मातृभाषा क्या होता है और मातृभाषा दिवस क्यों मनाया जाता है?


किसी व्यक्ति को जन्म के बाद जिस पहली भाषा से अवगत कराया जाती है। उसे मातृभाषा, L1, पहली भाषा या बोली (Native language or Mother tongue) कहा जाता है। कुछ देशों में, मूल भाषा या मातृभाषा शब्द किसी की पहली भाषा के बजाय किसी के जातीय समूह की भाषा या बोली के रूप में संदर्भित किया जाता है। 

भारत की नई शिक्षा नीति 2020 में पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की बात कही गई है।


द्विभाषावाद (Bilingualism):

यदि एक व्यक्ति को द्विभाषी तब बोला जा सकता है जब वह व्यक्ति दो भाषाओं में समान रूप से कुशल हैं। कोई व्यक्ति जो हिंदी बोलते हुए बड़ा होता है और फिर चार साल तक अंग्रेजी सीखता है, यदि वह दोनों भाषाओं को समान प्रवाह के साथ बोलते हैं तो वह व्यक्ति द्विभाषी होता है।


मातृभाषा दिवस (International Mother Language Day) क्यों मनाया जाता है ?:

दुनिया के लोगों द्वारा उपयोग की जाने वाली सभी भाषाओं के संरक्षण और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 17 नवंबर, 1999 को, यूनेस्को ने 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में नामित किया है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का विचार बांग्लादेश की पहल पर की गई थी। बांग्लादेश में, 21 फरवरी बांग्ला भाषा की मान्यता के लड़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण दिवस है।

वर्ष 1948 में, पाकिस्तान सरकार ने उर्दू को पाकिस्तान की राष्ट्रीय भाषा घोषित किया, जिसका पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के लोगों ने विरोध किया, क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान की अधिकांश आबादी की मातृ भाषा बांग्ला थी। उन्होंने उर्दू के अलावा बांग्ला को राष्ट्रीय भाषाओं में से एक बनाने के लिए आंदोलन सुरु कर दिया। इस मांग को 23 फरवरी 1948 को पूर्वी पाकिस्तान के धीरेंद्रनाथ दत्ता ने पाकिस्तान की संविधान सभा में उठाई थी।

तत्कालीन पाकिस्तान सरकार ने इस विरोध को दबाने के लिए सार्वजनिक जनसभा और रैलियों को गैरकानूनी घोषित कर दिया। जिसके विरोध में ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने आम जनता के समर्थन से विशाल रैलियों और सभाओं का आयोजन किया। 21 फरवरी, 1952 को पुलिस ने रैलियों पर गोलियां चलाईं। इस फायरिंग में कई छात्र मारे गए और सैकड़ो छात्र घायल हो गए। यह इतिहास की एक दुर्लभ घटना थी, जिसमे लोगों ने अपनी मातृभाषा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

यह नरसंहार ढाका मेडिकल कॉलेज और ढाका में रमना पार्क के पास हुआ। 23 फरवरी को ढाका मेडिकल कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों द्वारा एक अस्थायी स्मारक बनाया गया था, लेकिन जल्द ही 26 फरवरी को पाकिस्तानी पुलिस बल द्वारा इस स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया। बांग्लादेश के पृथक होने के बाद वर्ष 1983 में बांग्लादेश सरकार के द्वारा एक स्मारक का निर्माण किया गया।

बांग्लादेशी अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस को अपने दुखद दिनों में से एक के रूप में मनाते हैं। वे इस दिन शहीद मीनार का दौरा करते हैं।


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