छत्तीसगढ़ में सूबा शासन - Suba Shasan In Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में मराठों ने सूबा पद्धति से शासन किया। छत्तीसगढ़ में सूबा शासन के जनक व्यंकोजी भोसले है। इन्होंने छत्तीसगढ़ में सूबा शासन पद्धति को लागू कर भोसला प्रतिनिधि के रूप में विभिन्न सूबेदारों की नियुक्ति की। सूबा शासन 1787 से 1818 तक रहा।

सूबेदरो के नाम :
1. महिपत राव दिनकर (1787-90)
ये छत्तीसगढ़ के प्रथम सूबेदार थे। इनके शासन काल मे यूरोपीय यात्री फारेस्टर आये थे।

2. विट्ठल दिनकर (1790-1796)
इन्होंने छत्तीसगढ़ राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन कर परगना पद्धति स्थापित किया। इन्होंने छत्तीसगढ़ को 27 परगनो में विभाजित किया। जिसका प्रमुख को कमाविसदार कहलाता था। यह व्यवस्था 1818 तक जारी रही। इनके शासन काल मे 13 मई 1795 को यूरोपीय यात्री कैप्टन ब्लंट आये थे।

3. भवानी कालू - करू पंत (1796-1797)
4. केशवगोविंद - पंत (1797-1808)
ये सर्वाधिक समय तक छत्तीसगढ़ के सूबेदार रहे।इनके शासन में 1799 में यूरोपीय यात्री कालब्रुक आये।
5.व्यंकोजी पिण्डरी एवं दिरो कुलल्लूकर (1808-1809)
6. बीकाजी गोपाल - भिकभाऊ (1809 - 1817)
7. सखाराम हरि - सखाराम बापू (1817 - 3 माह)
8. सीताराम टांटिया (1817 - 8 माह )
9. यादवराव दिवाकर (1817 -1818)

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