सुकमा जिला Sukma Jila Chhattisgarh

जिला - सुकमा रबर
स्थापना - 1 जनवरी 2012
क्षेत्रफल - 5635 वर्ग किलोमीटर
जनसँख्या 2011 - 250159
तहसील - सुकमा, कोंटा, छिंदरगढ़
विकासखंड - सुकमा, कोंटा, छिंदरगढ़

छत्तीसगढ़ का दक्षिणतम बिंदु कोंटा इसी जिले में है। इस जिले में सर्वाधिक मात्रा में टिन अयस्क पाया जाता है। यह जिला सीधे उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के दो अलग-अलग राज्यों से जुड़ा हुआ है।

"इंजराम" सुकमा से लगभग 70 किलोमीटर दूर कांटा विकासखंड में  स्थित एक गांव है जो राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांटा से पहले 10 किलोमीटर दूर है। मान्यताओं के अनुसार रामायण काल के दौरान ऋषि इनजी का आश्रम इस गांव में स्थित थे। "इंजे राम वाथोड" का अर्थ  स्थानीय भाषा में है राम यहां अये थे। जिस वजह से इस जगह को "इंजराम" के नाम से जाना जाता है, यह एक और लोकप्रिय विश्वास है। मुख्य सड़क से सिर्फ 100 मीटर की दाईं तरफ, विभिन्न देवताओं के कई प्राचीन मूर्तियों के खंडहर देख सकते हैं।

पर्यटन - रानीदरहा जलप्रपात, गुप्तेश्वर जलप्रपात।
खनिज - टिन, कोरण्डम, ग्रेनाइट।

मेला

रामाराम मेला : 
सुकमा मुख्यालय स्थित राजवाड़ा से माता रामारामिन की डोली रामाराम के लिए निकलती है। यह डोली रातभर पैदल चलकर करीब 12 किमी. दूर स्थित रामाराम पहुचती है। जहां मेले का आयोजन होगा। वही इस मेले के आयोजन के साथ जिलेभर में जगह-जगह मेले को आयोजन शुरू होगा। यह मेला इलाके का सबसे बड़ा मेला है। मान्यता के मुताबिक इस मेले में माता चिटमिटिन, रामारामिन और मुजरिया छिन्दगढ़ का मिलन होता है।