गिद्ध संरक्षण कार्य योजना 2020-2025



भारत में गिद्धों की संख्या में गिरावट आ रही है एवं कुछ प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर पहुच गयी है। इसे ध्यान में रखते हुये राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड (NBWL) ने गिद्धों के संरक्षण के लिए गिद्ध संरक्षण कार्य योजना 2020-2025 को मंजूरी दे दी है।


गिद्ध संरक्षण कार्य योजना 2020-2025 के अनुसार विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में चार बचाव केंद्र (Rescue Centers) स्थापित किए जाएंगे: 

  1. उत्तर भारत में पिंजौर,
  2. मध्य भारत में भोपाल, 
  3. पूर्वोत्तर भारत में गुवाहाटी 
  4. दक्षिण भारत में हैदराबाद


संख्या में गिरावट का करण :

मवेशियों की देखभाल के लिए उपयोग की जाने गिद्धों के लिए जहर का काम करती है। पशुओं में दर्द निवारक के रूप में उपयोग की जाने वाली डिक्लोफिनेक (Diclofenac) दवा गिद्धों में किडनी फ़ेल होने का एक बड़ा कारण है जिससे इनकी संख्या में बहुत तेजी से गिरावट आई है।


संख्या में गिरावट :

बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के द्वारा जुटाये गए आंकड़ों के अनुसार गिद्धों की संख्या में 99% तक की कमी आ गयी है। हालांकि 2006 में ही दवा को प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन अभी भी इसका कथित तौर पर उपयोग किया जा रहा है। वर्तमान में गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में आईयूसीएन की गंभीर संकटग्रस्त सूची में शामिल गिद्धों की तीन प्रजातियों व्हाइट-बैक्ड (White– backed), लॉन्ग-बिल्ड (long-billed) और स्लेंडर-बिल्ड (Slender–billed) का सरंक्षण किया जा रहा है।


संरक्षण की योजना :

इस योजना के तहत मवेशियों के इलाज में प्रयोग की जाने वाली एसी दवाओं को जो गिद्धों के लिए विषाक्त है, उन्हे भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा प्रतिबंधित किया जाएगा। इस कार्य योजना में उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडू में गिद्ध संरक्षण और प्रजनन केन्द्रों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। इसमें लाल सिर वाले गिद्धों (Red Headed vulture ) और मिश्र के गिद्धों (Egyptian vulture) के संरक्षण और प्रजनन का भी प्रावधान है। गिद्धों की मौजूदा आबादी के संरक्षण के लिए प्रत्येक राज्य में कम-से-कम एक "सुरक्षित गिद्ध क्षेत्र (Vulture Safe Zone)" बनाने की भी योजना है।

इस कार्य योजना में गिद्धों की जनसंख्या संख्या को ट्रैक करने के लिए नियमित सर्वेक्षण की भी परिकल्पना की गयी है।


 

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