लाफागढ़ / चैतुरगढ़

चैतुरगढ़ या लाफागढ़ छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिले के कटघोरा तहसील में स्थित पाली नामक शहर से लगभग 19 किलोमीटर की दुरी पर स्थित एक किला है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक है। चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ के 36 किलों ( गढ़ ) में से एक है । चैतुरगढ़ कोरबा से लगभग 70 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है।

किले में तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जिनका नाम मेनका, हुमकारा और सिंहद्वार है। यहाँ प्रसिद्ध महिषासुर मर्दिनी मंदिर स्थित है। महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति के 12 हाँथ है जो गर्भगृह में स्थापित है। मंदिर से 3 किलोमीटर दुरी पर शंकर गुफा स्थित है।

नदी/झरने:
इस पर्वत श्रृंखला में चामादहरा, तिनधारी और श्रृंगी झरना स्थित है। इस पर्वत श्रृंखला में जटाशंकरी नदी का उद्गम होता है, जो हसदेव की एक सहायक नदी है। इसी नदी के आगे तट पर तुम्माण खोल स्थित है, जो कल्चुरी की आरंभिक राजधानी थी।

इतिहास :
गढ़ मंडला के गोड़ राजा संग्राम शाह बावन गढ़ों में लाफागढ़ का राजनैतिक एवं सामरिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण स्थान था। यहां चैतुरगढ़ का किला भी स्थित है। 7वीं शताब्दी में वाण/बाण वंशीय राजा मल्लदेव ने महिषासुर मर्दिनी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।  14 वीं शताब्दी में कलचुरि शासक बहार सहाय / बहरेन्द्र ने चैतुरगढ़ क़िले का निर्माण कराया ।