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छत्तीसगढ़ लोक गीत

छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख लोकगीत
  1. पंडवानी - पांडवों कि कथा। 
  2. सुआ गीत - गोंड स्त्रियों का नृत्य गीत। 
  3. सेवा गीत - चेचक शांति के लिए माता सेवा गीत। 
  4. जवांरा गीत - दुर्गा माता कि आरती ,नवरात्रि के समय गायन। 
  5. भोजली गीत - तांत का बना वाद्य बनाकर नारियों द्वारा गीत गया जाता है। 
  6. करमा गीत - आदिवासियों का नृत्य। 
  7. बांस गीत - राउत जाती का प्रमुख गीत। 
  8. बार नृत्य गीत - कंवर जनजाति द्वारा। 
  9. देवार गीत - देवार जाति ,लोक कथाओ पर आधारित। 
  10. रीना नृत्य गीत - दीपावली के अवसर पर गोंड तथा बैगा जनजातियों की महिलाओ द्वारा।  
  11. ददरिया गीत - लोकगीत का राजा ,प्रेमगीत। 
  12. लेंजा गीत - बस्तर के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र लोकगीत। 
  13. घोटुल पाटा - मृतु के अवसर पर मुरिया जनजाति में गाया जाता है।  
  14. रैला गीत - मुरिया जनजाति का प्रमुख लोक गीत। 
  15. पंथी गीत - सतनामी समाज का परंपरागत गीत है। 
  16. भडोनी गीत - विवाह के समय हसी मजाक के लिए गया जाता है। 
  17. नचोनी गीत - नारी कि विरह वेदना ,संयोग वियोंग का गीत। 
  18. बैना गीत - तंत्र मंत्र साधना से सम्बंधित गीत। 
  19. राउत गीत - यादव समाज द्वारा गया जाने वाला गीत। 
  20. धनकुल - बस्तर क्षेत्र का पमुख लोक गीत है।  
  21. लोरिक चंदेनी गीत - लोक कथा पर आधारित गीत। 
  22. नागमत गीत - नागदेव का गुणगान नागपंचमी के अवसर पर। 
  23. डंडा गीत - वर्ष में दो बार, क्वार तथा फागुन में, पुरुषों द्वारा डंडा नृत्य के समय गाया जाता है।
  24. सोहर गीत - जन्मोत्सव के अवसर पर गाया जाता है। 
  25. बरुआ गीत - उपनयन संस्कार के अवसर पर गाया जाता है। 
  26. गम्मत गीत - राज्य में गणेशोत्सव के अवसर पर गाया जाता है। 
  27. ढोलकी गीत - महिलाओं द्वारा भगवन राम एवं कृष्ण की लीलाओं का वर्णन।  
  28. गौरा गीत - माँ दुर्गा कि स्तुति ,नवरात्रि के समय।