शक साम्राज्य Saka samrajya

शक प्राचीन मध्य एशिया में रहने वाली स्किथी लोगों की एक जनजाति या जनजातियों का समूह था। शको के दक्षिण एशियाई साम्राज्य को 'शकास्तान' कहते थे, जिसमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, सिंध, ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और अफ़्ग़ानिस्तान शामिल थे।

धर्म:-
शको ने शैव धर्म को अपनाया था।

पुराणों में शक :-
पुराणों में शको की उत्पत्ति सूर्यवंशी राजा नरिष्यंत से कही गई है। राजा सगर ने राजा नरिष्यंत को राज्यच्युत तथा देश से निर्वासित किया था। वर्णाश्रम आदि के नियमों का पालन न करने के कारण तथा ब्राह्मणों से अलग रहने के कारण वे म्लेच्छ हो गए थे। उन्हीं के वंशज शक कहलाए।

भारत मे शक :-
शक बोलन घाटी पार कर भारत में प्रविष्ट हुए। तत्पश्चात् उन्होंने पुष्कलावती एवं तक्षशिला पर अधिकार कर लिया और वहाँ से यवन हट गए, और मोग/ मोइज (80 ई. पू.) तक्षशिला के प्रथम शक शासक बने।

भारत में शक राजा अपने को क्षत्रप कहते थे। उसी ने अपने अधीन क्षत्रपों की नियुक्ति की जो तक्षशिला, मथुरा, महाराष्ट्र और उज्जैन में शासन करते थे।
शको पर विजय के उपलक्ष्य में 58 ई. पू में उज्जैन के शासक ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की तथा विक्रम संवत चलाया।
शको की दक्षिण की शाखा ने सर्वाधिक समय तक लगभग 4 शताब्दी तक शासन किया। शको का सबसे प्रतापी शासक रुद्रदामन हुआ। इसने सुदर्शन झील का पुनर्निर्माण कराया। रुद्रदामन ने संस्कृत का पहला शिलालेख - गिरनार अभिलेख जारी किया।

वशिष्ठ पुत्र सातवाहन नरेश पुलुमावी ने रुद्रदामन को परास्त किया तथा उनकी पुत्री से विवाह किया। रुद्र सिंह तृतीय भारत में अंतिम शक शासक था जिसकी हत्या चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने की और 'शकारि' की उपाधि धारण की।


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