स्वामी आत्मानंद - Swami Atmanand


स्वामी आत्मानंद जी का जन्म रायपुर जिले के बरबंदा गांव में 6 अक्टूबर 1929 को हुआ था। स्वामी आत्मानंद जी का वास्तविक (बचपन का नाम) नाम तुलेन्द्र था। स्वामी आत्मानंद के पिता धनीराम वर्मा रायपुर के पास मांढर स्कूल में शिक्षक थे। कुछ समय बाद धनीराम का चनय वर्धा में शिक्षा के उच्च प्रशिक्षण के लिए हो गया और वे परिवार सहित वर्धा चले गए। वर्धा में ही स्वामी आत्मानंद जी सेवाग्राम आश्रम में महात्मा गांधी के संपर्क में आए, इसी दौरान तुलेन्द्र भी साथ रहते। तुलेन्द्र बचपन से प्रतिभा संपन्न थे। वे मधुर स्वर में भजन भी गाते। धीरे-धीरे तुलेन्द्र फिर गांधी के बेहद करीब आ गए और उनके स्नेही हो गए। वर्धा आश्रम से धनीराम वर्मा कुछ वर्ष बाद रायपुर वापस आ गए और रायपुर में 1943 में श्रीराम स्टोर नामक दुकान खोलकर जीवन यापन करने लगे।


शिक्षा:

तुलेन्द्र ने सेन्टपॉल स्कूल में प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल की परीक्षा पास की और उच्च शिक्षा के लिए साइंस कॉलेज नागपुर चले गए। वहां उन्हें कॉलेज में छात्रावास उपलब्ध नहीं होने के फलस्वरूप वे रामकृष्ण आश्रम में रहने लगे। यहीं से उनके मन में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों ने प्रवेश किया। तुलेन्द्र ने नागपुर से प्रथम श्रेणी में एम.एससी. गणित की परीक्षा उत्तीर्ण की उसके बाद दोस्तों की सलाह पर आई.ए.एस. की परीक्षा में शामिल हुए। वहां उन्होंने प्रथम दस सफल उम्मीदवारों में स्थान प्राप्त किया, पर मानव सेवा और विवेक दर्शन से आलोकित तुलेन्द्र नौकरी से विलग रहते हुए, मौखिक परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।


तुलेन्द्र से चैतन्य, चैतन्य से स्वामी आत्मानंद तक का सफर

भारत की आजादी के बाद तुलेन्द्र रामकृष्ण मिशन से जुड गए। वर्ष 1957 में रामकृष्ण मिशन के महाध्यक्ष स्वामी शंकरानंद ने तुलेन्द्र की प्रतिभा से प्रभावित होकर ब्रम्हचर्य में दीक्षित किया और उन्हें नया नाम दिया, स्वामी तेज चैतन्य। स्वामी तेज चैतन्य ने अपने नाम के ही अनुरूप अपनी प्रतिभा और ज्ञान के तेज से मिशन को आलोकित किया। निरंतर विकास और साधना सिद्धि के लिए वे हिमालय स्थित स्वर्गाश्रम में एक वर्ष तक कठिन साधना कर वापस रायपुर आए। स्वामी भास्करेश्वरानंद के सानिध्य में उन्होंने संस्कार की शिक्षा ग्रहण की, यहीं पर उन्हें स्वामी आत्मानंद का नया नाम मिला।


छत्तिसगढ़ में विवेकानंद आश्रम की स्थापना :

उन्होंने स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास को अविस्मरणीय बनाने के उद्देश्य से रायपुर में विवेकानंद आश्रम बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया. इस कार्य के लिए उन्होंने मिशन से विधिवत स्वीकृति नहीं मिली, किन्तु वे इस प्रयास में सफल रहे और आश्रम निर्माण के साथ ही रामकृष्ण मिशन बेलूर मठ से संबद्धता भी प्राप्त की। उन्होंने शासन के अनुरोध पर वनवासियों के उत्थान के लिए नारायणपुर में उच्च स्तरीय शिक्षा केन्द्र की स्थापना की।


मृत्यू:

27 अगस्त, 1989 को भोपाल से रायपुर लौटते समय में राजनांदगांव के समीप सड़क हादसे में वे चल बसे।


इन्हे देखें :

रायपुर विवेकानंद आश्रम





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