SWIFT सिस्टम क्या है ? आसान भाषा में...


SWIFT एक सिक्योर मैसेजिंग सिस्टम है, जिसकी स्थापना स्थापना 1973 में हुई थी और इसका हेडक्वॉर्टर बेल्जियम के ला हल्पे में है। इसका इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने के लिए किया जाता है। SWIFT का इस्तेमाल पैसे को ट्रांसफर करने के लिए नहीं नहीं किया जाता। यह दो देशों के बैंकों के बीच फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के संदेश को सुरक्षित तरीके से भेजता है। 


रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद यूक्रेन अमेरिका और अन्य ताकतवर देशों से रूस को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए उसे SWIFT सिस्टम से बाहर करने की अपील की है।


SWIFT पर नियंत्रण किसका है ?

SWIFT की निगरानी G-10 देशों (बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, स्विट्जरलैंड और स्वीडन) के सेंट्रल बैंकों के साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक करता है।

SWIFT लेनदेन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के दायरे में आता है, FATF की स्थापना वर्ष 1989 में मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ लड़ाई के लिए की गई थी।


SWIFT से हटने के नतीजे ?

वर्ष 2012 में ईरान को SWIFT से हटाया गया था, तब उसकी तेल से कमाई आधी रह गई थी और विदेशी व्यापार की कमाई का 30% हिस्सा गंवा दिया था।


SWIFT का विकल्प ?

वर्ष 2014 में रूस ने क्रीमिया पर किया था, उसके बाद रूस के ऊपर पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद वर्ष 2014 में ही रूस ने SWIFT के विकल्प के तौर पर अपना फाइनेंशियल ट्रांसफर प्लेटफॉर्म SPFS विकसित किया था।

वर्तमान में सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया के अनुसार, SPFS से 400 वित्तीय संस्थान जुड़ चुके ह हैं। वर्ष 2020 तक आर्मेनिया, बेलारूस, जर्मनी, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और स्विट्जरलैंड के भी 23 विदेशी बैंक SPFS के नेटवर्क से जुड़ चुके थे। वर्तमान में  रूस अपने घरेलू लेनदेन का करीब 20% SPFS के जरिए करता है। 

चीन क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम यानी CIPS का इस्तेमाल करता है। इसे चीन ने 2015 में बनाया था। वर्ष 2016 में CIPS ने SWIFT के साथ MoU भी हस्ताक्षर किया है।




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