हनुमान सिंह(रायपुर सैन्य विद्रोह) - Hanuman Singh

हनुमान सिंह
जन्म - 1823*
मृत्यु - अज्ञात
वैसवाड़ा के राजपूत थे।

ठा. हनुमान सिंह जी के जन्म और मृत्यु के सम्बन्ध में कोई भी प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती किंतु हनुमान सिंह सम्बन्ध में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार वे बैसवाड़ा के राजपूत थे और वर्ष 1858 ई. में उनकी आयु 35 वर्ष थी। अर्थात् उनका जन्म वर्ष 1833 ई. माना जा सकता है।

रायपुर सैन्य विद्रोह:
नारायण सिंह की सहादत के बाद अंचल में अशांति फ़ैल गई थी। 18 जनवरी, हनुमान सिंह ने तीसरी टुकड़ी के सार्जेन्ट मेजर सिडवेल की हत्या उसके घर में कर दी। हनुमान सिंह तीसरे सेना के मेग्जीन लश्कर थे।
सिडवेल की हत्या की हत्या के बाद नारायण सिंह ने सिपाहियों को विद्रोह के लिए उकसाया।  लेफ्टिनेंट स्मिथ ने विद्रोह को  नियंत्रित करने का प्रयास किया।  विद्रोही सिपाहियों की संख्या 17 थी।

गिरफ्तार सैनिको पर रायपुर के डिप्टी कमिश्नर के द्वारा मुक़दमा चलाया गया। 17 विद्रोही सिपाहियों को 22 जनवरी 1858 ई. को पूरी सेना के सामने फांसी दे दी गई।
इन 17 शहीदों के नाम हैं- बल्ली दुबे (सिपाही), लल्ला सिंह (सिपाही), बुद्धु (सिपाही),पन्नालाल (सिपाही), शिव गोविंद (सिपाही) और देवीदीन (सिपाही), मातादीन (सिपाही), ठाकुर सिंह (सिपाही), अकबर हुसैन (सिपाही), दुर्गाप्रसाद (सिपाही), नाजर मोहम्मद (सिपाही), परमानंद (सिपाही), शोभाराम (सिपाही), गाजी खान (हवलदार), अब्दुल हयात (गोलंदाज), मुल्लू (गोलंदाज), शिवरी नारायण (गोलंदाज)।

हनुमान सिंह को जिन्दा या मुर्दा पकड़ने पर 500 रुपय के इनाम की घोषणा की गई, लेकिन हनुमान सिंह  की कोई सूचना नही मिली।