छत्तीसगढ़ के मेले - Chhattisgarh Fair



राजिम मेला :
छत्तीसगढ़ के  गरियाबंद जिले में स्थित नगर में संगम में माघ-पूर्णिमा पर भरने वाले इस मेले का केन्द्र राजिम होता है, किन्तु इसका विस्तार पंचक्रोशी क्षेत्र में पटेवा (पटेश्वर), कोपरा (कोपेश्वर), फिंगेश्वर कारण मेले का माहौल शिवरात्रि तक बना रहता है। राजिम 'तीर्थराज प्रयाग ' के नाम से प्रसिद्ध है।

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चम्पारण मेला :
चम्पारण, रायपुर जिले का एक ग्राम है। माघ पूर्णिमा के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है।  यहाँ वल्लभाचार्य का जन्म हुआ था।

बस्तर का दशहरा मेला :
यह मेला विश्वप्रसिद्ध है।  इस मेले का आयोजन ओक्टुबर माह में में किया जाता है।  यह उत्त्सव महीनो तक मनाया जाता है।  लेकिन इस मेले का सम्बन्ध रामायण से नहीं है।

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शिवरीनारायण मेला :
जांजगीर-चाँम्पा जिले के शिवरीनारायण में प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से सुरु होकर महाशिवरात्रि तक आयोजित होता है।

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माँ बम्बलेश्वरी मेला :
यह मेला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में प्रतिवर्ष नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होती है। यह वर्ष में दोनों नवरात्रि पर आयोजित होता है। यहाँ श्रद्धालु डोंगरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित माता बम्बलेश्वरी के दर्शन के लिए आते है।

रतनपुर मेला :
नवरात्रि के अवशर पर बिलासपुर जिले के रतनपुर में महामाया मंदिर में मेले का आयोजन किया जाता है।

बस्तर का मड़ई मेला :
बस्तर क्षेत्र में दीपावली के बाद दिसंबर से फरवरी तक अनेक ग्रामो में मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर धार्मिक आयोजन भी होता है।  इस मेले के आस-पास ग्रामवासी अपने देवी देवताओं के साथ आते है। मड़ई के अवसर पर रात्रि में नृत्य किया जाता है।

लिंगो बाबा मेला:
यह मेला कांकेर जिला अंतर्गत ग्राम सेमरगांव में प्रत्येक तीन वर्ष में आयोजित किया जाता है। इस मेला में कांकेर, कोण्डागांव और नारायणपुर जिला के देवीदेवताओं को लेकर भारी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। इस मेले का आयोजन 29 से 31 मार्च तक किया जाएगा। इस मेले में सम्मिलित होने के लिए ग्रामीण 100 किमी दूर से पैदल भी पहुंचते हैं।

सेमरगांव लिंगो देव को आदिवासी अपने शक्तिपीठ के रूप में पूजते हैं, जो आदिवासी समाज के एक प्रमुख देव हैं। राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्र में आंगा देव में प्रमुख लिंगो देव की मान्यता है।