छत्तीसगढ़ी

छत्तीसगढ़ी भाषा (Chhattisgarhi Language) से संबंधित 10 रोचक तथ्य

छत्तीसगढ़ी (Chhattisgarhi) एक इंडो-आर्यन भाषा है, जो छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बोली जाती है। यह हिंदी और अंग्रेजी के साथ छत्तीसगढ़ में एक आधिकारिक भाषा है। भारतीय राष्ट्रीय जनगणना द्वारा इसकी बोली के रूप में गिना जाता है।  छत्तीसग…

छत्तीसगढ़ी भाषा की वर्णमाला ( स्वर एवं व्यंजन )

डा. नरेन्द्रदेव वर्मा के अनुसार छत्तीसगढ़ी में 8 स्वर हैं। अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ। इनके अलावा 2 संध्य अक्षर होते है, ऐ, औ। व्यंजन : डा. नरेन्द्रदेव वर्मा के अनुसार 29 व्यंजन प्रयुक्त होते है। क, ख, ग, घ,  च, छ, ज, झ,  ट,  ठ,  ड,  ढ,  ण,  त,  थ,  द,  ध…

छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग : Chhattisgarhi Rajbhasha Ayog

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग (Chhattisgarh Rajbhasha Aayog) विधेयक को 28 नवम्बर 2007 को पारित किया था। विधेयक के पास होने के उपलक्ष्य में हर साल 28 नवम्बर को  "छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस" के रूप में मनाया जाता है। इस राजभाषा का प्रकाशन 11 जुलाई 2008 …

छत्तीसगढ़ की भाषा/ बोलियाँ एवं वर्गीकरण

छत्तीसगढ़ राज्य एक जनजाति (आदिवासी) बहुल क्षेत्र है। छत्तीसगढ़ राज्य में 93 के करीब बोलियों का प्रचलन है। राज्य में छत्तीसगढ़ी बोली का प्रयोग सर्वाधिक किया जाता है, इसके बाद हल्बी बोली का प्रयोग होता है।  छत्तीसगढ़ की बोलियों की उनके भाषा परिवार…

बर्तन : छत्तीसगढ़

मिट्टी के बर्तन कुंडेरा:- गंजनुमा पात्र विशेषकर गोरस(दूध) पकाने के लिए प्रयोग किया जाता है। हड़िया:- हंडी कसेली:- लोटे से बड़ा काला दोहन पात्र दुहना:- कसेली से बड़ा पात्र जिसमे गो...

छत्तीसगढ़ी जनऊला

पहेलियों को छत्तीसगढ़ी में जनउला कहते है, जिसके जरिये मानव ( मनखे ) बुद्धि की तार्किकता की परीक्षा ली जाती है। ऐसे ही कुछ जनऊला निम्न है। 1) उचकी घोड़ा म पुचकि लगाम ,उहूम बइठय ससुर दमांद। - बाल्टी, रस्सी अउ कुँवा 2) बीच तरिया में टेड़गी रूख।…

छत्तीसगढ़ के साहित्यकार एवं उनकी रचनाएँ

रतनपुर के गोपाल मिश्र हिन्दी काव्य परम्परा की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के वाल्मिकी हैं। वर्ष 1885 में प्रथम छत्तीसगढ़ी व्याकरण की रचना हीरालाल काव्योपाध्याय द्वारा की गई थी, जिसका सन् 1890 में विश्व प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य सर जार्ज ग्रियर्सन ने अंग्रेज…

छत्तीसगढ़ की शिल्पकला - Chhattisgarh ki hastkala/shilpkala

छत्तीसगढ़ की शिल्पकला 1. मिट्टी शिल्प राज्य में बस्तर का मिट्टी शिल्प अपनी विशेष पहचान रखता है। रायगढ़, सरगुजा, राजनांदगांव आदि क मिट्टी शिल्प अपनी  अपनी निजी विशेषताओं के कारण महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। सरगुजा में लखनपुर के पास सोनाबाई ने …

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