गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिला - Gawrela Pendra Marwahi Jila


विकासखंड: गौरेला, पेंड्रा और मरवाही
ग्राम पंचायत: 166
नगर पंचायत:  गौरेला और पेंड्रा
जिले का क्षेत्रफल: 1 लाख 68 हजार 225 हेक्टेयर होगा।

यह छत्तीसगढ़ का 28 वाँ जिला है। यह जिला 20 फरवरी 2020 को अस्तीत्व में आया।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले 15 अगस्त को नए जिले की घोषणा की थी । जिसके तहत बिलासपुर जिले को विभाजित कर एक नया जिला बनाया जा गया। 20 सितंबर, 2019 को सरकार ने नए जिले के गठन के लिए राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की थी।

इतिहास:
छत्तीसगढ़ का प्रथम समाचार पत्र छत्तीसगढ़ मित्र का प्रकाशन मासिक पत्रिका के रूप में पेंड्रा से वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे के संपादन में प्रकाशित किया गया था।

स्थिति:
पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिला उत्तर में मनेंद्रगढ़, दक्षिण में कोटा व लोरमी, पूर्व में कटघोरा और पश्चिम में मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के सोहागपुर और पुष्पराजगढ़ तहसील से घिरा हुआ है।

नदी :
अरपा नदी - यह महानदी की सहायक नदी है। इसका उद्गम गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिला के पेण्ड्रा लोरमी पठार में स्थित खोडरी पहाड़ी से हुआ है।

सोन नदी - गंगा नदी की सहायक नदी है, जिसका उद्गम पेंड्रारोड तहसील के बंजारी पहाड़ी से हुआ है।

पर्यटन
कबीर चबूतरा- अमरकंटक जाने वाले रास्ते पर मौजूद है। यहाँ महान संत कबीर और गुरु नानक की मुलाकात हुई थी। उनके बीच यहां गहरी मंत्रणा भी हुई थी। यही कारण है कि जगह धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

जलेश्वर धाम- पेंड्रा-अमरकंटक रास्ते में जलेश्वर धाम स्थित

है। यहां का प्राचीन शिव मंदिर आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है। सावन में यहां बड़ी संख्या में शिव भक्त पैदल ही जल चढ़ाने यहां जाते हैं। यहां एक प्राकृतिक कुंड भी आकर्षण का केंद्र है।

लक्ष्मणधारा- केंवची के पास मौजूद लक्ष्मणधारा आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां सालभर पानी रहता है।

झोझा जलप्रपात- गौरेला ब्लॉक के अंतिम छोर में मौजूद झोझा जलप्रपात इस क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां दिसंबर,जनवरी तक तक सौ फीट से अधिक ऊंचाई से झरने के रूप में पानी गिरता है। झोझा जलप्रपात, पेंड्रा से 35 बस्तिबगरा मुख्य मार्ग पर झोझा ग्राम में स्थित है। इस जलप्रपात तक जाने के लिए कोई मार्ग नहीं है। यहां पहुचने के लिए करीब 1 किलोमीटर का रास्ता पैदल ही चलना पड़ता है।

धनपुरी- पेंड्रा-सिवनी मार्ग में मौजूद इस जगह में प्राचीन कलाकृति लोगों के आकर्षण का केंद्र है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव इस जगह में रुके थे। यहां कई प्रागैतिहासिक कलाकृतियां भी मौजूद हैं।

रजमेरगढ़- अमरकंटक की पहाड़ियों के ऊपर बेहद मनोरम जगह है।