छत्तीसगढ़ में प्रत्यक्ष भोसले शासन ( बिम्बाजी 1757 - 1787 )


छत्तीसगढ़ में प्रत्यक्ष भोसले ( मराठा ) शासन 1758 से हुआ। छत्तीसगढ़ में अंतिम कल्चुरी शासक शिवराज सिंह थे। जिन्होंने मराठो के अधीन शासन किया। इनके बाद बिम्बाजी भोसले ने छत्तीसगढ़ में प्रत्यक्ष मराठा शासन की सुरुवात की।

>>छत्तीसगढ़ में मराठा शासन

बिम्बाजी भोसले:-
- इन्होंने नागपुर के सहायक के रूप में शासन किया।
- रायपुर तथा रतनपुर का एकीकरण किया।
- परगना पद्धति की सुरुवात की
- राजनांदगांव तथा खुज्जी जमींदारी प्रारम्भ की
- रतनपुर में नियमित न्यायालय की स्थापना की।
- इन्होंने 1775 में चागबखार रियासत पर आक्रमण कर टकोली देने पर बाध्य किया तथा कोरवा जमींदार के विरोध की वजह से जमींदारी जब्त की। खैरागढ़ के जमींदार ने भी टकोली का विरोध किया जिसके लिए उन्हें दण्डित किया गया। खैरागढ़ पर 1768 में बिम्बाजी ने फिर 1784 में भास्करपंथ ने आक्रमण किया।
- राजस्व पद्धति आरम्भ की परंतु राजस्व का हिस्सा नागपुर नहीं भेजते थे।
- विजयादशमी के पर्व में स्वर्ण पत्र देने की परंपरा सुरुवात की।
- रतनपुर के रामटेकरी में राम मंदिर का निर्माण कराया।
- रायपुर के बूढ़ा तालाब की नींव रखी। जिसे बाद में महीपतराव दिनकर ने पूरा बनवाया।
- उन्होंने मराठी, गोड़ी, उर्दू को प्रचलित किया।
- रायपुर के दूधाधारी मठ का पुनः निर्माण कराया
- बिम्बाजी की तीन पत्नियां थी। आनंदी बाई, उमा बाई, रमा बाई।
- 1787 में बिम्बाजी की मृत्यु होने पर उमा बाई सती हुई।
- यूरोपीय यात्री कोलब्रुक के अनुसार इनका शासन लोककल्याणकारी था।
बिम्बाजी के मरणोपरांत व्यंकोजी भोसले को राज्य प्राप्त हुआ। इन्होंने छत्तीसगढ़ में सूबा शासन (1787 - 1818 ) की सुरुवात की।


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