समझिए "स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट" को – let's Understand the Starlink satelite internet



एलन मस्क ने हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए स्टारलिंक की शुरुआत की थी। इस तकनीक में डाउनलोड 50 एमबीपीएस से 150 एमबीपीएस के बीच है। स्टारलिंक के माध्यम से हम इंटरनेट का इस्तेमाल धरती के लगभग किसी भी हिस्से से कर सकते है।

यह कैसे काम करती है ?

इस तकनीक में इंटरनेट की सेवा अंतरिक्ष में स्थापित सैटेलाइट के माध्यम से दी जाती है। इस प्रकार की तकनीक का उपयोग सैटेलाइट टीवी (d2h) देखने और GPS लोकेशन लेने में हम कर ही रहे हैं।

चूंकि पारंपरिक सैटेलाइट्स बहुत दूर होते हैं, इस वजह से उससे ली जाने वाली सर्विसेस सीमित होती हैं। इस वजह से सैटेलाइट से ब्रॉडबैंड इंटरनेट देने के लिए मस्क की कंपनी ने सैटेलाइट्स को लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO–2,000 km) में स्थापित किया है। ये सैटेलाइट्स डेटा ट्रांसमिट करने के लिए लेकर का इस्तेमाल करते है। यह फाइबर ऑप्टिक ब्रॉडबैंड की तरह ही है, जिसमें लाइट की स्पीड से डेटा ट्रैवल करता है। ये लेजर का सिग्नल अच्छा मिलना चाहिए, इसके लिए एक सैटेलाइट अपने पास के चार अन्य सैटेलाइट्स से जुड़कर एक नेटवर्क बनाता है। वह सैटेलाइट फिर चार अन्य सैटेलाइट्स से जुड़ा होता है। इस तरह से सैटेलाइट्स का नेटवर्क बन जाता है, जो हाई स्पीड इंटरनेट दे सकता है।


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