ताड़ - झोकनी - Taad jhokani


छत्तीसगढ़ के हल्बा आदिवासी, दरियार देव द्वारा किये गये नर संघार को  ताड़ - झोकनी के रूप में याद करते है।

इतिहास :
काकतीय शासक दरियार देव ने 1774 ई. से 1777 ई. के बिच चले हल्बा विद्रोह पर विजय प्राप्त करने के बाद उन्होंने आदेश दिया की बलिष्ठ हल्बा जनजाति के लोगों को एक-एक ताड़ के वृक्ष के निचे खड़ा किया जावे तथा राजा के आदेश पर वृक्ष काटा जावे।  वृक्ष के निचे खड़ा हल्बा गिरते हुए उसे इस तरह झेल ले की वृक्ष जमीन पर गिरने न पाये। गिरते हुए इन वृक्षो को जमीन पर गिरने से रोकते हुए बहुत से हलबा लोगो की जान चली गयी