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भुंजिया जनजाति Bhunjiya Janjati Chhattisgarh


यह छत्तीसगढ़ की एक विशेष पिछड़ी जनजाति है। जिनका निवास छत्तीसगढ़ राज्य के गरियाबंद जिले में है। राज्य सरकार द्वारा भुंजिया जनजाति के विकास हेतु, "भुंजिया विकास अधिकरण" का संचालन कर रही है। जिसका मुख्यालय गरियाबंद में है।

जनसंख्या 2011 :-
इनकी कुल जनसंख्या 10603 है। जिसमे से 5225 पुरुष तथा 5378 है।

तथ्य:
भुंजिया जनजाति के लोग रोगों का इलाज गर्म लोहे को दाग कर करते है। भुन्जिया जनजाति के लोग अपने रसोई घर को लाल रंग से रंगते है और रसोई घर "लाल बंगला" कहते है। यह अलग कमरा होता है।
भूंजिया जनजाति में तीन अलग समुदाय होते हैं। चोकटीया, खोलारझिया और चिन्डा। चोकटिया भूंजिया छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में रहते हैं।


 लाल बंगला - Laal Bangala
चोकटीया में लाल बंगले बनाने का रिवाज़ है। याह एक खास कमरा है, जो उनकी आस्था से जुड़ा हुआ है। इस कमरे को अपने देवी देवता का स्थान मानते है। चोकटीया घरों के साथ एक कमरा अलग से बनाया जाता है, जिसे लाल रंग से रंगा जाता है। यहाँ दूसरी जनजाति का कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता है। लाल बंगले में देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। 
लाल बंगले को आदिवासी रसोई के लिए उपयोग करते है, इसे गोबर से लीपा जाता है। खाना पकाने के बाद थोड़ा-सा खाना और सब्ज़ी पत्ता में निकालकर चूल्हे में देवी-देवताओं के नाम से डाल दिया जाता है, उसके बाद ही घर का कोई भी सदस्य खाना खाता है। लाल बंगले से बाहर निकाले हुए खाने को वापस लाल बंगले में नहीं लिया जाता है। महिलाएं जब मासिक धर्म पर होती हैं, तब लाल बंगले में प्रवेश नहीं करती हैं। लाल बंगले में चप्पल/जुता पहनकर प्रवेश नही कर सकते हैं।

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भुंजिया समाज (विशेष पिछड़ी जनजाति)को तीन भागों में विभक्त है:-
(1)चोकटिया भुंजिया,
(2)चिंडा भुंजिया,
(3)खोल्हारझिया भुंजिया,
ये तीनो भुंजिया समाज एक दूसरे से लेन-देन अचार विचार आदान प्रदान करते हैं,इसकी सही जानकारी आज तक शासन नही लगा पाए हैं।
चोकटिया भुंजिया समाज की संस्कृति,अनोखी परम्परा के कारण यह भुंजिया समाज सबसे अलग है।इसकी वेशभूषा पहनावें, बोली,नीति नियम में भी भिन्नता देखने को मिलता है।इतिहास में जाये तो,भुंजिया समाज देवताओँ के वंसज है।21वीं सदी आने के बाद भी पुराने परम्परा रीती रिवाजों को मनाते है।आज भी 70% लोग बीमारियों का इलाज झाड़ फुक,देव देहारी से करते है,जागरूकता में कमी होने के कारण विकास से दूर है।हालांकि शासन के द्वारा कमार/भुंजिया विकास अभिकरण गरियाबंद छ. ग्.के तहत योजना चलाया जा रहा है,जिसमें भुंजिया हितग्राही को योजनाओं का लाभ नही मिल रहे है।अधिकारी कर्मचारी के द्वारा कागजी कार्यवाही ही होती रहती है।क्या भुंजिया समाज के विकास की गति देने में शासन योजनाओं का सही क्रियान्वयन करने में रूचि लेगी?अभी भी सोचनीय है।

भुंजिया जनजाति के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी मिल सकता हैं क्या सर ?

यदि होगा तो जरूर बताना या लिखे के भेजना सर

या आप 9907473791 इस नंम्बर फोन करना सर
मैं खेमलाल चंदेल(MA छत्तीसगढ़ी ) पढ़ने वाला छात्र हूँ ।


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