अवस्मीरी मिश्मी, रामा, कचारी, गोरो, खासी, नागा आदि प्रमुख जनजातियाँ होती है।


2. मध्य क्षेत्र : इस क्षेत्र में बंगाल मध्य क्षेत्र में बंगाल, बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा का इलाका जा जाता है। यह सबसे बड़ा जनजाति क्षेत्र है। इसके अंतर्गत, मध्य प्रदेश में गोंड, उड़ीसा के कांध और खड़िया, गंजाम के सावरा, गदब और बाँदा, बस्तर (छत्तीसगढ़) के मूरिया और मरिया, बिहार के उराँव, मुंडा, संथाल, हो विरहोर, सौरिया पहाड़िया, खड़िया, आदि जनजातियाँ हैं।


3. दक्षिण क्षेत्र : इस क्षेत्र में दक्षिणी आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, तमिलनाडु, केरल आदि का हिस्सा आता है। इस क्षेत्र में निवास करने वाली प्रमुख जनजातियाँ है हैदराबाद में चेचू, निलगिरी के टोडा, वायनाड के परियां, ट्रावनकोर - कोचीन के कादर, कणीदर तथा कुरावन आदि जनजातियाँ हैं।


4. पश्चिम क्षेत्र : उपर्युक्त तीन क्षेत्रों के अतिरिक्त पश्चिम क्षेत्र में भी कुछ जनजातियाँ है। उसमें राजस्थान के भील प्रमुख हैं। कुछ जनजातियाँ ऐसी हैं जो खाना बदोस का जीवन व्यतीत करती हैं।


5. द्वीप समूह क्षेत्र : अंडमान निकोबार आदि द्वीपों में रहने वाली जनजातियों को इसी क्षेत्रों में रखा जाएगा। 1955 के पहले तक इन्हें जनजाति के अंतर्गत नहीं रखा जाता था परंतु उसके बाद पिछड़ी जातियों के आयोग की अनुशंसा पर इन्हें भी जनजाति माल लिया गया। वर्तमान अंडमान निकोवार में अंडमानी, जखा, सोयपेन एवं आगे जनजाति आदि प्रमुख हैं।


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