मुंगेली जिला - Mungeli Jila

मुंगेली जिले की स्थापना 1 जनवरी 2012 मे हुआ। यह छत्तीसगढ़ राज्य का 21 वां जिला है। 3 विकासखंडो वाले इस नए जिले की आबादी करीब 7 लाख है। जिले का कुल क्षेत्रफल 275036 वर्ग किलो‍मीटर है। जिले में कुल 669 गांव हैं इसके अलावा 1 नगरपालिका है।
मुंगेली को तहसील का दर्जा 1860 में मिला था। इस तरह 142 बरस मुंगेली तहसील से जिला बन पाया। नये जिले में तीन तहसील मुंगेली, पथरिया और लोरमी शामिल है।

अन्य जानकारी:
जनजातियां - बैगा, गोंड़।
परियोजना - राजीव गांधी परियोजना (खुड़िया बांध)
पर्यटन - मदकूद्वीप, श्वेत गंगा, अचानकमार टाइगर रिजर्व।
नदी (उद्गम) - अरपा, मनियारी।

पर्यटन
सेतगंगा:
मुंगेली जिले में कई धार्मिक एवं पर्यटन स्थल मौजूद हैं। जहां पर हर साल एक बड़ा मेला भी लगता है। फणीनागवंशी राजा के सपने में त्रिपथगामनी गंगा ने प्राकट्य होकर कुंड व मंदिर की स्थापना के निर्देश दिए थे। उन्होंने सेतगंगा में कुंड व मंदिर को भव्य रूप देने का निर्देश माना। इसे श्वेत गंगा का नाम दिया था! जो बोलचाल में सेतगंगा हो गया। टेसुआ के तट पर बसा यह स्थान मुंगेली जिले का तीर्थ कहलाता है।

मदकू द्विप एवं अचानकमार
मुंगेली जिले में ही मदकू द्वीप, मो‍तीमपुर, हथनीकला मंदिर, सत्यनारायण मंदिर जैसे कई धार्मिक‍ स्थान भी हैं। लोरमी तहसील भी इसी जिले में हैं। इस तहसील में अचानकमार अभ्यांरण भी हैं जिसे 2009 में टाईगर रिजर्व घोषित किया गया।

खुडिया:
मनियारी तथा अरपा नदी का उद्गम मुंगेली जिले से हुआ है । जिले मे मनियारी पर खुडिया ( राजीव गाँधी परियोजना ) बांध भी है। जो तीनों ओर से पहाडियों से घिरा हुआ है। मनियारी नदी पर बने होने के कारण इसे मनियारी जलाशय के नाम से भी जाना जाता है। मदकू द्वीप में 10वीं-12वीं शताब्दी का अति प्रचीन शिव मंदिर है। शिवनाथ नदी की धारा के दो भागों में विभक्त होने के कारण यह स्थान द्वीप के रूप में बन गया है। मुंगेली से इसकी दूरी मात्र 45 किलोमीटर है।


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