छत्तीसगढ़ राज्य में जंगल सत्याग्रह Jangal Satyagrah in Chhattisgarh


छत्तीसगढ़ राज्य में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बहौत से आन्दोल हुए। राज्य में जंगल सत्याग्रह भी हुए।

1. सिहावा जंगल सत्याग्रह(1922)
सरकार द्वारा बनाये गए नए वन कानून तथा बेगारी व अल्प मजदूरी में कार्य करने के लिए विवश किये जाने के विरोध में सुरु हुआ।
स्थान: सिहावा(धमतरी)
प्रारम्भ: 21 जनवरी 1922
नेतृत्वकर्ता: बाबू छीटेलाल श्रीवास्तव, पंडित सुंदरलाल शर्मा, नारायण राव मेघा वाले
स्थानीय सहयोगी: शोभाराम साहू, श्यामलाल सोम, पंचम सिंह, विशम्भर पटेल

सविनय अवज्ञा आन्दोल के दौरान
गट्टा सिल्ली जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: जून 1930
स्थान: गट्टा सिल्ली (धमतरी)
नेतृत्व: छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायण राव, नत्थुजी जगताप

मोहबना पोंड़ी जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: जुलाई 1930
स्थान: मोहबना पोंड़ी (दुर्ग)
नेतृत्व: नरसिंह अग्रवाल

पोंड़ीग्राम जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: अगस्त 1930
स्थान: पोंड़ीग्राम सीपत (बिलासपुर)
नेतृत्व: रामाधार दुबे

रुद्री नवागांव जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: अगस्त 1930
स्थान: रुद्री नवागांव (धमतरी)
नेतृत्व: छोटेलाल श्रीवास्तव, नत्थुजी जगताप, नारायण राव
यह सबसे भीषण सत्याग्रह था। पुलिस द्वारा मिंटू कुम्हार नामक व्यक्ति की मृत्यु हो गई।
सुन्दरलाल शर्मा, नारायण राव, नत्थुजी एवं अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद प्रथम टोली के नेता छोटेलाल श्रीवास्तव ने आंदोलन का नेतृत्व किया।

तमोरा जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: सितंबर 1930
स्थान: तमोरा (महासमुंद)
नेतृत्व: बालिका दयावती, शंकरलाल, यतीयतानलाल
इस आंदोलन के दौरान बालिका दयावती नामक महिला ने अंग्रेज अनुविभागीय अधिकारी को तमाचा मार दिया गया।

लभरा जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: सितंबर 1930
स्थान: लभरा (महासमुंद)
नेतृत्व: अलिमर्दनगिरी, आनंद, श्यामलाल।

बाँधाखार जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: 1930
स्थान: बाँधाखार(कोरबा)
नेतृत्व: मनोहरलाल शुक्ला
सविनय अवज्ञा आंदोलन के बाद व छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह हुए।

सारंगढ़ जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ : 1930
स्थान : रायगढ़
नेतृत्व : धनीराम, जगतराम, कुँवरभान


द्वितीय सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान।
छुई खदान जंगल सत्या ग्रह:-
प्रारम्भ: 1938
स्थान: छुई खदान (राजनांदगांव)
नेतृत्व: समारू बरई

बदराटोला जंगल सत्याग्रह:-
प्रारम्भ: 1939
स्थान: बदराटोला (राजनांदगांव)
नेतृत्व: रामाधीन गोंड़
इस आंदोलन में पुलिस की बर्बता से रामाधीन की मृत्यु होगई।


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