कोरबा जिला Korba jila

जिला - कोरबा
स्थापना - 25 मई 1998
क्षेत्रफल - 7145 वर्ग किलोमीटर
जनसंख्या 2011 - 1206640
तहसील - कटघोरा, पाली, करतला, कोरबा, पोंडीउपरोड़ा।
विकाशखण्ड - कटघोरा, पाली, करतला, कोरबा, पोंडीउपरोड़ा।
नगर निगम - 1
नगर पालिका - 1
नगर पंचायत - 3
ग्राम पंचायत - 352

कोरबा छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। इसे प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है। यहां देश की सबसे बड़ी भूमिगत कोयला खदान "गेवरा माइन्स" है। यहा छत्तीसगढ़ का प्रथम बहुद्देश्यीय परियोजना "मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना" है। यह प्रदेश का सबसे ऊंचा बांध है।
जिले का कुल क्षेत्रफल 7,14,5 हेक्टेयर है जिसमें से 2,83,4 हेक्टेयर वन भूमि है,जो की कुल क्षेत्रफल का लगभग 40 प्रतिशत है।

जनजातियां - गोंड़, पहाड़ी कोरवा, धनवार, बिंझवार, राजगोंड, कंवर।
पर्यटन - पाली, तुम्माण, चैतुरगढ़( लाफ़ागढ ), मड़वारानी, कोसगाई, सतरेंगा, लेमरू (हांथी अभ्यारण), मातिनगढ़, केंदई जल प्रपात, देवपहारी।
खनिज - कोयला, बाक्साइट, डोलोमाइट, क्वार्टज।
नदी - अहिरन, हसदेव, तान, चोरनई।

हसदेव कोरबा जिले की मुख्य नदी है। यह नदी जिले के मध्य से बहती है, जिसका उद्गम छोटा नागपुर की घाटी से है। इस नदी की कुल लंबाई 233 कि.मी. है इसकी सहायक नदियां गेजकोराई, टैन और अहिरन हैं।

पर्यटन
कोसगाईगढ़ : कोसगईगढ़ एक गांव है, जो फुटका पहाड़ के पहाड़ी इलाकों पर कोरबा-कटघोरा रोड से 25 किलोमीटर दूर है।

चैतुरगढ़ (लाफागढ़) : यह कोरबा शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है। यह 3060 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है, यह कल्चुरी राजा पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा बनाया गया था। यह किला चारों ओर से मजबूत प्राकृतिक दीवारों से संरक्षित है केवल कुछ स्थानों पर उच्च दीवारों का निर्माण किया गया है। किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जो मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार नाम से जाना जाता है। यहां प्रसिद्ध महिषासुर मर्दिनी मंदिर स्थित है। महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति, 12 हाथों की मूर्ति, गर्भगृह में स्थापित होती है। मंदिर से 3 किमी दूर शंकर की गुफा स्थित है। यह गुफा जो एक सुरंग की तरह है, 25 फीट लंबा है। कोई गुफा के अंदर ही जा सकता है क्योंकि यह व्यास में बहुत कम है।

तुमान / तुम्माण : तुमान काटघोरा से 10 किमी दूर स्थित एक छोटा गांव है। यह कल्चुरी वंश के राजाओं की राजधानी थी। एक प्राचीन शिव मंदिर यहां पाया जाता है। यह माना जाता है कि यह मंदिर राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा कालचुरी (11 ई सा ) के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।

मेहरगढ़ किला : इस किले के अवशेष पाउना खरा पहाड़ी पर 2000 फीट की ऊंचाई पर पाए जाते हैं, जो राजगमार कोयला खानों के 15 किमी उत्तर पूर्व के आसपास स्थित है। कई स्तम्भों में से एक पर एक वैज्ञानिक लेखन पाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ मूर्तियां भी हैं।

पाली शिव मंदिर : यह जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर स्थित है। इसका निर्माण बाण वंश के विक्रमादित्य ने कराया था। विक्रमादित्य को महामंडलेश्वेर मालदेव के पुत्र ‘जयमेयू’ के नाम से भी जाना जाता है इसे लगभग 870 बीसी में बनाया गया था। 11 वीं और 12 वीं शताब्दी में राजा जाजलवादेव प्रथम कलचुरी के द्वारा मरम्मत की गई। उसका नाम मंदिर पर बना हुआ है।

केंदई जलप्रपात : यह बिलासपुर-अंबिकापुर राज्य राजमार्ग संख्या 5 में कोरबा जिला मुख्यालय से 85 किमी की दूरी दूरी पर स्थित एक गांव है। इस जलप्रपात की ऊंचाई करीब 75 फ़ीट है।

देवपहरी : यह कोरबा से 58 किमी उत्तरी पूर्व में चौराणी नदी के किनारे पर स्थित है। देवपहरी में इस नदी ने गोविंद कुंज नाम के एक झरना स्थित है।

कनकी :  यह गांव उर्गा से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर हसदो नदी के तट पर स्थित है, जो कोरबा से 20 किमी दूर है। यह धार्मिक स्थल कंकेश्वर या चक्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर प्रसिद्ध है। यह माना जाता है कि कनकी के मंदिर का निर्माण कोरबा के जमींदारों के द्वारा वर्ष 1857 के आस-पास कराया गया था।

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