कौन थे वीर शहीद तिलका मांझी ? Tilka Majhi

तिलका मांझी एक स्वतंत्रता सेनानी थे। जन्म 11 फरवरी, 1750 सुल्तानगंज, बिहार, भारत में हुआ था। उनका उनका वास्तविक नाम ‘जबरा पहाड़िया’ था। वे पहाड़िया (Paharia) समुदाय के पहले आदिवासी नेता थे। उन्होंने वर्ष 1784 में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे। उन्होंने आदिवासियों को एक सशस्त्र समूह बनाने के लिए संगठित किया ताकि वे अंग्रेजों के संसाधनों को हथियाने और शोषण के खिलाफ लड़ सकें।


विद्रोह :

वर्ष 1770 में भीषण अकाल पड़ने के कारण तिलका ने अंग्रेज़ी शासन का खज़ाना लूटकर आम गरीब लोगों में बाँट कर ‘संथाल हुल’ विद्रोह की शुरुआत हुई। वर्ष 1778 में रामगढ़ कैंटोनमेंट ( वर्तमान झारखंड) में तैनात पंजाब रेजिमेंट पर सफल हमला किया।

वर्ष 1784 में आदिवासियों ने अंग्रेज़ों के भागलपुर मुख्यालय पर हमला कर दिया और अंग्रेज़ कलेक्टर ‘अगस्टस क्लीवलैंड’ को जहरीले तीर से मार दिया गया। इसके बाद  कंपनी सरकार ने तिलका को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल आयर कूट ( Lieutenant General Eyre Coote ) को भेजा।

किसी ने अंग्रेजो को तिलका मांझी अपने गृह ज़िले, सुलतानगंज के जंगलों में होने की सूचना दे दी। यहां अंग्रेजो के साथ युद्ध हुआ। अंग्रेज़ तिलका तक पहुंचने वाले हर सप्लाई रूट को बंद कर दिया। इस वजह से तिलका और उनके सैनिकों को अंग्रेज़ों से आमने-सामने लड़ना पड़ा।  तिलका मांझी को अंग्रेज़ों ने 12 जनवरी, 1785 को पकड़ लिया। 13 जनवरी 1785 को भागलपुर में उन्हें एक बरगद के पेड़ से लटकाकर फांसी दे दी गई थी।


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