छत्तीसगढ़ औद्योगिक नीति 2019 - Chhattisgarh Industrial policy


अवधि : 1 नवंबर, 2019 - 31 अक्टूबर, 2024

छत्तीसगढ़ शासन की नई औद्योगिक नीति के तहत औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के सभी विकासखंडों को औद्योगिक विकास एवं पिछड़ेपन की दृष्टि से क्रमशः अ, ब, स और द श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। प्रदेश सरकार ने पहली बार उद्योग नीति में सेवा क्षेत्र को शमिल किया गया।

कोर सेक्टर के मध्यम, वृहद, मेगा, अल्ट्रमेगा उद्योगो को 'द श्रेणी' के विकसखण्डों में उत्पादन प्रारंभ करने की तिथी से 7 वर्षो तक 100% तक विधुत शुल्क छूट का प्रावधन किया गया।

औद्योगिक नीति 2019-24 में गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत विकासखंडों में उद्योग की स्थापना करने के लिए तीन श्रेणी में ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।

श्रेणी प्रतिशत अनुदान अधिकतम राशि अधिकतम वर्ष
समान्य 40-65% 40 लाख रु/वर्ष 8 वर्ष
प्रथमिक 50-70% 50 लाख रू/वर्ष 10 वर्ष
उच्च प्रथमिक 50-70% 55 लाख रू/वर्ष 11 वर्ष

प्रदेश में उद्योगो में स्थानिय मजदूरो को प्राथमिकता:
उद्योगों को 100 प्रतिशत अकुशल श्रमिकों की भर्ती स्थानीय लोगों से करनी होगी। कुशल श्रमिकों के लिए 70 प्रतिशत और प्रबंधकीय व प्रशासकीय पदों के 40 प्रतिशत मानव संशाधन की भर्ती स्थानीय लोगों से करनी होगी।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  • सरकारी विभागों के लिए स्थानीय इकाइयों का उत्पाद खरीदना अनिवार्य। 
  • राज्य से निर्यात के लिए नजदीकी बंदरगाह तक माल ढुलाई पर परिवहन अनुुदान। 
  • बस्तर और सरगुजा में 20 एकड़ तक निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को अनुमति। उन्हें बुनियादी ढांचे के लिए 4 करोड़ रुपए तक अनुदान। 
  • 5 वर्षों तक अधिकतम दो करोड़ रुपए का मंडी शुल्क माफ। 
  • स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक समूहों को भी निवेशकों की श्रेणी में शामिल कर प्रोत्साहन।
  • तृतीय लिंग के उद्यमी को उद्योग लगाने के लिये 40% सब्सिडी दिया जयेगा।
  • हर्बल, वनौषधि तथा वनोपज अधारित उद्योगो को उच्च प्राथमिकता श्रेणी के उद्योगो मे रखा गया।
  • निवेशकों को 7 श्रेणियो में बाँटा गया है।