मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ( कोरबा ) - Madawaraani

माँ मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ऱाज्य के कोरबा जिले में स्थित है। यहां के स्थानीय निवासियों के श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं। और एक प्रमुख दार्शनिय स्थल है। मंडप को स्थानीय भाषा ( छत्तीसगढ़ी ) में मड़वा कहा जाता है। माँ मड़वारानी के मंडप से आने के कारण गाँव और पर्वत को मड़वारानी के नाम से जाना जाता है।
यह स्थान जिला मुख्यालय कोरबा से 18 कि.मी. एवं जांजगीर-चांपा जिले के चांपा से लगभग16 कि.मी. की दूरी पर कोरबा-चांपा हाइवे पर एक पर्वत पर स्थित है। यहां ट्रेन से भी पहुंचा जा सकता है। मड़वारानी रेलवे स्टेशन के लिए लोकल ट्रेन की सुविधा है। इसके अलावा कोरबा एवं चांपा से मड़वारानी के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध है।

मान्यता:-
मान्यता है, की माँ मड़वारानी स्वयं प्रकट होकर आस-पास के गावों की रक्षा करती हैं। माँ मड़वारानी मंदिर, मड़वारानी पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है।
पहली कहानी यह है, कि मड़वारानी जब अपने शादी के मंडप को छोड़ कर आई तो बरपाली-मड़वारानी रोड में उनके शरीर से हल्दी एक बड़े पत्थर पर गिरी और वह पत्थर पीला हो गया।
दूसरी प्रसिद्ध कहानी यह है कि माँ मड़वारानी भगवान शिव से कनकी मे मिली एवं मड़वारानी पर्वत पर आई। माँ मड़वारानी संस्कृत में "मांडवी देवी" के नाम से जानी जाती है।
ऐसा माना जाता है कि एक दूसरे कलमी पेड़ में मीठे पानी का श्रोत था जो हमेशा बहता रहता था। पर एक दिन एक ग्रामीण पानी लेते समय अपना बर्तन खो दिया और उसने पेड़ को काटकर देखा पर उसे अपना बर्तन नहीं मिला।


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