कुयली (Kuyili) पहली महिला शहीद और पहली आत्मघाती हमलावर



कुयली (Kuyili) एक कमांडर थी, जिन्होंने 18वीं शताब्दी में रानी वेलु नचियार के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ अभियानों में भाग लिया था। वेलु नचियार भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ युद्ध छेड़ने वाली पहली भारतीय रानी थींकुयली को भारतीय इतिहास में "पहली आत्मघाती हमलावर" और "पहली महिला शहीद" के रूप में जाना जाता है।


जीवन:

कुयली (Kuyili) के जीवन के संबंध में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। उनका जन्म शिवगंगा राज्य के एक सामान्य दलित किसान परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम राकू और पिता का नाम पेरियामुथन था। कुयली की माँ को भी उनकी बहादुरी के लिए भी जाना जाता था और ऐसा कहा जाता है कि वह अपने खेतों को नष्ट होने से बचाने के लिए एक जंगली बैल से लड़ते हुए मारी गई थी।

कुयली अपने पिता पेरियामुथन के साथ शिवगंगा राज्य ले पास चले गए थे जहां वे मोची का काम करते थे। पेरियामुथन शिवगंगा राज्य  की सेना में जासूस के रूप में कार्य सुरु किया। उनके कार्य की वजह से कुयली और वेलू नचियार में मित्रता हो गई।

कुयली ने अपनी निष्ठा और मेहनत से शिवगंगा राज्य में महिला सैन्य टुकड़ी की सेना प्रमुख का पद हासिल किया था।


युद्ध :

वर्ष 1772 में आर्कोट के नवाब और ईस्ट इंडिया कंपनी की संयुक्त सेना के हाथों मुथु वदुगनाथ थेवर की मृत्यु होने के बाद रानी वेलु नचियार अपनी बेटी के साथ डिंडीगुल भाग गई और मरुधु भाइयों से जुड़ गई। करीब 8 वर्षो तक तैयारी के बाद। वर्ष 1780 में ईस्ट इंडिया कंपनी के शिवगंगा किले पर हमला करते हुए, उसने अपने शरीर पर घी लगाया, खुद को आग लगा ली और ईस्ट इंडिया कंपनी के शस्त्रागार में कूद गई, जिससे वेलु नचियार की जीत हुई और शिवगंगा राज्य पर रानी वेलु नचियार ने पुनः शासन किया।


Source :

feminisminindia




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